सरकार जुटाये राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के बारे में पूर्ण जानकारी

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राष्ट्रपिता के बारे मेें उपलब्ध जानकारियों के अनुसार सरोजनी नायडू जी द्वारा 28 अप्रैल 1947 को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपने संबोधन में महात्मा गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधन किया गया था। इससे जिज्ञासित होकर बनारस निवासी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव कमलेश सिंह ने सूचना का अधिकार के तहत गृहमंत्रालय से जानकारी मांगी की राष्ट्रपिता कब बने महात्मा गांधी? जिसके उत्तर में कहा गया कि संबंधित कोई भी विवरण मंत्रालय के पास नहीं है। जिससे पता चलता है कि गृह मंत्रालय को पता ही नहीं है कि वह कौन सी तारीख थी, जिस दिन महात्मा गांधी जी को आधिकारिक रूप से राष्ट्रपिता घोषित किया गया था। इस बात का खुलासा बनारस के युवा की ओर से दाखिल की गई आरटीआई से हुआ है।
बनारस के अस्सी क्षेत्र निवासी पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सूचना का अधिकार के तहत गृह मंत्रालय से यह जानकारी कमलेश ने 13 अगस्त को पंजीकृत डाक से अपने प्रश्न गृह मंत्रालय को भेजे थे। उन्होंने जानना चाहा था कि किस सन् में, किस तारीख को, किस व्यक्ति ने सर्वप्रथम इस बात की आधिकारिक घोषणा की थी। 13 अगस्त को भेजी आरटीआई का जवाब 29 अक्तूबर को लिखा गया। वह जवाब बीती 19 नवंबर को कमलेश को प्राप्त हुआ। खबर के अनुसार कमलेश ने बड़ी उम्मीद के साथ लिफाफा खोला, लेकिन लिफाफे में रखा जवाब पढ़ने के बाद उन्हें निराशा हुई। क्योंकि जानकारी के नाम पर सिर्फ इतना लिखा हुआ था कि आप द्वारा मांगी गई जानकारी से संबंधित कोई विवरण मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है। यह उत्तर गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव राकेश कुमार सिंह की ओर से लिखा गया है। कमलेश सिंह का कहना है कि अनौपचारिक रूप से बापू को राष्ट्रपिता कह कर पहला संबोधन सरोजनी नायडू ने 28 अप्रैल 1947 को एक प्रेसकाॅन्फ्रेंस में किया था।
यह जानकारी होने के बाद मैंने आधिकारिक रूप से राष्ट्रपिता घोषित किए जाने का दिन जानने की जिज्ञासा से गृह मंत्रालय से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी।
कमलेश सिंह द्वारा मांगी गई सूचना के उत्तर में जो जानकारी दी गई मुझे लगता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के बारे में उसमें कुछ भी ना बताना समयानुकूल नहीं कहा जा सकता। मेरा मानना है कि केन्द्रीय गृहमंत्रालय को इतिहास सजोने वाले तथा कानून और न्यायमंत्रालय से संपर्क कर राष्ट्रपिता के बारे में पूर्ण जानकारी संग्रहित करनी चाहिए क्योंकि राष्ट्रपिता की गरिमा और सम्मान तथा युवाओं की जिज्ञासा को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में पूर्ण विवरण हमारी सभी सरकारों के पास अनिवार्य रूप से होना चाहिए। क्योंकि देश में राष्ट्रपिता का संबोधन आजादी की बाद से सिर्फ गांधी जी के लिए होता आया इसलिए उन्हें कब यह संबोधन और पद मिला यह महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन युवाओं की जिज्ञासा शांत करने और भावी पीढ़ी को उनके प्रेरणास्रोत व्यक्त्तिव से कुछ सिखने का मौका मिले।
इसलिये यह जानकारी मौजूद होनी चाहिए और जब हम हजारों साल पुराना इतिहास विभिन्न मामलों में ढूंढ निकालते है तो ऐसे में राष्ट्रपिता के बारे में पूर्ण विवरण मिलना कोई बड़ी बात नहीं है।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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