चर्चाओं मे ब्लड बैंक को लेकर डाॅक्टरों में टकराव, आला ग्रुप के कुछ सदस्य लगे है अवैध निर्माण करने और दबाव बनाने में

15
loading...

विषम परिस्थितियों में भले ही कोई चिकित्सकों की आलोचना करे या किसी मुद्दे अथवा बात को लेकर उनसे भीड़ जाये लेकिन सही तथ्य यह है की डाॅक्टर इंसान के लिए धरती पर भगवान के समान है क्योकि भलें ही कितनी ही परेशानी क्यों ना हो जिस प्रकार ईश्वर का आर्शीवाद मिलने से सबकुछ सही होता चला जाता है उसी प्रकार डाॅक्टर के द्वारा दी गयी एक गोली पूरी समस्या के समाधान की शुरूआत कर देती है।

शायद यही कारण है की वर्तमान में पिछले 9 माह से कोरोना का जो प्रभाव सुनायी दिया और 22 मार्च 2020 को इससे लोगो को सावधान करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आवाहन पर कश्मीर से कन्या कुमारी तक लगे जनता कफ्र्यू और बजी थाली और ताली के तुरंत बाद हुए लाॅकडाउन और अब अनलाॅक में भी पर्याप्त रूप में आमदनी ना होने के बावजूद आम नागरिक डाॅक्टर के यहां जाता है तथा मुंह मांगी फीस देकर व दवाई लेकर खुशी खुशी यह सोचकर चला आता है की अब वो ठीक हो जायेगा।

इसका फायदा उठाकर इस कठिन दौर में भी कुछ लालची डाॅक्टरों द्वारा अपनी फीस बढ़ा दी गयी। व्यवस्था ना होने के बावजूद भी हर व्यक्ति पेट काटकर जल्दी स्वस्थ्य होने के लिए उसे अदा कर रहा है।

ग्रामीण कहावत एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है को तो मै नही मानता इसीलिए यह कह सकता हुं की सारे डाॅक्टर तो एक से नही होते कई वाकई में आज भी अपने पेशे के प्रति पूरी तौर पर ईमानदार नजर आते है। लेकिन कुछ लालची और समय का लाभ उठाने की ताड़ में रहने वाले चिकित्सक मौके का फायदा और मजबूर व्यक्ति की कठिनाई का लाभ किसी भी परिस्थिति में उठाने में नही चूक रहे है।

खैर यह विषय तो बहुत बड़ा है इस पर कितनी ही बहस और चर्चा की जा सकती है। लेकिन फिलहाल हम अपने पाठकों का ध्यान ब्लड बैंक को लेकर डाॅक्टरों के बीच छिड़ी जंग और सोशल मीडिया पर वायरल एक मैसेज को लेकर जो इनका असली चेहरा सामने आया है उसकी ओर दिलाना चाहते है। आज एक समाचार पत्र में ब्लड बैंक में पद व पैसे के लिए टकराव खबर 5 काॅलम में छपीं जिससे पता चलता हैं।

इसे भी पढ़िए :  भारती सिंह ने मास्क के अंदर से बोलने का निकाला यूनिक तरीका, देखें... VIDEO

ब्लड बैंक को लेकर आईएमए पदाधिकारियों और डाॅक्टरों के बीच खींचतान शुरू हो गई। इससे जुड़ा एक मेसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह मेसेज आईएमए सचिव डाॅ. अनिल नौसरान का है इसमें उन्होंने ब्लड बैंक के पद अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आईएमए ब्लड बैंक 28 अक्तूबर 2018 में शुरू हुआ था। इसके संचालन के लिए गठित कमेटी का चेयरमैन डाॅ. जेवी चिकारा को बनाया गया था। अध्यक्ष डाॅ. मेधावी, सचिव डाॅ. सुशील गुप्ता और सह सचिव डाॅ. अनिल नौसरान नियुक्त हुए। डाॅ. अनिल ने आरोप लगाया कि ब्लड बैंक के संबंध में सभी लोग लखनऊ के एसबीटीसी कार्यालय में एक अधिकारी से मिले थे। मेरे सामने ही 25 हजार रुपये रिश्वत दी गई। इसका मैंने विरोध किया। उन्होंने ब्लड बैंक में सुपरवाइजर की नियुक्ति और बैंक से ब्लड के लेनदेन पर भी गंभीर आरोप लगाए। वहीं 12 मार्च को एग्जीक्यूटिव मीटिंग में एक सदस्य ने ब्लड बैंक के आॅडिट की बात कही तो डाॅ. चिकारा आग बबूला हो गए।

डाॅ. अनिल नौसरान ने आरोप लगाए कि मुझे आईएमए सदस्यों के सामने खलनायक की तरह प्रस्तुत किया जाता है। डेढ़ माह पहले डाॅ. सुशील गुप्ता ने ब्लड बैंक में ब्लड बैक की सप्लाई बंद कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि एग्जीक्यूटिव मीटिंग में आज तक यह घोषित

नहीं हुआ कि डाॅ. जेवी चिकारा ही ब्लड बैंक कमेटी के चेरयमैन हैं। उन्होंने कमेटी के अध्यक्ष से कहा कि मीटिंग के मिनट आईएमए के सदस्यों के सामने प्रस्तुत करें। यह भी बताएं कि ब्लड बैंक कमेटी के कौन कौन सदस्य हैं।

दो पदों को लेकर है विवाद: ब्लड बैंक के चेयरमैन डाॅ जेवी चिकारा और ब्लड बैंक आॅफिसर व आईएमए सचिव डाॅ. अनिल नौसरान के बीच विवाद है। चेयरमैन का कहना है कि डाॅ नौसरान एक पद पर रहें, दो पद पर नहीं रह सकते। इसलिए विवाद है। -डाॅ नवीन शर्मा, अध्यक्ष आईएमए

इसे भी पढ़िए :  साड़ी की दुकान पर भीड़ देख हैरान रह गए IPS ऑफिसर, बोले - इतनी भीड़ में कोरोना भी नहीं घुस सकता...

यह आईएमए के अधिकारियों का आपसी मामला है। यह मैसेज पर्सनल ग्रुप पर डाला था। ऐसा हुआ है, यह सच्चाई है। -डाॅ. अनिल नौसरान, सचिव, आईएमए

निराधार हैं मैसेज: डाॅ नौसरान की आईएमए ब्लड बैंक आॅफिसर वाली सैलरी रोक दी गई है। इसलिए इस तरह का निराधार मेसेज कर रहे हैं। जब वह सचिव बने थे, तब मैं दूसरे प्रत्याशी का समर्थन कर रहा था, तब से वह मुझसे खुन्नस रखते हैं। – डाॅ. जेवी चिकारा

यह है विवाद: ब्लड बैंक के चेयरमैन डाॅ जेवी चिकारा और ब्लड बैंक आॅफिसर व आईएमए सचिव डाॅ अनिल नौसरान के बीच विवाद है। चेयरमैन का कहना है कि डाॅ. नौसरान एक पद पर रहें, दो पद पर नहीं रह सकते। डाॅ. नौसरान की 60 हजार रुपये महीने की सैलरी डाॅ. चिकारा ने रोक दी है। इसलिए विवाद है। जब डाॅ. नौसरान सचिव बने थे, तब डाॅ चिकारा दूसरे प्रत्याशी का समर्थन कर रहे थे, तब से दोनों में खींचतान है।

दूसरी तरफ बीते दिनों सुशीला जसवंत राॅय की चेयरपर्सन सुशीला गुप्ता जी द्वारा हार्ट के प्रमुख चिकित्सक पर कई गंभीर आरोप लगाये गये थे तो शहरभर मे एक चर्चा यह भी है की कुछ सरकारी भूमि विभिन्न तरिकों से घेरकर शासन के निर्माण नीति के विपरित अवैध निर्माण कर लाखों रूपये माह की किराये की आमदनी बनाने के साथ साथ कुछ सरकारी अधिकारियों के बच्चों को मुफ्त देख उनका ईलाज करने की आड़ में आम आदमी पर अपने सबंधों की धमक दिखाकर उन्हे दबाने और अपना मनोरथ पूरा करने मे लगे आला गु्रप के कुछ सदस्यों ने अनकहे रूप में एक प्रकार से डर सा लोगो में बैठा रखा है यह बड़ी शान से कहते है की हमारा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता शासन के गलियों में बड़े बड़े पदों पर हमारे आंका मौजूद है अगर कोई कुछ बोलेगा तो उनसे कहकर या उनके नाम पर उसे सबक सिखाने में उन्हे देर नही लगेगी। इस आला गु्रप के कुछ सदस्य तो पूर्व में काफी विवादित रहने के साथ साथ काफी सुर्खियों में भी रह चुके है।

इसे भी पढ़िए :  आखिर क्यों महंगाई के लिए सरकार हो रही है बदनाम, किसान को उत्पादन का नही मिल रहा सही दाम, उपभोग्ता महंगा सामान खरीदने को मजबूर, ठेले और पटरी वाले कमा रहे है माल

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा बीते दिनों आईपीएस अधिकारियों को एक बैंच को संबोधित करते हुए कहा गया था की सिंघम बनने की कोशिश ना करे ओर चिपकुओं से बचकर रहे इसकों विस्तार से समझाते हुए इशारा किया गया था की ऐसे चिपकु कुछ सुविधाएं और गाड़ी अपने आप उपलब्ध करायेगे और अन्य तरिकों से फायदा पहुंचाने की कोशिश करेंगें। आला गु्रप के सदस्यों में ऐसे ही चिकित्सकों को शुमार बताया जाता है।

चिकित्सा कार्य करने से ज्यादा शहर के मुख्य मार्ग और मौहल्लो मे अवैध निर्माण करने और एक गरीब परिवार से जबरदस्ती जगह खाली कराकर कुछ दशक पूर्व अवैध रूप से बनायी गई इमारत में अपना नर्सिग होम चलाने वाले एक डाॅक्टर साहब तो जब मजे में होते है तो खुलकर कहते है की मेरे सबंध बहुत ऊपर तक है। जो भी बोलेगा या बात नही मानेगा उसे सबक सिखाया जा सकता है।

कुल मिलाकर अगर सर्वे कराया जाये तो कितने ही चिकित्सक ऐसे मिलेगे जो अपने प्रोफेशन की आड़ में उच्च पदों पर बैठे लोगो से सबंध बनाकर विभिन्न तरिकों से पैसा कमाने और लोगो को डराने में लगे हुए बताये जाते है।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

fifteen − nine =