मुखबिर बनाने या जुर्माना लगाने की बजाय, सरकार शस्त्र लाईसेंस की प्रक्रिया को बनाए सरल

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सरकार द्वारा आम आदमी की सुरक्षा और उसमें आत्मविश्वास की भावना बनी रहे शायद इसके लिए ही हर व्यक्ति को आवश्वकता के अनुसार बंदूक, राइफल, रिवाल्वर, पिस्टल के लाइसेंस देने का प्रावधान लागू किया गया होगा। लेकिन अब इसे सरकार की नीति कहे अथवा नौकरशाहों की इच्छा जो भी हो। कुछ अति महत्वाकांक्षी साधन संपन्न व्यक्तियों को छोड़ दें तो अन्यों के लिए अब शस्त्र लाइसेंस सुरक्षा के स्थान पर जान का बवाल बनते जा रहे हैं।
क्योंकि पहले तो शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करना ही आम आदमी के लिए ध्रकार्य है। अब किसी वजह से भागदौड़ कर ले भी लिया जाए तो फिर शस्त्र खरीदना इतना महंगा हो गया है कि इसके लिए पूरी हिम्मत जुटानी पड़ती है। मगर मरता क्या न करता वाली कहावत को आत्मसात कर जरूरतमंद व्यक्ति जैसे तैसे कर शस्त्र खरीद भी लेता है तो उसके बाद जो मुसीबत उसकी शुरू होती है वो एक प्रकार से उसे रूलाकर रख देती है।
क्योंकि पहले तो उसे शस्त्र होने के बाद भी ज्यादातर समय धारा 144 लागू रहने के चलते अपने साथ लेकर नहीं घूमा जा सकता है। दूसरा जो लाइसेंस राष्ट्रीय स्तर के नहीं है उनके हथियार मंडल व जिले से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। तीज त्यौहार दशहरा दिवाली पर अगर पूजन के बाद धार्मिक दृष्टिकोण को कोई फायर कर दिया जाए तो पुलिस कार्रवाई शुरू कर देती है। कोई चुनाव आए जो अब ज्यादातर होते ही रहते हैं के चलते या गर्म माहौल होने पर सबसे पहले लाइसेंस धारकों के शस्त्र जमा कर लिए जाते हैं। थाने में इन्हें जमा करानाा और वहां से इन्हें वापस लाना भी कोई आसान काम नहीं है। क्योंकि कभी थानेदार साहब नहीं है तो कभी असलाह देने वाला पुलिसकर्मी। अगर शस्त्र बेचने वाले की दुकान पर जमा कराए जाए तो उसका किराया देना पड़ता है।
यहां तक तो फिर भी ठीक था लेकिन शस्त्र लाईसेंस नवीनीकरण की फीस एक तो बेहिसाब बढ़ाई जा रही है दूसरे भूलवश अगर कोई समय से इस मामले में चूक गया तो कई हजार रूपये जुर्माना लगाया जाने लगा और अब तो 750 रूपये का स्टांप और जोड़ दिया जो इस बात का प्रतीक है कि लाइसेंस का नवीनीकरण भी अगर कोई आर्थिक रूप से कमजोर है और किसी खतरे को देखते हुए उसने लाइसेंस ले लिया तो उसके लिए संभव नहीं है।
अब रही बात नवीनीकरण कराने के लिए भी पूरा समय चाहिए क्योंकि असलाह बाबू को और कई कार्य लिखित या अनलिखित रूप से पकड़ा दिए जाते हैं जिससे वो कभी मिलते है कभी नहीं। और अगर मिल गए तो पहले बैंक में रूपये जमा कराने जाओ फिर आठ नौ जगह से लाईसेंस पर लगकर आने वाली रिपोर्ट का इंतजार करो कि आप पर कोई केस या बकायेदारी तो नहीं है।
इसके बाद भी किसी वजह से आपका लाईसेंस रिन्यू हो गया और किसी व्यक्ति ने आपकी शिकायत कर दी तो तमाम तरह के जवाब संबंधित अधिकारियों को देते घूमों और इसमें ग्रामीण कहावत दूल्हन वही जो पिया मन भाये के समान साहब चाहेंगे तो फाइल बंद हो जाएगी वरना जांच चलती रहेगी।
और अब एक नया काम शुरू हो गया है। कुछ अफसर अगर आप लाइसेंस धारक हैं तो आपको मुखबिर बनाने के प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ते। जानकारों के अनुसार पिछले दिनों तो कुछ पुलिस अधिकारियों ने एक आदेश जारी किया जिसमें स्पष्ट कहा गया कि किसी इलाके में कोई घटना होती है तो उसकी सूचना शस्त्र धारकों को देनी होगी और अगर वो ऐसा नहीं करते तो उनका लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। ऐसे में या तो अब आप साहब की मुखबिरी करो और ऐसा करने पर आस पड़ोस वालों के हाथों पिटों।
मुझे लगता है कि सरकार सुरक्षा के नाम पर या तो शस्त्र लाइसेंस देना बंद करे और अपने स्तर पर हर आदमी की सुरक्षा एवं भयमुक्त वातावरण की स्थापना करें वरना फालतू के जुर्माने और अन्य आर्थिक बोझ डालना बंद करके लाइसेंस देने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए जिससे शस्त्र लाइसेंस बोझ ना बनके आत्मविश्वास का कारण बना रहे।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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