जातिविहीन समाज की स्थापना में नितिन गडकरी का बयान है महत्वपूर्ण

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जातिविहीन समाज और राजनीति में जातिवाद समाप्त करने सर्वसमाज की स्थापना की बात तो हमेशा ही की जाती रही हैं। और इस संदर्भ में शायद कुछ नियम कानून भी बनाए गए हैं। उसके बावजूद अपने देश में गांव से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक ज्यादातर कार्यों में सीधे सीधे या घुमा फिराकर आमने सामने या पर्दे के पीछे से जातिवाद हर जगह अपनी महत्वपूर्ण भूमिका शायद निभाता रहा है। राजनीतिक दलों में जातीय प्रकोष्ठ गठित किए जाते हैं। इनमें अपना प्रभाव कायम करने के लिए हर समाज के लोग अपनी जाति से संबंध संगठन खड़े कर उनके मुखिया बनते रहे हैं। मगर पहली बार बहुत दिनों बाद सत्ताधारी पार्टी के किसी बड़े नेता के रूप में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी का यह बयान कि पार्टी में जाति आधारित प्रकोष्ठ नहीं होने चाहिए। अपने आप में एक अहम बात है।
बताते चलें कि केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने बीते रविवार को कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल में जाति, धर्म अथवा समुदाय आधारित प्रकोष्ठ के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन कारकों की तुलना में प्रतिभा अधिक महत्वपूर्ण है। गडकरी राजनीतिक दलों में विभिन्न जातियों एवं समुदायों का प्रतिनिधित्व करने के लिए बने अलग अलग प्रकोष्ठों का हवाला दे रहे थे। पूर्वी विदर्भ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार संदीप जोशी के पक्ष में आयोजित रैली को संबोधित कर रहे थे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, मेरी स्पष्ट राय है कोई भी व्यक्ति अपनी जाति के हिसाब से नहीं बल्कि प्रतिभा के बल पर महान होता है। भाजपा में भी हमारे अलग-अलग प्रकोष्ठ हैं। जब मैं पार्टी का अध्यक्ष था तो मुझे इसका अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि मेरी राय यह है कि जाति एवं धर्म के आधार पर कोई प्रकोष्ठ नहीं बनाना चाहिये क्योंकि ऐसी इकाईयों का उपयोग नहीं है। इन प्रकोष्ठों के प्रतिनिधि पूछते हैं कि उनकी जाति के कितने लोगों को पार्टी ने टिकट दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा, मैं हमेशा कहता हूं कि हमारी पार्टी, हमारे कार्यकर्ता हमारा परिवार हैं। हमने कभी जाति एवं समुदाय के आधार पर राजनीति नहीं की। हम उन पार्टी कार्यकर्ताओं के पीछे खड़े हैं जो कठिन मेहनत करते हैं, हम उन्हें परिवार का सदस्य मानते हैं. यही भाजपा की विशेषता है। गडकरी ने कहा कि वह सामाजिक कार्य करने अथवा जरूरतमंदों की मदद करते हुए किसी की जाति और धर्म के बारे में विचार नहीं करते हैं।
मेरा मानना है कि सही मायनों में जातिविहीन समाज की स्थापना में श्री नितिन गडकरी जी का बयान एक अहम भूमिका निभा सकता है। इसलिए भाजपा को तो इसको लागू करने में पहल करनी ही चाहिए। अन्य राजनीतिक दलों को भी इसके अनुशरण में पीछे नहीं रहना चाहिए। क्योंकि अगर इन्होंने यह निर्णय ले लिया कि जाति आधारित प्रकोष्ठ नहीं होंगे तो फिर जातीय संगठनों के गठन में भी कमी आ सकती है। जो देश में भाईचारा सदभाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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