पीएम और सीएम साहब-भ्रष्टाचार के लिए जनता ही दोषी क्यों? अफसरों के खिलाफ भी हो कार्यवाही, एक हाथ से नहीं बजती ताली

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आये दिन समाचार पत्रों में पढ़ने और सुनने को मिलता है कि भारी संख्या में बिजली चोर पकड़े गये तो कहीं चर्चा चलती है कि अवैध निर्माण करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए उन पर जुर्माना लगाया और निर्माण सील कर दिया गया तो कभी पता चलता है कि फलां स्कूल या मदरसे में ज्यादा छात्र दिखाकर स्काॅलरशिप के नाम पर सरकारी धन हड़पना तो कभी जनता के लिए आने वाला राशन खुले बाजार में बेचने हेतु सस्ते गल्ले के दुकानदार तो कभी गंदगी पाए जाने पर व्यापारियों के विरूद्ध कार्यवाही हुई तो अभी पिछले दिनों पढ़ा की दो लोगों ने थूक दिया तो उन पर जुर्माना लगा। मुद्दा चाहे जीएसटी का हो या तेल प्रकरण अगर पहली नजर मंे देखे तो यह सब बाते ठीक दिखाई देती है क्योंकि गलत काम करने वाला कोई भी हो किसी भी क्षेत्र में सक्रिय हो उसे नियम विरूद्ध काम करने व सरकारी धन में भ्रष्टाचार की सजा तो मिलनी ही चाहिए। मगर सवाल यह उठता है कि क्या इस सब में अकेले जनता ही दोषी है सरकारी अधिकारी और कर्मचारी क्यों नहीं? आखिर ताली एक हाथ से तो बजती नहीं वाली कहावत ध्यान में रखकर सोचे तो अगर कहीं किसी भी विभाग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में कोई कमी चोरी अथवा सरकारी धन का दुप्रयोग या जनता के हितों पर कुठाराघात हो रहा है तो उसके लिए दोषी करने और कराने वाले दोनों के खिलाफ होनी चाहिए कार्यवाही लेकिन हो ये रहा है कि सरकारी बाबू तो चाहे वो किसी भी स्तर के हो साफ बच रहे है और आम आदमी सजा भुगतने की श्रेणी में खड़ा है जबकि कहीं कुछ हो रहा है तो बिना सरकारी कर्मचारी की सहमति के कोई कुछ नहीं कर सकता। मेरा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह साहब केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आदि से विन्रम अनुरोध है कि सरकारी पैसे का दुरूप्रयोग रोकने तथा जनहित की सरकारी योजनाओं व नीतियों का लाभ समय से पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने विकास कार्य समय और गुणवत्ता पूर्ण तरीके से पूर्ण कराने तथा भ्रष्टाचार व लापवाही को रोकने हेतु अगर किसी भी क्षेत्र में कहीं भी किसी भी प्रकार की जनहित की अनदेखी सरकारी धन का दुरूप्रयोग तथा सरकार की भावनाओं और सोच के विपरित काम होता पाया जाए तो जनता के आदमी के साथ साथ संबंधित सरकारी विभाग के अफसर और कर्मचारियों के खिलाफ भी निलंबन से लेकर सेवा समाप्ति तक की कार्यवाही की जाए तभी माननीय प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी के भ्रष्टाचार समाप्त करने के अभियान को पूर्ण सफलता मिल सकती है। क्योंकि जब तक अकेले जनता फंसती रहेगी और अफसर बचते रहेंगे तब तक कहीं भी किसी भी स्तर पर करप्शन और तानाशाही नहीं रूक पाऐंगी।
बताया जा रहा है कि नगर निगम और स्थानीय निकाए गंदगी के लिये नागरिकों से जुर्माना वसूल करने की तैयारी में लगे हुए है। सही भी है कि साफ सफाई रहनी चाहिए मगर जो गंदगी इन विभागों के कारण फैल रही है उसके लिए दोषी कौन है और इनके अफसरों से वसूली और जुर्माना वसूलने का अभियान कब चलेगा क्योंकि जब तक यहां तैनात सरकारी तख्वाह प्राप्त व्यक्तियों के खिलाफ जब तक कुछ नहीं होगा तब तक या तो स्वच्छता अभियान की सफलता दिव्य सपन बनी रहेगी या कागजी आंकड़ों में दिखाई देती रहेगी।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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