सोना खरीदने आये ग्राहकों के साथ ठगी करना अब जूलर्स को पड़ेगा भारी, लागू हुआ ये नियम

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नई दिल्ली 26 जुलाई। देश में नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 सोने के गहनों  पर भी लागू होगा. इस नए कानून के लागू हो जाने के बाद अब अगर जूलर्स ने आपके साथ धोखा किया तो सख्त कार्रवाई होगी. आपको अगर 22 कैरेट का सोना बताकर 18 कैरेट का सोना बेचा जाता है तो जूलर्स को जुर्माना और जेल भी हो सकता है. ग्राहकों के साथ हो रही ठगी को देखते हुए केंद्र सरकार ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ही नए कानून लेकर आई है. सोने के आभूषणों और कलाकृतियों के लिए हॉलमार्क की व्यवस्था भी अब देश में 15 जनवरी 2021 से लागू हो जाएगी. नया उपभोक्ता कानून लागू हो जाने के बाद अब हॉलमार्किंग के नियम का पालन करना और सख्त हो जाएगा.

बता दें कि बढ़ते कैरेट के साथ सोने के गहनों की गुणवत्ता और कीमत में अंतर आता है. यानी जितने अधिक कैरेट का सोना होगा उतना ही महंगा होगा. ग्राहक सोना खरीदते समय उसकी क्वालिटी पर जरूर ध्यान देते हैं. केंद्रीय उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों के मंत्री रामविलास पासवान के मुताबिक, ‘ग्राहक जब भी सोना खरीदने जाएं तो हॉलमार्क देखकर ही सोना खरीदें. हॉलमार्क एक तरह की सरकारी गारंटी है और इसे देश की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी (BIS) तय करती है. हॉलमार्क देखकर खरीदने का यह फायदा है कि अगर आप निकट भविष्य में जब भी इसे बेचने जाएंगे तो आपको कम दाम नहीं मिलेंगे, बल्कि आपको सोने का खरा दाम मिलेगा. केंद्र सरकार की तरफ से 15 जसकतनवरी 2020 को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है, लेकिन एक साल बाद यानी 15 जनवरी 2021 से सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी.’

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बता दें कि ज्वेलरी में हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता का प्रमाण है. हॉलमार्किंग से जूलरी में कितना सोना लगा है और दूसरे मेटल कितने हैं लगे हैं इसका पता चलता है. सोने की शुद्धता को प्रमाणित करने के लिए हॉलमार्क किया जाता है. प्रमाणित ज्वेलरी पर बीआईएस का चिन्ह होता है और यह प्रमाणित करता है कि ज्वेलरी भारतीय मानक ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड पर खतरा उतरता है. अगर सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्ध प्रमाणित है. असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है. उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है. उसी में ज्वेलरी निर्माण का साल और उत्पादक का भी लोगो होता है.

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अगर गोल्ड ज्वेलरी की शुद्धता को लेकर संदेह होता है तो किसी भी हॉलमार्किंग सेंटर जाकर इसकी जांच करवाई जा सकती है. देशभर में करीब 900 हॉलमार्किंग सेंटर हैं. इनकी लिस्ट आप bis.org.in पर देख सकते हैं. नए नि‍यमों के तहत अब सोने की ज्वेलरी की हॉलमार्किंग होना अनि‍वार्य होगा. इसके लि‍ए ज्‍वेलर्स को लाइसेंस लेना होगा. केंद्र सरकार 14 कैरट, 16 कैरट, 18 कैरट, 20 कैरट और 22 कैरेट की ज्वेलरी की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी है.

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