शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन में कटौती क्यों

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आज से निजी स्कूलों के शिक्षक और कर्मी अपने अपने स्कूलों में शायद जाने शुरू हो जाएंगे। 22 मार्च से बंद हुए स्कूल अब जुलाई में खुले। इतने दिनों का वेतन संस्थान देंगे या नहीं देंगे तो कितनी देंगे यह अभी तय नहीं है। और वेैसे भी इस अवधि की तनख्वाह का मामला दोनों की आपसी सहमति से ही यह करना चाहिए मगर भविष्य में इन स्कूलों में शिक्षकों व काम करने वालों को 50 फीसदी कटौती कर वेतन दिए जाने की जो चर्चा अभिभावकों द्वारा बच्चों की फीस ना देने के नाम पर की जा रही है उसे ठीक नहीं कहा जा सकता। क्योंकि अनलाॅक 2 में अब भले ही कम संख्या रहे मगर अगर लाॅकडाउन नहीं होता है तो स्कूल खुलेंगे और जो इनकी कार्यप्रणाली नजर आ रही है और सुनाई देता है उससे लगता है काफी संख्या में अभिभावक बच्चों की फीस जमा करा चुके हैं और बाकी को स्कूल संचालक बच्चों का सिलेबस लेने के नाम पर अभिभावकों से फीस वसूलनें का अनकहा प्रयास कर रहे हैं। और अगर देखा जाए तो शिक्षा संस्थान ना खुलने के नाम पर भी कई के संचालक परिवहन प्रयोगशाला फर्नीचर आदि के नाम पर भी फीस ले रहे हैं जबकि जब स्कूल खुले ही नहीं तो इनका पैसा क्येां। मगर वो ही ग्रामीण कहावत स्कूल संचालक और अभिभावकों का रिश्ता नाड़े से नाड़ा घिसने के कहावत के समान है। कहीं मजबूरी तो बात दूसरी है वरना अब जैसी खबर है स्कूलों को फीस मिलने लगी है और अभिभावक अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हैं उसे ध्याान में रखते हुए कोई यह नहीं कह सकता कि मैं फीस देने की स्थिति में नहीं हूं। इसी का फायदा उठाते हुए उन्हें मैसेज भेजे जा रहे हैं कि आर्थिक रूप से सक्षम अभिभावक जमा कराएं फीस।

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-रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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