एक हों वृद्ध व अनाथ आश्रम बच्चों और बुजुर्गों के हित में

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वर्तमान समय में पिछले कुछ दशक से भले ही नागरिकों के समक्ष कितनी ही आर्थिक तंगी क्यों ना हो तथा हमारी सरकारें विभिन्न मुददों को लेकर कितना परेशान हों लेकिन बच्चों का जीवन बचाने और उन्हें साक्षर बनाने के साथ ही उनके भरण पोषण तथा उज्जवल भविष्य के लिए काफी सहयोग किया जा रहा है। तो समाज के प्रबुद्ध जागरूक नागरिक भी इन क्षेत्रों में काफी काम कर रह हैं। बच्चों के लिए बाल सदन खोल नई नई योजनाएं बनाई जा रही है तो दूसरी ओर किसी भी रूप में निराश्रित अथवा परेशान बुजुर्गों के अंतिम समय में खुशी खुशी उनका जीवन बीते इसके लिए वृद्ध और सेवा आश्रम खोले जा रहे हैं। कई नई नई योजनाएं भी बनाई और संचालित की जा रही है। इस क्षेत्र में भी नागरिक तथा दानवीर पूरा योगदान दे रहे हैं।
लेकिन फिर भी कारण कुछ भी हो यह दोनों ही समस्याएं सुरसा के मुंह की भांति बढ़ती ही जा रही है क्योंकि कुछ जिम्मेदार लोगों की लापरवाही और उनमें व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते पूर्ण लाभ पात्र व्यक्तियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। और कहीं कहीं जो कुछ लोग तन मन धन से पूरा समय देकर अपनी सेवा से जरूरतमंद बुजुर्गों का जीवन सुरक्षित और खुशहाल बनाने की कोशिश कर रहे हैं वहां संबंधित विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा नियमों और आंकड़ेबाजी की आड़ लेकर परेशानी खड़ी की जा रही जिनके चलते वो भी हताश से नजर आने लगते हैं।
आज किसी अच्छी सोच वाले महानुभव द्वारा बिना नाम के व्हाटसऐप पर एक चित्र जारी कर आग्रह किया गया कि डियर गर्वेमेंट कृपया अनाथालय और वृद्धआश्रम एक ही कर दीजिए। किसी को मां बाप मिल जाएंगे तो किसी को बच्चे। यह लाइनें जहां मन को छूती हैं वहीं एक अच्छा संदेश भी सबको दे रही हैं क्योंकि कुछ लोग अपने बच्चों को नहीं पालना चाहते तो कुछ बच्चे जवान होकर अपने बुजुर्गों को साथ नहीं रखना चाहते ऐसे मंे जब अनाथ और वृद्ध आश्रम एक हो जाएंगे तब समाज और अपने परिवारों से उपेक्षित बच्चों और बुजुर्गों को जीने का सहारा और एक दूसरे का दुख दर्द बांटते हुए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होगा। ऐसे में एक बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि अगर सरकार ऐसा करती है तो आर्थिक सहयोग और हर प्रकार की मदद करने हेतु हाथ बढ़ाने वालों की कमी महसूस नहीं होगी। और जहां तक मेरा मानना है ऐसे में सरकार को अपनी तरफ से भी कोई आर्थिक सहायता देने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। हां बस अपने कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर अंकुश लगाकर यह निर्देश जरूर करने होंगे कि वो कागजी खानापूर्ति और आंकड़ेबाजी के चक्रव्यूह में फंसाकर ईमानदारी के साथ वृद्ध और अनाथ आश्रम चलाने वालों का मानसिक उत्पीड़न ना करें।
पीएम मोदी जी नया साल है। 11 तारीख का शुभ आंकड़ा है। अपनी ईमानदारी और निःस्वार्थ सेवा के लिए याद किए जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्व लालबहादुर शास्त्री जी की भी हम पुण्यतिथि मना रहे हैं। ऐसे अच्छे दिन अगर अनजान व्यक्ति की अपील लागू करने की सोच को अंजाम दिया जाए तो यह सबके हित में एक अच्छा निर्णण हो सकता है।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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