अमृता देवी विश्नोई के साथ खेजड़ी का वृक्ष बचाने के लिए समाज के 363 लोगों द्वारा दिया गया था बलिदान

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गुरू जम्भेश्वर जी के जन्मदिवस व 21 सितंबर को सरकार अवकाश घोषित करने के साथ ही शुरू करे पर्यावरण पुरस्कार
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और हरियाली को बढ़ावा देने तथा प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र और प्रदेशों की सरकारें भरपूर प्रयास कर रही हैं। तो इस विषय पर पूरे विश्व में भी काम हो रहा है। और हरसंभव प्रयास जागरूक नागरिक कर रहे हैं। वृक्षों की सुरक्षा और पर्यावरण का संतुलन बना रहे। पर्यावरण प्रेमियों ने 10 वृक्ष एक पुत्र का समान का नारा भी दिया तो पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा जैसे प्रमुख लोग इस काम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
लेकिन यह कितने सोच का विषय है कि सैंकड़ों साल पहले 1730 में राजस्थान के जोधपुर जिले के गांव खेजड़ में हरे पेड़ों को काटने से बचाने के लिए बिश्नोई समाज के प्रणेता गुरू जम्भेश्वर जी महाराज के किए गए आहवान पर बिश्नोई समाज के 363 महिला पुरूषों और बच्चों ने अमृता देवी विश्नोई के साथ खेजड़ी के वृक्षों से चिपककर उसे बचाने के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी थी। शायद उस समय गुरू जम्भेश्वर जी और बिश्नोई समाज के अतिरिक्त किसी ने वृक्ष और वन्य प्राणियों की सुरक्षा की इतने बड़े स्तर पर ना तो सोचा होगा और ना यह कल्पना की होगी कि एक समय के साथ गुरू जम्भेश्वर जी को आकर यह मुददा आम आदमी के लिए स्वच्छ वातावरण और शुद्ध हवा के हेतु जीवन का प्रमुख अंग बन जाएगा।
हर वर्ष 21 सितंबर को बिश्नोई समाज द्वारा इस दिन ज्यादातर जगहों पर हवन और यज्ञ आदि कर अपने घरों पर रोशनी की जाती है। बताते हैं कि राजस्थान, हरियाणा व बिश्नोई बाहुल्य इलाकों सहित सारे विश्व में इस घटना का बड़ा महत्व है। जिसे बनाए रखने के लिए बिश्नोई समाज अपने घरों पर रोशनी करता है और दीप जलाता है तथा गुरू महाराज के दिखाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेता है।
अखिल भारतीय बिश्नोई मिलन परिवार से जुड़े रवि कुमार बिश्नोई, नीरज बिश्नोई, अंकित बिश्नोई, दीपक बिश्नोई, सुनील कुमार बिश्नोई, दिनेश बिश्नोई, महेंद्र सिंह बिश्नोई, कबीर सिंह बिश्नोई तथा अविराज बिश्नोई, किरण बिश्नोई अराती बिश्नोई आदि ने समस्त नागरिकों से आग्रह किया है कि इस दिन की महत्ता को बनाए रखने हेतु वृक्षों की सुरक्षा के लिए गुरू जम्भेश्वर जी के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लें। और पर्यावरण की रक्षा के लिए हरसंभव कार्य करें।
जनपद मुरादाबाद की तहसील कांठ में आज भूड़ टीवा मंदिर पर विशाल यज्ञ के उपरांत थाना कांठ परिसर में वृक्षारोपण किए जाने की खबर है। यहां यह शुभ काम स्वामी मुक्तानंद जी की देखरेख और श्री ओम बिश्नोई के संचालन में युवा संत स्वामी प्रणवानंद, मोनू बिश्नोई, धर्मवीर सिंह, बलराज सिंह, प्रदीप कुमार, दीपक बिश्नोई, शुभम, राजकुमार, आदि का विशेष सहयोग से उक्त धार्मिक और ऐतिहासिक घटना से जुड़ा आयोजन किया गया।
मेरा मानना है कि सरकार हर वर्ष करोड़ों वृक्ष लगाती है। उनमें से कितने मौजूद रहते हैं कितने नहीं। इसका हिसाब पूर्ण रूप से रखने के साथ साथ हर वर्ष 21 सितंबर और भगवान कृष्ण व गुरू जम्भेश्वर जी के जन्मदिवस पर देशभर में वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए और इसके लिए निःशुल्क रूप से इच्छुक व्यक्तियों को पौधे उपलब्ध कराते हुए उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी जाए।
अखिल भारतीय बिश्नोई मिलन के राष्ट्रीय महामंत्री श्री अंकित बिश्नोई की यह मांग भी उचित हैं कि केंद्र व प्रदेश सरकार अपने अपने स्तर पर गुरू जम्भेश्वर जी के जन्मदिवस तथा 21 सितंबर को 363 शहीद हुए बिश्नोईयों की याद में पर्यावरण पुरस्कार की घोषणा करने के साथ साथ 21 सिंतबर को राष्ट्रीय स्तर पर अवकाश भी घोषित किया जाए। क्योंकि वृक्षों के संरक्षण के लिए शुरू अभियान का यह सबसे बड़ा दिन और प्रेरणास्त्रोत घटना कही जा सकती है।

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