अब तभी मिलेगा शेड का पैसा जब लाभार्थी गांव के गौ आश्रय स्थल की दो गायों को लेगा गोद 

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लखनऊ 31 अगस्त। मनरेगा के तहत पशुपालन के लिए शेड बनाने का पैसा सरकार दे रही है। ऐसे में धांधली भी शुरू हो गई है। लखनऊ मंडल के कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं कि शेड का पैसा तभी मिलेगा जब लाभार्थी गांव के गौ आश्रय स्थल की दो गायों को गोद लेगा। इसके बदले उसको तीन सौ रुपए प्रति गाय हर महीने अलग से मिलेगा। साथ ही गौ आश्रय स्थल में रह रहे गौ वंश के पालन पोषण में दिक्कत भी नहीं आएगी।

गांव से पलायन रोकने के लिए युवाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत उनको पशु शेड बनवा कर दिया जा रहा है। दो पशुओं के शेड के 75 हजार और चारे के लिए एक लाख 16 हजार रुपए मिल रहे हैं। कमिश्नर मुकेश मेश्राम ने बताया कि लखीमपुर समेत कुछ दूसरे जनपदों में पशु शेड बनवाने में धांधली के मामले सामने आए हैं। ऐसे में कुछ शर्तें भी इसमें जिला स्तर पर शामिल कर दी गई हैं।

गौ आश्रय स्थल की शिकायत के बाद मांगी रिपोर्ट
बीते कुछ दिनों से लखनऊ के दो से तीन गौ आश्रय स्थलों की शिकायत कमिश्नर तक पहुंची है। ऐसे में कमिश्नर ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों से एक हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा है। इसमें उनको लिख कर देना होगा कि किसी आश्रय स्थल पर भी मवेशियों में खुरपका या अन्य कोई बीमारी नहीं है। उनको समय से चारा मिल रहा है। कहीं पर भी कीचड़ या दलदल नहीं है। रिपोर्ट मिलने के बाद एक टीम उसका सत्यापन करेगी। यदि दवा गलत मिली तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हरे चारे के लिए तीन तरह की घास
कमिश्नर ने चारागाहों में नेपियर, जिजुवा और हीरामणि घास उगाने का निर्देश मंडल के सभी जिलों में दिया है। इससे गौ वंश के लिए चारे की कमी नहीं होगी। उदाहरण के लिए नेपियर घास एक बार कटाई के 40 दिन बाद दोबारा पशुओं को खिलाने लायक हो जाती है। इसी तरह हीरामणि और जिजुवा घास की भी अपनी विशेषता है।

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