किसानों के मामले में कनाडाई प्रधानमंत्री का बयान उचित नही

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केन्द्र सरकार के द्वारा पास किये तीन कृषि कानूनों का हो रहा विरोध जग जाहिर है और क्योकि अपने देश में लोकतंत्र बहाल है और सरकार भी चाहे प्रदेश की हो या केन्द्र की देर सवेर हर बात को सुनती भी है वो बात दूसरी है की उस तक आवाज पहुंचाने के लिए कौन कौन से मार्ग अपनाये जाते है फिलहाल देशभर में इसके विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है उसमें कही भीड़ ज्यादा कम लेकिन अपनी बात कहने में अन्नदाता चूक नही रहा है। फिलहाल सरकार के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से वार्ता जारी है देर सवेर कोई ना कोई हल जरूर निकलेगा क्योकि किसान भी हमारे है और सरकार भी हमारी इसी बीच एक खबर के अनुसार दिल्ली सरकार द्वारा तीनों में से एक कानून अपने यहां लागू करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है बाकी दो पर विचार खबरों के अनुसार चल रहा है। कहने का मतलब सिर्फ इतना है की हम अपनी बात कहने और सुनने में पूरी तौर पर सक्षम में किसी भी बाहरी व्यक्ति को चाहे वो कोई भी हो उसे नीतिगत और व्यवस्था के अनुसार उनके बीच में बोलने का कोई अधिकार नही है और वो भी उस स्थिति में जब उनसे कोई ऐसा आग्रह ना कर रहा हो। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर का कहना है कि किसान कानुनों की दिक्कत बताये सरकार आपतियां दूर करेगी तो किसान कह रहे है तो समिति से ऐतराज नही पहले तीनों कानून वापस हो। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जुुझारू नेता श्री राहुल गांधी का कहना है कि सरकार किसानों को उनका अधिकार दे। उप्र की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और पूर्व मुख्यमंत्री सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव आदि सहित तमाम राजनेता किसानों के हित में खड़े है। मै ना तो इस स्थिति में हूं की कोई राय दू और ना ही मेरा कद इतना बड़ा है लेकिन क्योकि मामला हमारे देश और हमारे परिवार के सदस्यों से सबंध है इसलिए मुझे इसमें कुछ गलत नही लगता कि मै कुछ अपनी बात भी कहूं। मेरा मानना है कि परिस्थितियां कुछ भी रही हो लेकिन कनाडा के प्रधानमंत्री आदरणीय जस्टिन टूडो को हमारे आंतरिक मुद्दों में विदेश नीति शिष्टाचार और अपने पद की गरिमा के चलते किसान आंदोलन को लेकर चाहे उनकी भावना कितनी भी पावन रही हो उन्हे ब्राहमक सूचनाओं पर आधारित टिप्पणीयां नही देनी चाहिए। भारत सरकार द्वारा समय रहते इसका उचित विरोध भी कर दिया गया है। मेरा तो सिर्फ इतना मानना है की सरकार हो या किसान व्यापारी हो या जवान हम सब एक है घर में जब 4 बर्तन होते है तो बजते भी है लोकतंत्र में सबकों अपनी बात और समस्या कहने का हक है और उसी का यह अंग है इसलिए किसी को भी इस मामले में दखल अंदाज नही करना चाहिए। शिव सेना से राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी और भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव आदि की राय भी इस मामले में पूरी तौर पर सही है मुझे लगता है की भारतीय प्रधानमंत्री जी को भी अपने स्तर पर कनाडा के अपने समकक्ष से सीधे विरोध जताना चाहिए क्योकि यह हमारे परिवार का मामला है।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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