सिर्फ आलोचना करने से जीवन नहीं चलता, गीतकार संतोष आनंद जी को नेहा ककक्ड़ ने जो दिया वो बेमिसाल है

81
loading...

जीवन में रचनात्मक सोच का बहुत बड़ा योगदान है इससे कोई भी अनभिज्ञ नहीं है क्योंकि अच्छी सोच और विचार तथा कार्यों से आदमी का मन मस्तिष्क प्रफूल्लित रहता है उसे अच्छे काम करने का प्रोत्साहन मिलता है और सबसे बड़ी बात यह है कि वो जिस क्षेत्र में सक्रिय है उसमें बड़ी सफलता के साथ साथ लोकप्रियता भी मिलती है क्योंकि समय और काल कोई सा भी रहा हो हर व्यक्ति अच्छी बात सुनने और साकारात्मक सोच रखने वालों के प्रति आर्कषित होने के साथ साथ उदार भावनाऐं तो रखता ही है इन्हें सब पसंद भी करते है। लेकिन कुछ लोग भले ही सोच और विचार इतने नाकारात्मक होते है जिन्हें सुनकर या पढ़कर देखकर अच्छे कार्य करने वालों का एक बार को मन खराब हो जाता हैं। लेकिन ऐसे लोग है कि अपनी कड़वी जुबान और लेखनी से विश्ववमन करने का तो कोई मौका चूकते नहीं है। सद् कार्यों में भी कमियां ढूंढ़ने में इन्हें महारथ हासिल होता है।
शायद यहीं कारण है कि देश और गीत संगीत प्रिय संगीतों के लिए प्रिय गीतकार संतोष आनंद को वर्तमान में स्थापित गीतकार और रियल्टी शो की जज एक बहुत ही मध्यम परिवार से उठकर अपने संर्घषों के दम पर एक मुकाम हासिल करने वाली तथा सबकी मदद करने और उनके साथ खड़ी रहने की सोच रखने वाली नेहरा ककक्ड़ द्वारा संतोष आनंद जी के चरणों में पांच लाख रूपये समर्पित करने और अपने आवाज में उनसे दुलार करते हुए एक गीत समर्पित करने वाली शख्सियत नेहा ककक्ड़ की इस सद् कार्य में भी नगेटिव बात ढूंढकर उसे ड्रामा दर्शाने की कोशिश की गई। मेरा मानना है कि अगर नेहा ककक्ड़ जैसी सद्भावना रखने वाली सोच के लोगों की इस प्रकार से आलोचना की जाएंगी तो फिर शायद कोई किसी की मदद करने और साथ खड़े होने के लिए तैयार नहीं होगा।
अपने एक सहायक के साथ रियल्टी शो इंड़ियन आॅयडिल के मंच पर बीते रविवार को नजर आये 1974 में सर्वश्रेष्ठ गीतकार फिल्म फेयर पुरस्कार तथा 1983 में दुबारा यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले संतोषानंद जैसे ही मंच पर पहुंचे वैसे ही इस मौके पर अपनी पत्नी के साथ मुखिय अतिथि के रूप में उपस्थित प्यारेलाल जी सहित जज और दर्शक तथा अतिथि और अपनी प्रतिभा का लोह मनवा रहे प्रतिभागी भी उठकर खड़े हो गये और उन्हें तालियों की गड़गड़ाहट के साथ संतोष आनंद का स्वागत किया जो अपने आप में बहुत बड़ी बात थी। खुद 2016 में उप्र सरकार से यशभारती प्राप्त श्री संतोष आनंद जी ने दोहराया कि दस साल बाद मैं मुम्बई आया और अपनी भाषा में कहा कि बहुत खुश भी हूं।
फिल्म शोर के गीत प्यार का नगमा है मौजों की रबानी है रोटी कपड़ा और मकान के गीत मैं ना भुलूंगा फिल्म प्रेमरोग के गीत मौहब्बत है क्या चीज हमको बताओ आदि गीतों के रचियता 81 वर्षीय संतोषानंद जी का जन्म उप्र के बुलंदशहर में हुआ और पहली बार उन्हें गीत लिखने का मौका मनोजकुमार जी द्वारा पूरब पश्चिम फिल्म में दिया गया।
रियल्टी शो के दूसरे जज विशाल डडलानी ने महान गीतकार के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि संतोषानंद जी ने जो कुछ लिख रखा हो या लिख सकते हो वो मुझे दे तो मैं उनके गीतों को संगीत में पिरोकर रिलीज करारूंगा। इस आयोजन में मौहम्मद रफी साहब के पुत्र अन्य अतिथियों के साथ मौजूद थे और जब संगीतकार प्यारे लाल और उनकी पत्नी अपने स्थान से उठकर संतोषानंद जी के पास पहुंचे तो वो गद्गद् हो गये और कोहली भरने की कोशिश करते हुए मेरे प्यारे भाई मेरे प्यारे भाई और उनकी पत्नी से भाभी बहुत दिनों बाद मिले कहते सुने गये।
यह बात सही है कि वो पूर्ण स्वस्थ नहीं है लेकिन इस रियल्टी शो में आकर और सबका जितना प्यार मिला उससे तथा अपने पुराने साथियों और नये प्रशंसकों मिलकर उनके चेहरे की जो चमक थी वो देखते बनती थी तथा उन्होंने अपनी पोती के लिये नेहा ककक्ड़ के आग्रह पर उनकी भेंट भी स्वीकारी।
कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि आलोचना करने और निगेटिव सोच रखने वाले भाईयों कम से कम हमें इतने सदाबहार गीत देने और अब आगे भी शायद कुछ लिखने के लिए प्रयत्नशील होने वाले संतोष आनंद जी जैसे लोगों को तो कहे अनकहे रूप में अपनी आलोचनाओं के मकड़ जाल में फंसलाकर उनके प्यार करने वालों को तो कम से कम उनसे दूर मत करों।
प्यारे भरे संवाद को नाट्कियता बताने वालों अगर जरा सी भी मानवीयता है तो अपने बेटे और पुत्रवधू के द्वारा आत्महत्या कर लिये जाने के बाद निरंतर अनजान से होते जा रहे महान संगीतकार को दिलासा देने के लिए नेहा ककक्ड़ ने जो किया वो तो उलेखनीय है कुछ तुम भी आगे बढ़कर करके दिखाओ तो जाने। और जब फिल्मी दुनिया वाले सरकारें और मीडिया उन्हें लगभग भूल गया था तो जो काम इंडियन आॅडियल के संचालकों ने किया वो तुम्हें करने से किसने रोका था। मेरा मानना है कि दुनिया समाज रिश्ते सब रचनात्मक सोच से ही मजबूत होते है इसलिए अपनी कुंठा को ऐसे लोगों के प्रति व्यर्थ न करो जो औरों के लिए पलक पावड़े बिछाकर तैयार रहते है। मेरा कोई नेहा ककक्ड़ या इंडियन आॅडियल वालों से कुछ लेना देना नहीं है लेकिन एक छोटे से घर में रहकर माता के जागरण में शामिल होकर इतने बड़े मुकाम तक पहुंची नेहा ककक्ड़ हमेशा खासकर संगीत से जुड़े लोगों की मदद करने की अग्रणी भूमिका में रही है। और संतोष आनंद जी को तो कुछ ही मिनटों में अपने गीत और व्यवहार से वो दिया जिसकी की उसकी जरूरत उन्हें वर्तमान है आपकी आलोचना की नहीं।

इसे भी पढ़िए :  नवनियुक्त 97 डिप्टी कलेक्टर को सीएम योगी ने सौंपे नियुक्ति पत्र

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

sixteen + 11 =