नीतीश के सिर ही बंधेगा बिहार में मुख्यमंत्री का सेहरा, लोजपा नेता को बोलने पर रखना होगा काबू, 16 से 18 के बीच गांधी मैदान में हो सकती है शपथ

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बिहार विधानसभा चुनाव में राजग को पूर्ण बहुमत मिल गया। चर्चा है कि दीपावली बाद श्री नीतीश कुमार पुनः मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। हिन्दी भाषी क्षेत्रों में निरंतर कई बार मुख्यमंत्री रहने के उपरांत पुनः मुख्यमंत्री की शपथ लेने जा रहे नीतीश कुमार द्वारा राजस्थाान के पूर्व सीएम श्री मोहनलाल सुखाड़िया का रिकार्ड तोड़ा जाएगा। पूर्व में भाजपा के प्रमुख नेताओं सहित माननीय प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री आदि यह स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार में भले ही किसी की भी सीटें कम ज्यादा हों लेकिन राजग के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे। अपनी और सहयोगियों की जीत को जनता की जीत बताने वाले नीतीश को लेकर कुछ लोगों द्वारा यह अंदाज लगाया जा रहा था कि क्योंकि भाजपा को ज्यादा सीट मिली है इसलिए सुशील मोदी मुख्यमंत्री हो सकते हैं। मगर बीती रात को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित हुए जीत के जश्न के बाद जो खबरें उभरकर आ रही हैं उनसे यह सभी संभावनाएं निरस्त होती नजर आती हैं। बिहार में कौन जीता कौन हारा किसको कितना राजनीतिक नुकसान हुआ उसे अगर फिलहाल छोड़ दें तो वर्तमान राजनीति में सबसे ज्यादा गिरावट पूर्ण बयान लोजपा के नेता श्री चिराग पासवान का यह बयान रहा कि केंद्र मंें राजग के साथ रहेगी पार्टी, जदयू को हराना और राजग को जीताना था मुख्य उददेश्य लेकिन नीतीश कुमार को समर्थन नहीं करेंगे। सवाल यह उठता है कि फिल्मी दुनिया में असफलता का सफर तय करके राजनीति में वापस लौटे चिराग पासवान के बारे में भाजपा के बिहार के प्रभारी महासचिव भूपेंद्र यादव का यह कहना कि लोजपा ने पहुंचाया है पार्टी को नुकसान। अपने आप में एक बड़ी बात है। ऐेसे में बैगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की कहानी को चरितार्थ करते हुए चिराग पासवान जो कह रहे हैं उसका कोई मतलब नजर नहीं आता है क्योंकि बिहार में नीतीश कुमार और भाजपा अपने दम पर सरकार बनाएगी। केंद्र मंे नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत से सरकार चल रही है। बिहार सहित कई प्रदेशों में हुए उपचुनावों के नतीजों ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नडडा का कद बढ़ाया है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्याें और नीतियों में जनता ने विश्वास व्यक्त किया है वरना बिहार में विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश यूपी आदि मंे उपचुनाव में जो स्थिति भाजपा की मजबूत हुई है वो नहीं होती।
यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि हिंदी क्षेत्रों के राजनेताओं का चुनावी ट्रेड बदलने में नीतीश कुमार सियासी सरदार बनकर उभरे हैं। और मतदान के बाद जो एग्जिट पोल आए थे उनको झूठा साबित कर 16 से 18 नवंबर के बीच जनता के नेता जनता के बीच खड़े होकर मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं।
बिहार चुनाव के बाद जो राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आए हैं उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार जी के सामने इस बार भी कई चुनौतियां मुंह बाये खड़ी होंगी और उन्हें विपक्ष का पहले के मुकाबले मजबूती से सामना करने की रणनीति बनानी पड़ेगी।
बता दें कि इस चुनाव में महिलाओं को कम संख्या में जीत मिली तो यहां 81 फीसदी विधायक करोड़पति बताए जाते हैं। जो इस बात का प्रतीक है कि वो समझदार तो होंगे ही उन्हें कोई भी अपने हिसाब से आसानी से घुमा नहीं पाएगा।
कुल मिलाकर कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि नीतीश कुमार तो पहले ही इस कार्यकाल के बाद राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर चुके हैं। और फिर राजग का कोई विधायक भी चुनाव नहीं जीता है तो फिर चिराग के समर्थन देने ना देने से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है हां जिस हिसाब से इनकी पार्टी के उम्मीदवारों को वोट प्राप्त हुए उससे अगर वह सड़क पर उतरे तो सरकार के समक्ष कुछ कठिनाई जरूर पैदा कर सकते हैं। मगर यह संभावना भी कम ही है क्योांकि वो केंद्र में राजग का समर्थन करने की बात दोहरा चुके हैं। ऐसे में अगर बिहार में अड़ंगेबाजी करते हैं तो केंद्र में भी अलग थलग पड़ सकते हैं। स्मरण रहे कि दो तिहाई विधायक अपराधिक प्रवृति के खबरों के अनुसार बताए जाते हैं। इसलिए भी नीतिश कुमार थोड़ी सी होशियारी से सफलतापूर्वक पूरा कार्यकाल चला सकते हैं क्योंकि कुछ करने की बजाय अपराधिक छवि के विधायकों का समर्थन ही उन्हें जुटाना होगा और इस काम में उन्हें महारथ हासिल है क्योंकि सत्ता पर दबदबा बनाए रखने के लिए कब किसे दोस्त और दुश्मन बनाना है यह वो अच्छी प्रकार से जानते हैं।
कुल मिलाकर अगर देखें तो एक जमाने में पूरी दुनिया में जीत का इतिहास बनाने में सफल रहे स्व. रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत को अगर संभालना है तो चिराग पासवान को बड़ी गंभीरता और धैर्य के साथ कम बोलते हुए अपने आपको आगे बढ़ाना होगा। क्याोंकि वर्तमान में उनके पास किसी को देने के लिए ऐसा कुछ नहीं है जिसको लेकर राजनीति में नेताओं की पूछ होती है। अगर चिराग संभले नहीं तो जो स्थिति यूपी में वर्तमान में रालोद की हो गई है वो होते देर नहीं लगेगी।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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