भाईचारे और सदभाव के लिए है महत्वपूर्ण, मुस्लिम द्वारा शारदा पीठ में फूल चढ़ाना

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पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में एक खबर के अनुसार 1947 के बाद वहां स्थित शारदा पीठ में मुस्लिमों द्वारा फूल चढ़ाए गए हैं। खबर अगर सही है तो यह भाईचारा और सदभावना नागरिकों में मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम कहा जा सकता है। क्योंकि कश्मीर के इस क्षेत्र में यह मंदिर उन 18 मंदिरों में से एक माना जाता है कि जिनकी मान्यता हिंदू धर्म में हैं। खबर के अनुसार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित शारदा पीठ मंदिर में एक मुस्लिम व्यक्ति ने कश्मीरी प्रवासियों के एक संगठन की ओर से फूल चढ़ाए। ‘आॅल पार्टीज माइग्रैंट्स कोआॅर्डिनेशन कमेटी’ (एपीएमसीसी) नामक संगठन ने गत रविवार को यह जानकारी दी। शारदा पीठ नियंत्रण रेखा के पास नीलम नदी के किनारे शारदा गांव में स्थित मंदिर है जहां अब कोई आता-जाता नहीं है। शारदा मां का यह मंदिर कभी ज्ञान का बड़ा केंद्र होता था और इसे दक्षिण एशिया में सर्वाधिक श्रद्धा वाले 18 मंदिरों में से एक माना जाता है। एपीएमसीसी ने कहा कि संगठन के अध्यक्ष विनोद पंडित के प्रयासों के बाद 26 अगस्त को शारदा अष्टमी की पूर्व संध्या पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के स्थानीय निवासी रईस अहमद ने प्राचीन मंदिर में फूल चढ़ाए। संगठन के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि 1947 के बाद यह पहली बार है जब अत्यधिक मान्यता वाले इस मंदिर में फूल चढ़ाए गए हैं। एपीएमसीसी को घाटी में बंद पड़े विभिन्न मंदिरों को खुलवाने और गंगाबल तथा कौसर नाग की वार्षिक तीर्थयात्रा शुरू कराने का श्रेय जाता है। पाकिस्तान सरकार ने पिछले साल एक काॅरिडोर स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी जिससे भारत से हिन्दू तीर्थयात्री शारदा पीठ जा सकेंगे। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और लददाख और जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने के उपरांत यह खबर हिंदु मुस्लिमों में भाईचारा मजबूत करने में महत्वपूर्ण कही जा सकती है। केंद्र सरकार और प्रदेश के राज्यपाल को इस प्रकरण पर ध्यान देना चाहिए।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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