क्या वाकई जमीनी ज्ञान नहीं है कांग्रेस नेता को! राहुल जी आवश्यकता असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और व्यापारियों के हित में आवाज उठाने की है सरकारी कर्मचारियों के नहीं

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गरीब मजबूर और मध्यम दर्जे को क्यों भूल गए आप, कांग्रेस के पूर्व राष्टीय अध्यक्ष और मेरी निगाह में जुझारू ऐसे नेता जो अपने कार्यकर्ता व अपनी पार्टी के विचारधारा वाले लोगों को एक सूत्र में बांधे रखने में पूरी तौर पर सफल हैं राहुल गांधी ऐसी छवि के नेता हैं। लेकिन सरकारी कर्मचारियों की हालत पस्त सरकार नहीं दे रही है ध्यान उनका बयान मुझे लगता है कि ना तो आम आदमी के लिए न्यायोचित है और ना ही समयानुकूल। और पिछले कुछ वर्षों से शायद सत्ता प्राप्त करने और सरकार चलाने का अवसर उन्हें ना मिलने के पीछे भी यही बात मुख्य रूप से हो सकती है। राहुल गांधी का यह कथन कि खाद्य़ पदार्थों की कीमतों में वृद्धि शत प्रतिशत पहुंच गई है। हो सकता है सही हो तथा कोरोना और अर्थव्यवस्था के बाद मनरेगा मजदूरों के मुददे पर सरकार पर हमला बोल रहे राहुल जी की सोच सही है या गलत इस विवाद में ना पड़कर मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि मनरेगा मजदूरों को अपनी दिहाड़ी का पैसा निकालने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं सही हो सकता है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का यह कथन कि सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के कर्मियों के लिए होने वाले महंगाई भत्ते पर तीस जून 2021 तक रोक लगा दी। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा था और कहा कि सरकार ने जनता के बजट में आग लगा दी है मोदी सरकार कीमत 100 फीसदी बढ़ने का कर रही है इंतजार। कांग्रेस और उसके पार्टी नेताओं व प्रवक्ताओं के जो मत हैं उसके बारे में तो मुझे कुछ विशेष नहीं कहना है लेकिन सांसद और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी द्वारा जो सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया गया है कि महंगाई भत्ता रूकने से कर्मचारियों की हालत पस्त है लेकिन सरकार के पूंजीपति मित्र मुनाफा कमाने में मस्त है। उन्होंने सेटल पीएसयू कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने की बजाय रोकने की निंदा की। हो सकता है उन्होनंे राजनीतिक दृष्टिकोण से यह सही बयान दिया हो लेकिन सिर्फ बातों की है मोदी सरकार कुचल रही है गरीबों के अधिकार जैसे बिंदु को उठाने वाले राहुल गांधी को शायद समाज के विभिन्न वर्गों व गरीब अमीर के बारे में कोई पूर्ण जानकारी नहीं है और उनके सहयोगी शायद उन्हें इस बारे में बताते नहीं है वरना वो सरकारी कर्मचारियों को लेकर जख्मों पर नमक छिड़क रहा है केंद्र जैसे बयान देते हुए उनकी वकालत नहीं करते। क्योंकि उनके इन बयानों से आम आदमी के बीच होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट हो रहा है कि अगर इस समय वर्तमान में कोई तरह मस्त और प्रसन्न तथा आर्थिक रूप से मजबूत है तो वो सिर्फ सरकारी नौकर है चाहे वह फोर्थ क्लास हो या क्लास वन सब पूरी तरह खुशहाल हैं। और राहुल जी कह रहे हें कि सरकारी कर्मचारी पस्त है। जबकि ध्यान से सोचे तो वैसे तो एक सी स्थिति रहती है लेकिन व्यापारी और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले और मध्यम दर्जे का व्यक्ति अत्यंत परेशान है और उसे दो समय की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। उन बेसहारा मजबूर लोगों की आवाज बन उनकी समस्याएं उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की बजाय राहुल गांधी जी साधन संपन्न और हर तरह से मौज में सरकारी कर्मियों की बात उठाकर कह रहे हैं कि उनकी हालत पस्त हैं। जिससे ऐसा लगता है कि पूर्व में उनके बारे में जो विपक्षी दलों के नेता और कांग्रेस छोड़कर जाने वाले लोग कहते रहे हैं कि वो जमीनी जानकारी नहीं रखते हैं और आम आदमी की समस्या क्याा है उन्हें नहीं पता है लगता है वो सही है। वरना राहुल गांधी जी इस प्रकार का बयान या टिवट नहीं करते जिसमें वर्तमान में जरूरतमंद पात्र व्यक्ति की चर्चा भी नहीं है। क्योंकि देश का छोटा व्यापारी कोरोना काल में जिस प्रकार से बर्बाद हुआ है वो किसी से छिपा नही है। रोजगार खत्म हो गए हैं सब जानते हैं लेकिन सरकारी बाबुओं को सबकुछ मिल रहा है यह सबको पता है। और राहुल जी इन्हीं की वकालत कर रहे हैं।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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