राजनेता समझ लें, कमान से निकला तीर और जबान से निकले बोल का खामियाजा दूर तक भुगतना पड़ता है

31
loading...

प्रदेशों में सत्ता में सहभागी नेताओं को आखिर कौन सा डर सता रहा है जो वो अभी से बौखलाने लगे हैं। पश्चिम बंगाल और दिल्ली विधानसभाओं के चुनाव जब होंगे तब होंगे लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और श्री अरविंद केजरीवाल की स्थिति आम आदमी में अभी ऐसी नहीं है कि उनके समर्थकों को अपना राजनीतिक भविष्य अंधकारमय नजर आने लगेे। उसके बावजूद इन दलों के कुछ नेता कुंठित क्यों हैं यह तो वही जान सकते हैं मगर यह जरूर कहा जा सकता है कि उनके बड़बोलेपन और अनाप शनाप बकवास के चलते इन दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने जो मतदाताओं पर अपनी पकड़ अपने काम और व्यववहार के दम पर बनाई है अगर उन्होेने अपने सहयोगियों को नहीं रोका तो वो ढीली होने के साथ ही इनका जनाधार भी कमजोर हो सकता है।
क्योंकि अपने देश में अगर कोरोना महामारी को लेकर लगे लाॅकडाउन के समय को छोड़ दे तो धर्म के मामले में हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी जाति या संप्रदाय का हो वह काफी संवेदनशील होता है। इसलिए हर बात सह सकता है मगर अपने ईष्टदेव या देवी देवताओं पर गलत टिप्पणी करने वाले और उसके समर्थकों को वो एक आंख भी देखना पसंद नहीं करते हैं। इसलिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के सांसद श्री कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई करें और नियमों का पालन करते हुए उन्हें जेल भेजा जाए क्योंकि भाजयुमो के सदस्य आशीष जायसवाल द्वारा उनके खिलाफ एफआईआर कराई गई है और कहा गया है कि उनकी बात से हिंदुओं के साथ साथ बंगाली समाज भी आहत हुआ है। दूसरी तरफ हावड़ा मैथिली समाज के सदस्य अभय कुमार झा सहित तमाम लोगों ने कल्याण बनर्जी के कथन की निंदा करते हुए उनसे माफी मांगने की बात कही है। दूसरी तरफ आप पार्टी के विधायक श्री सोमनाथ भारती द्वारा यूपी के अमेठी जिले के जगदीशपुर क्षेत्र के भ्रमण के दौरान सरकारी आवास मंे निवास के दौरान यूपी के बच्चों को एक खबर के अनुसार कुत्तों का बच्चा कहने पर बवाल मचा हुआ है। उन्होंने बीते शनिवार को कहा कि यहां के अस्पतालों में आदमी के साथ साथ कुत्तों के बच्चे भी पैदा होते हैं। यह टिप्पणी उन्होंने क्यों कि यह तो वहीं जान सकते हैं मगर जब एक नाराज व्यक्ति ने उन पर स्याही फेंकी तो उन्होंने व उनके साथियों ने हंगामा किया जिस पर नायब तहसीलदार और सदर कोतवाल ने उन्हें समझाने की कोशिश की। लेकिन वह नहीं माने इस पर अफवाह फैलाने व नफरत फैलाने वाला भाषण देने की धारा 153 ए में गिरफतार कर उन्हें जेल भेजा गया। मैं विधायक पर स्याही फेंकने की बात को तो सहीं नहीं मान सकता लेकिन यह जरूर कह सकता हूं कि एक जिम्मेदार व्यक्ति को संयम की आवश्यकता जरूरी होती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया व यूपी प्रभारी संजय सिंह द्वारा पुलिस की कार्रवाई पर उठाए गए सवाल पर मुझे कुछ नहीं कहना है क्योंकि ऐसा करना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन चाहे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हो या दिल्ली के मुख्यमंत्री दोनों की जनता के प्रति जवाबदेही होती है और उनकी भावनाओं का आदर उन्हें करना ही चाहिए। इसलिए मेरा मानना है कि इन दोनों प्रमुख नेताओं के साथ ही अन्य राजनीतिक दलों के प्रमुखों को भी अपने सहयोगियों को यह बात समझानी होगी कि नफरत या रोष फैलाने वाले बयानों से ना सत्ता प्राप्त हो सकती है ना चुनाव जीता जा सकता है। इसके लिए मतदाता का दिल जीतने की आवश्यकता है। बोलने से पहले कई बार सोचना चाहिए क्योंकि पुरानी कहावत दीवार में ठोकी गई कील का छेद तो भरा जा सकता है लेकिन जिस प्रकार कमान से निकला तीर वापस नहीं आता उसी प्रकार जबान से निकले बोल वापस नहीं आते। जीवन भर किसी न किसी मौके पर उनका खामियाजा व्यक्ति को भोगना ही पड़ता है। इसलिए बोलने से पहले राजनीतिक दलों के नेता सोचना और जुबान को फिसलना बंद करें। समाज में भाईचारा व प्यार बना रहे इस बात को ध्यान में रखते हुए। यह जरूरी है।

इसे भी पढ़िए :  सरकार का फैसला: हर विधायक अपने क्षेत्र में बनवा सकेगा 5 करोड़ की सड़कें

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

fourteen − 8 =