जब बंदर ने मुझे मारे चाटे

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बंदरों का चर्चा किसी ना किसी रूप में सुनने को मिलता ही रहता है और यह आज की बात नही है पुराने जमाने में भी बंदरों का प्रभुत्व और आतंक कम नहीं था बुजूर्गो के मुंह से बादशाह अकबर के कार्यकाल की कहानी सुनने को मिलती है जिसमें बादशाह के सैनिक एक पुजारी को गिरफ्तार कर लेते है जिससे कोध्रित वानर सेना महल पर चढ़ाई कर देती है परिणाम स्वरूप बादशाह को पुजारी छोड़ना पड़ता है। ऐसे जंगल की एक कहानी में शेर का हराकर राजा बना बंदर पूरा जंगल का जंगल उजाड़ देता है तो आम जीवन में भी जबसे पैदा हुआ बंदरों की करामात और उत्पात किसी ना किसी रूप में देखने केा मिलता ही रहा है यह किस्सा मेरे साथ घटा 80 के दशक में जब मुफलिसी का जमाना था मजदूरी करके रोटी जुटानी पड़ती थी उस दौरान रात को कही भी पड़कर सड़क पर सो जाता था इस क्रम में एक दिन मेरठ के कैंट स्थित गंज बाजार में अम्बे के ढ़ाबे के चबुतरें पर पड़े तख्त पर जहां गुड़ बेचने से लेकर मजदूरी तक का काम करता था पड़ा सो रहा था अचाचक महसूस हुआ की की कोई सीने पर चढ़ा बैठा पिटाई कर रहा है हड़बढ़ाहट में आंख खुली तो देखा की एक बंदर महाशय सीने पर चढ़े बैठे है ओर तड़ातड़ चाटें मार रहे है उस परिस्थिति पिटने और चुप रहने के अलावा कुछ नही सुझा क्योकि किसी से सुना था की अगर शांत रहोगे तो बंदर भाग जाता है वो ही हुआ थोड़े से बाल नोचे, थोड़ा गुर्राया और पिटाई कर छटे हुए गुंडे की भांति थोड़ी देर में भाग गया।

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– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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