क्या शासन की नीतियों का अफसर कर रहे हैं पालन, सरकार के मुखिया को देना होगा ध्यान

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केंद्र व प्रदेश की सरकारों की जनहित की योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने तथा शासन की नीतियां लागू और उनके अनुसार काम करने का संकल्प हमेशा ही सरकारी पदों पर नियुक्त जनप्रतिनिधियों के साथ साथ विभिन्न कार्यालयों में तैनात होने वाले छोटे बड़े अधिकारियों द्वारा अपना कार्यभार संभालने के तुरंत बाद मीडिया से वार्ता करने के साथ ही सहयोगियों से मुलाकात में ऐसा संदेश स्पष्ट रूप से दिया जाता है।
लेकिन मैं किसी पर कोई आरोप तो नहीं लगा रहा हूं मगर जितना सामने नजर आता है। उससे जो स्पष्ट दिखाई दे रहा है उसके अनुसार यह कह सकता हूं कि दोहराते तो सब इस बात को हैं मगर पालन कितने करते हैं इसका अवलोकन भी अब किया जाना चाहिए।
क्योंकि जितना देखने में आ रहा है उसके अनुसार यह शब्द जहां तक सुनाई देता है पद का कार्यभार ग्रहण करने के अलावा या तो जिम्मेदार भूल जाते हैं अथवा उनका पालन करने की जरूरत नहीं समझते। जो भी हो वर्तमान समय में एक दो जगहों को छोड़कर सब जगह हर मामले में नजर ऐसा ही आ रहा है। इस बारे में मौके बे मौके सरकार के मुखिया भी दोहरा चुके हैं कि जिम्मेदार अफसर शासन की नीतियों का पालन कर पात्र व्यक्तियों को हर योजना का लाभ पहुंचाए। इसमें लापरवाही करने वाले बख्से नहीं जाएंगे। इन तीन शब्दों को लागू कराने हेतु जितना देखने को मिलता है जनता के टैक्सों के रूप में मिलने वाले राजस्व से चल रही व्यवस्थाओं से जुड़े लोग इनका पालन करने की बजाय सत्ता संभालने के कुछ दिनों बाद अपने नियम और कानून कहे और अनकहे रूप में बना लेते हैं और फिर कहीं डंडे का भय दिखाकर तो कहीं कार्रवाई से डराकर आम आदमी को उसे मानने के लिए मजबूर भ्ीा किया जाता है।
आखिर ऐसा क्यों।
मुझे लगता है कि हमारी सरकारें जनहित में और पात्र व्यक्तियों के लिए अनेकों नियम कानून और योजनाएं उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु बना रहीं है लेकिन शासन और प्रशासन में मौजूद एक बड़े प्रतिशत में शामिल अधिकारी और बाबू उन्हें सीधे सीधे लागू करने की बजाय घूमा फिराकर अपने हिसाब से जब तक उनका हित साधने की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक उसे लागू नहीं करते हैं।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सहित सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्रियों से आग्रह है कि वो शासन और प्रशासन में बैठे निरंकुश सोच रखने और अपनी मनमर्जी चलाने वाले अफसरों के साथ ही हर विभाग के अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा और अवलोकन तथा सही जानकारी प्राप्त करने हेतु जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ताओं का एक ऐसा तंत्र विकसित करे जो गांव में बैठे अधिकारी से लेकर शासन के अफसरों तक की कार्यप्रणाली की सूचना विस्तार के साथ सरकार के मुखिया तक पहुंचांए और इस तंत्र में सत्ता तथा विपक्ष के लोगों के साथ ही पत्रकार शिक्षक डाॅक्टर और समाजसेवी भी शामिल हों। क्योंकि अब समय आ गया है कि माननीय प्रधानमंत्री जी की घोषणा भ्रष्टाचार समाप्त कर विकास कार्याे में गुणवत्ता लाने के साथ ही हर पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए हिटलर शाही सोच रखने वाले अफसरों पर अंकुश की कार्यवाही करनी ही होगी।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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