फेसबुक: उठते सवाल, राजनीतिक बवाल और बार-बार माफी मांगने की आदत

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गलती करना इंसान का एक अवगुण है, कितनी ही सावधानी बरतें लेकिन कहीं ना कहीं कोई त्रुटि हो ही जाती है। लेकिन त्रुटि के बाद माफी मांगना, इंसानियत का श्रेष्ठ गुण है। “सॉरी”, ये एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल आप और हम न जाने कितनी ही बार करते हैं। लेकिन इसे बोलिए तभी जब सच में महसूस हो। एक बहुत ही मशहूर कहावत है कि अगर कोई काम एक या दो बार किया जाता है, तो उसे गलती कहा जाता है। लेकिन अगर वही बात बार-बार दोहराई जाती है तो इसे कौन सी संज्ञा दी जाए ये आप खुद ही तय कर सकते हैं लेकिन इसे गलती तो कतई नहीं कहा जा सकता है। चेहरे की किताब यानी फेसबुक जिसके जरिए हम दोस्तों से जुड़े रिश्तेदारों से जुड़े। एक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफार्म जहां आप पोस्ट या फोटोज डालकर ये बता सकते हैं कि क्या कर रहे हैं, क्या सोच रहे हैं। इसके सबसे ज्यादा यूजर भारत में हैं। फेसबुक के जरिए हमें दोस्तों का रिश्तेदारों का और खबरों का भी हाल पता चलता है। ये तो चेहरे की किताब की मोटा-माटी बात हो गई। लेकिन आज बात इससे आगे की करेंगे क्योंकि फेसबुक भी इन सबसे बहुत आगे निकल गया है।

”यह मेरी गलती थी और मैं क्षमा चाहता हूं। मैंने फेसबुक शुरू किया, मैं इसे चलाता हूं, और यहां जो कुछ भी होता है उसके लिए मैं ही जिम्मेदार हूं।” साल 2018 में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के सामने माफीनामे को तब प्रस्तुत किया था जब उन्हें यह बताने के लिए बुलाया गया था कि कैसे कैम्ब्रिज एनालिटिका जैसी एक तीसरी पार्टी ने अमेरिकियों के साइकोमेट्रिक विश्लेषण को अंजाम देने के लिए संभवतः 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान मतदाताओं को डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में प्रभावित करने के लिए फेसबुक के पांच करोड़ उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारियों का दुरुपयोग किया था। वर्तमान में भारत में फेसबुक को लेकर देश की दो सबसे बड़ी पार्टी आपस में भिड़ी है। ये लड़ाई फेसबुक पर नहीं फेसबुक को लेकर है और ये झगड़ा आपको लेकर है, आपके विचार को कैप्चर करने को लेकर है आपके दिमाग को बदलने को लेकर है।

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14 अगस्त 2020 को अमेरिका के अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल में एक लेख छपा। रिपोर्ट में फेसबुक की निष्‍पक्षता पर सवाल उठाए गए थे। WSJ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि फेसबुक ने बीजेपी नेताओं के ‘हेट स्‍पीच’ वाली पोस्‍ट्स के खिलाफ ऐक्‍शन लेने में ‘जान-बूझकर’ कोताही बरती। यह उस विस्‍तृत योजना का हिस्‍सा था जिसके तहत फेसबुक ने बीजेपी और कट्टरपंथी हिंदुओं को ‘फेवर’ किया। राहुल गांधी ने इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट में किया कि भाजपा और आरएसएस भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप को नियंत्रित करते हैं। वे इसके माध्यम से फर्जी खबरें और नफरत फैलाते हैं और इसका इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए करते हैं।

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