आखिर आम आदमी विरोधी बात क्यों कर रहा है रिजर्व बैंक, लाभांश हर उपभोक्ता को हर हाल में मिलना ही चाहिए

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अर्थव्यवस्था सुधारने के नाम पर विभिन्न मुददों के लिए गठित समितियों की रिपोर्ट लागू करने की बात कहकर रिजर्व बैंक के अधिकारी आजकल जो निर्णय ले रहे हैं वो किसी भी रूप में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की जनहित करने की भावना के तहत नहीं है। पहले प्राइवेट औद्योगिक घरानों को बैंकों के लाइसेंस देने की बात चली जो किसी भी रूप में सिवाय लाईसेंस मिलने वाले उद्योगपतियों के अलावा किसी के भी हित में नहीं थी। अब कोविड के असर को देखते हुए 2019-20 का लाभांश ना देने की बात कही जा रही है। सवाल यह उठता है कि जिन उपभोक्ताओं को किसी भी रूप में इन लाभांश का फायदा प्राप्त होना था उन्हें इससे वंचित क्यों किया जा रहा है। और एक प्रकार से आम आदमी पर अगर कोई औद्योगिक घराना रूपया लेकर नहीं देता है तो उसके नुकसान का आर्थिक बोझ किसी ना किसी रूप में डालने का मार्ग कहे अनकहे रूप में क्यों प्रशस्त किया जा रहा है। अर्थव्यवस्था सुधारने के नाम पर कल को जमा एफडीआर पर मिलने वाला ब्याज खत्म करने की बात भी कही जा सकती है और जब मनमाने निर्णय होने हैं तो अल्पबचत पर जो लाभ मिलते हैं उनको खत्म कर दिए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। मैं रिजर्व बैंक या वित्त मंत्रालय के सुधारात्मक निर्णयों का विरोधी तो मैं नहीं हूं लेकिन कोविड-19 का असर बैंकों पर ही नहीं आम आदमी पर भी पड़ा है उसकी भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रही इसलिए उसे लाभांश जो मिलना चाहिए वो मिलना ही चाहिए। जहां तक रही बात स्थिति सुधारने की तो रिजर्व बैंक बैंक कर्मियों के शाही खर्चे खत्म करने के अतिरिक्त जो मोटी तनख्वाह और लाभ तथा सुविधाएं इन्हें दी जा रही है वो कम करे तथा जो हजारों करोड़ रूपये का ऋण विभिन्न तरीके से कुछ लोगों द्वारा चाहे वह किसी भी क्षेत्र में सक्रिय हो वापस नहीं दिया जा र हा है उसे बटटे खाते में डालने की बजाय उसकी वसूली करने के साथ साथ बैंकों के जो अधिकारी इसमें सम्मिलित रहें हो उनकी सेवाएं समाप्त करते हुए व्यक्तिगत संपत्ति से हो वसूली जिससे भविष्य में कोई और ऐसी सोच को पनपने ना दे। प्रधानमंत्री जी और वित्त मंत्री जी तथा रिजर्व बैंक के गर्वनर साहब बड़े बड़े उद्योगपतियों के ऋण वसूली में ढील की जा रही है दूसरे घाटे में चल रहे बैंकों को बंद करने या अन्य बैंकों में विलय करने के साथ उन्हें आर्थिक सहायता दी जा रही है वो बंद हो और अब रिजर्व बैंक आम आदमी के आर्थिक लाभों पर किसी भी प्रकार की काटौती के बारे में ना सोचे क्योंकि इससे कोरोना काल में बुरी तरह टूट चुके नागरिक आसानी से संभल नहीं पाएंगे। मैं किसी को भड़काने या वित्त मंत्रालय अथवा रिजर्व बैंक के फैसले के खिलाफ जाने को नहीं कह रहा हूं लेकिन मेरा मानना है कि हमारे जनप्रतिनिधियों को भी समय रहते एसी कमरों में बैठकर उपभोक्ताओं के हित के विरूद्ध योजना बनाकर उन्हें लागू करने वालों के विरूद्ध शांति पूर्ण तरीके से आवाज बुलंद करनी होगीी वरना आम आदमी तो कहीं ना नहीं रहेगा। क्येांकि आज लाभांश से वंचित किया जा रहा है। कल को यह भी कहा जा सकता है कि जो गरीब आदमी ने विशेष मौकों पर काम आएगी सोचकर एफडी आदि करा रखी है उन पर ब्याज नहीं मिलेगा। ऐसा हो इससे पहले ही जागों और अपनी बात कुछ करने में सक्षम लोगों के कानों तक पहुंचाओं। जो भविष्य में किसी भी प्रकार का नुकसान उठाने के लिए मजबूर ना होना पड़े।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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