महिला सशक्तीकरण और स्वच्छता पर फोकस है ‘भोर’

11
loading...

नई दिल्ली। फिल्मकार कामाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म ‘भोर’ समाज का यथार्थ चित्रण है। इसकी कहानी रूढ़िगत भावनाओं और तमाम बेडि़यों को तोड़कर आगे बढ़कर कुछ कर दिखाने का ख्वाब देखने वाली एक लड़की की जिंदगी पर आधारित है। फिल्म में महिला सशक्तीकरण सहित गांव में शौचालय की व्यवस्था होने जैसे अहम मुद्दे का चित्रण किया गया है। इसे पर्दे पर दर्शकों के सामने बिहार की मुसहर जनजाति की पृष्ठभूमि के माध्यम से पेश किया गया है। फिल्म में बुधनी नामक इसी जनजाति की एक युवती महिला सशक्तीकरण के साथ ही साथ देश में स्वच्छता के मुद्दे पर संदेश देती नजर आई है। कामाख्या नारायण सिंह ने फिल्म से जुड़ी कुछ अहम पहलुओं पर बात की। फिल्म को बनाने का ख्याल कैसे आयाॽ इस सवाल के जवाब में कामाख्या ने बताया‚ मैं एक समाज कार्य का छात्र रहा हूं। डॉक्यूमेंट्री बनाने के चलते कॉलेज के दिनों में पहली बारजब मैंने एक कैमरा खरीदा था‚ तो मुसहरों की कम्युनिटी में ही मैंने इससे पहली तस्वीर ली थी। इंसान को हमेशा अपने आसपास की घटनाएं प्रभावित करती हैं। गांव में मैंने जाकर देखा कि शौचालय पर तमाम बातें होने के बावजूद लोग आज भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं और इसी के चलते मैंने इस मुद्दे को एक पढ़ी–लिखी युवती (बुधनी) की नजर से दर्शकों के सामने पेश करना चाहा। कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराहना प्राप्त कर चुकी इस फिल्म की शूटिंग के अनुभव और इसका यर्थाथ चित्रण की बात पर उन्होंने कहा‚ मैं एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर हूं। इसे पर्दे पर दर्शकों के सामने बिहार की मुसहर जनजाति की पृष्ठभूमि के माध्यम से पेश किया गया है।

इसे भी पढ़िए :  खाने में कहीं नकली जीरे का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं आप, ये हो सकती हैं परेशानियां

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

five − four =