कोई भूखा ना सोए प्रधानमंत्री की भावना हो सकती है साकार

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सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से पात्र व्यक्तियों को राशन उपलब्ध कराने को लेकर आए दिन मीडिया में दुकानदारों में गडबड़ी किए जाने की खबरें खूब मिलती हैं और कभी कभी तो ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत कर बड़े बड़े घोटाले तक हो जाते हंैं और शायद यही कारण है कि हमारी सरकार हर व्यक्ति को खाना उपलब्ध कराने के जो भरपूर प्रयास कर रही है उसके बावजूद कुछ लोगों की भूखमरी से मौत तक हो जाती है। लेकिन हर बात को नकारात्मक रूप से सोचकर अच्छे निर्णय को लागू करने से नहीं बचा जा सकता इसीलिए खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने कहा कि उसकी खाद्य सुरक्षा अनुपालन प्रणाली (एफओएससीओएस) एक नवंबर 2020 से पूरे देश में परिचालन में आ जायेगी। इस नई प्रणाली को मौजूदा खाद्य लाइसेंसिग और पंजीकरण प्रणाली के सथान पर लाया जा रहा है। वर्तमान में नई प्रणाली जून से नौ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों- तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, ओडिशा, चंडीगढ़, गोवा, मणिपुर, पुड्डुचेरी और लद्दाख में चालू है। नियामक ने एक बयान में कहा, ‘‘एफएसएसएआई अब एक नवंबर 2020 से इस खाद्य सुरक्षा अनुपालन प्रणाली को पूरे देश में परिचालन में लाने के लिये तैयार है।’’ इसने कहा है कि वर्ष 2011 से इसका ऑनलाइन एफएलआरएस (खाद्य लाइसेंसिंग एवं पंजीकरण प्रणाली) पूरे लाइसेंसिंग पारिस्थिकी तंत्र की आत्मा है। यह सभी राज्यों में चालू है और अब तक 70 लाख लाइसेंस पंजीकरण जारी किए जा चुके हैं, जबकि 40 लाख से अधिक लाइसेंसधारी/पंजीकरण कराने वाले इस पर सक्रिय रूप से लेन-देन कर रहे हैं। बयान में कहा गया है कि ‘‘एफएएसएसआई अपने क्लाउड आधारित, उन्नत नए खाद्य सुरक्षा अनुपालन आॅनलाइन मंच ‘एफओएससीओएस’ को शुरु कर कर रहा है। यह मौजूदा एफएलआरएस का स्थान ले लेगा।
कुल मिलाकर एक नवंबर से देशभर में एक खाद्य सुरक्षा प्रणाली जो लागू होने जा रही है वो स्वागत योग्य है। इससे कम या ज्यादा जरूरतमंद व्यक्तियों को फायदा जरूर होगा और अगर सही वितरण हो गया तो प्रधानमंत्री मोदी की कोई भी भूखा ना सोए की भावना भी साकार हो सकती है।

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