पीएम साहब आम आदमी टैक्स की मार और जुर्माने से मर ही जाएगा,लाॅकडाउन की अवधि की हर प्रकार की सरकारी वसूली हो माफ

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अनलाॅक-3 शुरू होने की हवा चल पड़ी है। लोगों ने सोचा था कि लाॅकडाउन समाप्त होगा तो हमारी सरकारें कोरोना महामारी से पीड़ित देशवासियों को विभिन्न प्रकार की घोषणाएं कर राहत देते हुए जीवन को इस मानसिक उत्पीड़न से मुक्ति दिलाने के लिए भी कुछ निर्णय लेंगी। मगर जब से अनलाॅक की कार्रवाई शुरू हुई है तब से विभिन्न सरकारी विभागों के निरंकुश अधिकारियों द्वारा अनेक नामों पर नियमों की आड़ में जो टैक्स और जुर्माने लगाने और वसूली करने का अभियान शुरू किया गया है वो लाॅकडाउन और कोरोना से भी ज्यादा मानसिक उत्पीड़न आम नागरिक के लिए बन रहा है। क्योंकि बीमा कंपनियों ने नागरिकों को धोखे में रखकर किश्तों में अनावश्यक ब्याज की वसूली जमकर की है तो बैंक भी विभिन्न प्रकार के टैक्सों के नाम पर वसूली करने में पीछे नहीं है। नगर निगम विकास प्राधिकरण आदि विभिन्न योजनाओं के नाम पर आम आदमी की जेब खाली करने का खाका खींच रहे हैं तो कुछ नगर निगमों ने अनेक प्रकार के कर लगाकर लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। अब सड़क परिवहन विभाग ने हेलमेट व सीट बेल्ट न लगाने पर जो जुर्माने की घोषणा की है। उसने तो यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि वाहन चलाए या नहीं। कई लोग तो मौखिक रूप से यह कहते भी सुने गए कि एक्सीडेंट से भले ही ना मरते मगर सरकार द्वारा दंड और जुर्माने की जो घोषणा की गई है उसने समय से पहले ही अधमरा कर दिया है। क्योंकि हेलमेट व सीट बेल्ट न लगाने पर 1000 रूपये जुर्माना, बिना वैद्य लाइसेंस वाहन चलाने पर पांच हजार और फायर ब्रिगेड व एंबुलंेस का रास्ता भले ही गलती से रोका गया हो 10000 का जुर्माना वसूले जाने की बात कही गई है ।और इन नियमों का पालन सख्ती से कराने की घोषणा की गई है। सवाल यह उठता है कि चुनावों के दौरान चाहे वह ग्राम प्रधान के हों या लोकसभा और विधानसभा के। प्रत्याशी उपभोक्ता को राहत पहुंचाने के लिए एडी से चोटी तक का जोर लगाने की बात करते हैं और जीतने के बाद किस प्रकार से आम आदमी की परेशानी और जमीनी ज्ञान ना रखने वाले कुछ नौकरशाहों को सुझावों को मानकर अपने मतदाताओं का उत्पीड़न होने में अनजाने में सहभागी बनते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण लाॅकडाउन के बाद विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा लगाए जा रहे टैक्स और वसूले जा रहे ब्याज आदि को देखकर और उनकी समीक्षा की जा सकती है। प्रधानमंत्री जी नागरिकों ने आपके नाम और विश्वास पर भाजपा को दूसरी बार भी वोट देकर केंद्र और विभिन्न प्रदेशों में पूर्ण बहुमत की सरकारें बनवाई। लेकिन अब जो परिस्थितियां बन रही है अगर आपने उनकी समीक्षा कर नागरिकों को राहत पहुंचाने के निर्देश और आदेश सहयोगियों को नहीं दिए तो आम आदमी इन जुर्मानों और टैक्सों की मार से शायद उभर नहीं पाएगा। आापसे अनुरोध है कि देशवासियों के हित में लाॅकडाउन के दौरान की बंदी के बाद जितने भी किसी भी प्रकार के जुर्माने टैक्स और अपराधों को छोड़कर नागरिकों पर मुकदमे दायर हुए हैं। उनसे अगर देश और मानवता का अहित ना होता हो तो उन सबको जनहित में माफ किया जाना चाहिए।

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रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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