अनलाॅक-2 हुआ शुरू, आओ कोरोना का एकजुट होकर करें मुकाबला

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कहते हैं कि जब कोई समस्या या प्रकोप बार बार आपके सामने आता रहे तो चाहे उससे कितना ही नुकसान जानमाल या प्रतिष्ठा का हो, आम आदमी को होने वाला डर निकल जाता है। ऐसा ही कुछ आजकल अब कोरोना की महामारी को लेेकर सामने आ रहा है। क्योंकि अभी तक दुनिया में एक करोड़ से ज्यादा और अपने देश में 5 लाख 85 हजार के लगभग कोरोना संक्रमितों की संख्या हो जाने के बावजूद जो डर और इससे बचाव के लिए एहतियात बरतने की इच्छा थी वो अब संक्रमितों की संख्या कई गुना बढ़ जाने के बाद कम होती नजर आ रही है। 22 मार्च को जनता कफर्यू लागू हुआ तो लाॅकडाउन लगते ही हर व्यक्ति चैकस हो गया। और कोरोना से बचाव और प्रतिबंधों का पालन करने लगा।
आज से अनलाॅक-2 शुरू हो गया तो कई जगह कोरोना मामलों के लिए विस्तार की मांग घटने की सूचना है जो हम सब के लिए बड़ी राहत की बात कही जा सकती है क्योंकि जिस प्रकार से इसको लेकर देश में मौतों का आंकड़ा बढ़ा उससे यह लगता था कि आसानी से छूट मिलने वाली नहीं है। लेकिन वो ही मरता क्या न करता वाली कहावत को ही शायद ध्यान में रखते हुए अनलाॅक की प्रक्रिया शुरू की गई जिसमें पीड़ितों की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी के समाचार मिल रहे हैं। मगर क्योंकि हम भारतवासी आशावान प्रवृति के हैं और हर नुकसान में फायदे ढूंढने की कोशिश करते हैं। शायद यही सोच है कि अब हमें कोरोना का इतना डर नहीं लग रहा है जितना लगना चाहिए था।
मगर अब हर व्यक्ति को यह तय करना होगा कि कोरोना के विरूद्ध लड़ाई उसे खुद लड़नी है। सरकार और कोरोना योद्धाओं की भूमिका अब कम इस संदर्भ में हमारी अपनी भूमिका ज्यादा हो गई है। ऐसे में अगर हमें खुद और अपनों को सुरक्षित करते हुए कोरोना पीड़ितों की संख्या में कमी लानी है तो किसी के कहने से नहीं अपने परिवार ओैर समाज को संभाले रखने के साथ साथ सबकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति पहले जैसी अभी ना बन पाए लेकिन इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग हैंडवाॅश और मास्क लगाने की प्रक्रिया खुद ही तय करने के साथ ही जो मरीज सही होकर आए हैं उन्होंने क्या क्या एहतियात बरती। कौन सी दवा और खाना खाया इसकी जानकारी प्राप्त कर अपने को इतना मजबूत और तैयार करना होगा कि कोरोना का भय ही हमारे मन से निकल जाए और जैसे और बीमारियेां का सामना हम करते हैं इस चुनौती को भी हमें स्वीकार करना होगा। ओैर मैं समझता हूं कि जैसा कि खबरें पढ़ने और सुनने को मिलती है भारत में कोरोना की पहली वैक्सीन लगभग बन चुकी है और उसे एप्रुवल भी शायद मिल चुका है। बताते चलें कि भारत की कोविड-19 की पहली संभावित वैक्सीन कोवाक्सिन को दवा नियामक डीजीसीआई से पहले और दूसरे चरण के लिए मानव परीक्षण की अनुमति मिल गई है। इस वैक्सीन को भारत बायोटेक ने विकसित किया है। वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण इस साल जुलाई से शुरू करने की योजना है। इस वैक्सीन को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान  (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ वायरोलाॅजी (एनआईवी) के सहयोग से विकसित की गई है। वायरस के स्ट्रेन को पुणे स्थित एनआईवी में आईसोलेट किया गया था और भारत बायोटेक को भेजा गया था, जहां इस स्वदेशी वैक्सीन को विकसित किया गया। बता दें कि इस समय दुनियाभर में कोरोना वायरस की 100 से ज्यादा वैक्सीन पर काम चल रहा हैस लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में सफलता नहीं मिल पाई है। आज ही चीन में भी आज एक वैक्सीन को सैन्य इस्तेमाल की अनुमति दी गई। इस वैक्सीन को चीनी सेना की रिसर्च यूनिट और कैनसिनो बायोलाॅजिक्स ने विकसित किया है।यह वैक्सीन चीन की उन आठ संभावित वैक्सीन में शामिल हैं जिन्हें इंसानों पर ट्रायल की अनुमति मिली है। हालांकि, कैनसिनो ने कहा कि अभी यह वैक्सीन केवल सैन्य प्रयोग के लिए होगी क्योंकि लाॅजिस्टिक्स विभाग की अनुमति के बिना इसका बड़े स्तर पर प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसके अलावा भी कई प्रकार के काढ़े और आयुर्वेदिक व हौम्योपैथिक दवाईयां भी इसकी रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही बताई जाती है। आओ सब मिलकर किसी का इंतजार किए बिना खुद आगे बढ़कर इस काम में लगे कोरोना योद्धाओं और लोगों की मदद करने के साथ साथ बीमार से नहीं बीमारी से बनानी है दूरी स्लोगन को आत्मसात कर कोरोना के साथ रहने और इसे हराने का मजबूत संकल्प आज अनलाॅक-2 के शुरूआत में लें। क्योंकि हमें अब इससे डरने और किसी भी प्रकार का तनाव पालने की बजाय यह सोचते हुए कि जिसकी आ गई है उसे कोई रोक नहीं सकता आगे बढ़ें ओैर पूरी दुनिया को संक्रमितों की संख्या में कमी लाकर यह दिखा दें कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना ही नहीं हर प्रकार की कठिनाई से निपटने के लिए पूरी तौर पर सक्षम और तैयार है।

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-रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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