भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं सोच रहे हमारा नंबर कब आएगा, एके शर्मा का शांति में भाजपा में सनसनीखेज प्रवेश

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11 जुलाई 1962 को यूपी के मउ जिले के रानीपुर ब्लाॅक के काझाखुर्द मंे जन्मे तथा 1988 में गुजरात कैडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए आईएएस श्री अरविंद शर्मा 2001 में जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो अरविंद उनके सचिव बने। जब मोदी जी ने केंद्र की सत्ता संभाली तब 2014 में वो पीएमओ में संयुक्त सचिव बने। 11 जनवरी 2021 को सूक्ष्म लघु एवं उद्योग मंत्रालय के सचिव पद से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेेने वाले 1988 बैच के आईएएस अरविंद शर्मा गत दिवस भाजपा प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और उपमुख्यमंत्री श्री दिनेश शर्मा की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा के प्रांतीय प्रवक्ता चंद्रमोहन का कहना है कि उन्होंने ऐसी इच्छा जताई थी इसलिए पार्टी में शामिल किया गया। अब श्री एके शर्मा कह रहे हैं कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाउंगा।
भाजपा सरकार में पूर्व नौकरशाह आरके सिंह, हरदीप पुरी, एस जयशंकर, ब्रजलाल, किरण बेदी आदि को पूर्व में काफी प्रमुखता दी जा चुकी है और दी जा रही है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि एके शर्मा का वर्तमान में अब एमएलसी बनना तो तय हो ही गया है कि क्योंकि आज घोषित चार प्रत्याशियों में उनका नाम भी शामिल हैं। कल क्या होगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन लोगों का कहना है कि श्री शर्मा को यूपी में संकटमोचक व सहायक की ऐसी भूमिका बनाकर भेजा गया है जो 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीताने की रणनीति के तहत सरकार की नीतियों का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए सरकारी हुक्मरानों को तैयार कर सकें क्योंकि सरकारी कामकाज की उन्हें पूरी जानकारी है। वित्तीय मामलों के गहरे जानकार और कुशल प्रशासक रहे श्री शर्मा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें प्रदेश में मंत्री तो बनाया जाना तय ही है क्योंकि प्रधानमंत्री के करीबी समझे जाते हैं इसलिए उपमुख्यमंत्री की कुर्सी भी दी जा सकती है। बताते चलें कि प्रदेश में भूमिहार वोटो को जोड़ने का काम पूर्व में सूर्यप्रताप शाही और उपेंद्र तिवारी कर रहे हैं। तथा किसी जमाने में यूपी के मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार वर्तमान में जम्मूकश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बाद अब राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पूर्वांचल में श्री शर्मा को कददावर भूमिहार नेता के रूप में सक्रिय किया जा सकता है। जिससे गाजीपुर, वाराणसी, मउ, देवरिया आदि जिलों में वो अपना विशेष असर दिखा सके।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बीते दिनों संपन्न हुए स्नातक और शिक्षक क्षेत्र के एमएलसी के चुनाव में प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र बनारस में नतीजे भाजपा के समर्थन में अच्छे ना रहने को ध्यान मेें रखकर भी शायद श्री एके शर्मा को पद कोई भी हो मगर एक ताकतवर राजनेता के रूप में सक्रिय किया जा सकता है।
उनके पिता शिवमूर्ति राय रोडवेज में ट्रैफिक इंस्पेक्टर थे। उनकी तीन संतानों में सबसे बड़े अरविंद बचपन से मेधावी रहे। इलाहाबाद से एमए राजनीतिशास्त्र में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर पीएचडी की और अब बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश में उन्हें मिलेगी यह बिल्कुल तय है।
लेकिन पार्टी में नौकरशाहों की बढ़ती दखल और उन्हें दिए जा रहे प्रमुख पद को लेकर पार्टी के निष्ठावान जनसंघ के समय से जुड़े नेताओं से लेकर वर्तमान में कार्यकर्ताओं तक में भले ही वो खुलकर कुछ ना कह रहे हों और श्री एके शर्मा के आने का स्वागत भी करते हों मगर पर्दें के पीछे जो सुनाई देता है उससे पता चलता है कि उनमें यह कसमसाहट महसूस की जाती है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो क्या हम जीवनभर सभाओं में भीड़ बढ़ाने, नारे लगाने अथवा व्यवस्थाओं में ही लगे रहेंगे। इनमें से कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि नौकरशाहों को पार्टी में शामिल कर उनकी सलाह ली जाए लेकिन बिना किसी पद के क्योंकि वह पहले ही तीस साल तक विभिन्न रूपों में जनता पर राज कर चुके होेते हैं इसलिए उनके तजुर्बे का लाभ लेने में कोई परेशानी नहीं है क्योंकि उन्हें पेंशन भी मिलती है और सुविधाएं भी इसलिए पद किसी को भी दिए जाएं मगर वो कार्यकर्ता या नेता जो भी हो उसे दिए जाएं जो पार्टी का हमेशा निष्ठावान झंडे उठाने और दरी बिछाने में सबसे आगे रहा हो।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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