अब बच नहीं पाएंगे बड़े हुक्मरान भी

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अपनी जिम्मेदारियों का पालन करन में असफल लापरवाही और भ्रष्टाचार की शिकायतों वाले हर सरकारी व्यक्ति चाहे वह कर्मचारी हो या अधिकारी के विरूद्ध दंडात्मक कार्रवाई के नियम और कानून काफी पहले से लागू हैं लेकिन केंद्र में जबसे श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार आई और उन्होंने भ्रष्टाचार को समाप्त कर विकास को गति देेने तथा अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने की घोषणा की तब से चतुर्थ श्रेणी से लेकर आईएएस आईपीएस अफसरों पर विभिन्न प्रकार से कार्रवाई करने की खबरें पढ़नें और सुनने को मिलती ही रहती है। लेकिन यह बड़े ताज्जुब की बात है कि लाख प्रयासों के बावजूद भी सरकार के ईमानदार होने के चलते कुछ अफसर और कर्मचारी में से कुछ ऐसे हैं जो सुधरने को तैयार नहीं है। अंगुलियों पर गिने जाने लायक इन नौकरशाहों के कारण जहां ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ व शासन की नीतियों और योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रयास कर रहे अफसरों का मनोबल तो कमजोर हो ही रहा है। माननीय प्रधानमंत्री जी की योजनाएं भी प्रभावित हो रही है।
इस बात से शासन और सरकार भी शायद अनभिज्ञ नहीं है। खबरों के अनुसार प्रदेश के 100 से अधिक आईएएस अधिकारी अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा (आईपीआर) केंद्र सरकार को नहीं दे रहे हैं। शायद राज्य सरकार यह सनिश्चित करने के लिए आईपीआर को पदोन्नति से जोड़ने पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार ने आईएएस अधिकारियों के लिए प्रति वर्ष अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य किया है। इसमें उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त संपत्ति, स्वयं से अर्जित संपत्ति या परिवार के किसी सदस्य या अन्य के लिए ली गई संपत्ति का ब्योरा देना होता है।
प्रावधान है कि यदि आॅनलाइन आईपीआर दाखिल न किया गया तो संबंधित को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए इम्पैनल नहीं किया जाएगा और न ही उसे विजिलेंस क्लीयरेंस दी जाएगी। इसके बावजूद प्रदेश के 78 आईएएस अधिकारियों ने 2018 के लिए व 68 ने 2019 के लिए अचल संपत्ति का ब्योरा आॅनलाइन नहीं दिया। तों इनमें से कई ने दोनों वर्ष का ब्योरा नहीं दिया है। इनमें कई रिटायर हो चुके हैं। केंद्र ने प्रदेश सरकार को इस स्थिति की जानकारी दी है। शासन के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का कहना है कि प्रदेश सरकार ने आईपीआर दाखिल न करने की प्रवृत्ति को बेहद गंभीरता से लिया है। इस बार वार्षिक मूल्यांकन प्रविष्टि (एसीआर) तय सीमा तक न होने पर कई अफसरों की पदोन्नति स्थगित कर दी गई। अब पदोन्नति के समय आईपीआर का भी संज्ञान लेने पर विचार हो रहा है। इससे आईपीआर दाखिल न करने वाले अफसरों की पदोन्नति अटक जाएगी।
दूसरी तरफ जनपद और मंडल में कमिश्नर से लेकर डीएम तक जनसमस्याओं के समाधान से संबंध पदों पर अब अच्छी और ईमानदार छवि के ऐसे अफसरों की तैनाती किए जाने की भी चर्चा चल रही है जो आने वाले फरियादियों का काम करने के साथ साथ अपने व्यवहार से उन्हें शासन और सरकार की अच्छी योजनाओं का अहसास कराने के उनका लाभ भी पहुंचाएं और उन्हें संतुष्ट करे। सरकार की नीतियों और आदेशों का खुद भी इनके द्वारा पालन किया जाए। ऐसे उज्जवल छवि वाले हुक्मरानों की तैनाती किए जाने हेतु सक्षम अफसरों की खोज शुरू हो गई बताई जाती है। चर्चा है कि जिन लोगों पर अतिरिक्त प्रभार है उसे समाप्त करने के साथ ही जिलों में तैनात जिन अधिकारियों की शिकायतें मिल रही है उनको हटाकर अच्छी छवि वाले अफसर उनकी जगह भेजे जाने की तैयारी है जो मन लगाकर काम कर सके। इस काम में आईएएस से लेकर छोटे स्तर के अफसरों के पदों और तैनाती में भी निकट भविष्य में काफी फेरबदल हो सकता है।
एक चर्चा यह भी सुनी जा रही है कि अब 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती जी अपने कार्यकाल में जिस प्रकार से जनपद और मंडलों में तैनात अधिकारियों का फीडबैक लिया करती थी उसी प्रकार अब अगर यह चर्चा सही है तो केंद्र व प्रदेश की सरकारें भी दो स्तरों पर अपने जनप्रतिनिधियों और कुछ विश्वास पात्र अधिकारियों के माध्यम से सरकारी हुक्मरानों के कार्य का ब्यौरा भी इकटठा करने और सही छवि ना पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की शुरूआत भी जल्द ही कर सकती है। कुल मिलाकर कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि अनाधिकृत व चर्चित सूत्रों व चर्चाओं और खबरों से जितना पता चलता है उससे यह कहा जा सकता है कि सरकार ने अब उन नौकरशाहों पर भी अंकुश लगाने की योजना बनाई है जो अपने आपको विभिन्न नेताओं का कृपा पात्र बनाकर या जातियों के आधार पर जुगाड़ से नियुक्ति पाए जाने और फिर अपनी मनमर्जी से काम करते हैं। या विकास से संबद्ध योजनाओं को लागू करने की बजाय अपना जोड़ घटान लगाने में लगे रहते हैं। वो भी अब बक्शे नहीं जाएंगे। होगा क्या यह तो समय ही बताएगा लेकिन इन सब बातों से यह अहसास होता है कि शायद अब आम आदमी के भी अच्छे दिन आने वाले हैं। उनकी भी समस्याएं सुनी जाएंगी और परेशानियों का समाधान होगा।
इस बात को इससे भी बल मिलता है कि उच्च पदों पर आसीन कई आईपीएस, आईएएस व पीसीएस के खिलाफ तो कार्रवाई चल ही रही है छोटे अफसरों को पदानवत कर चपरासी और चैकीदार बनाया गया है।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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