प्रवासियों का राशन लेने से कई राज्य सरकार कर रही हैं इनकार, क्यो ?

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दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चैधरी अनिल कुमार पूर्व विधायक जयकिशन द्वारा एक खबर के अनुसार प्रधानमंत्री के फ्री राशन दिए जाने की घोषणा को ढकोसला दिया जा रहा है। इनका कहना है कि मात्र फ्री राशन देने से लोगों की आवश्यकता पूरी नहीं होगी। लाॅकडाउन के चलते बेरोजगार और कंपनियों की हालत बुरी होती जा रही है। मजदूर भूख की कगार पर है। सारी जनकल्याण योजनाएं सिर्फ पेपर में ही रह जाती है। जमीनी स्तर पर मोदी जी सिर्फ एक जुमला पार्टी के नेता हैं जो रोज एक नया जुमला सुनाती है।
लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने का पूर्ण अधिकार है। इसलिए इन जनप्रतिनिधियों को बोलने से भी नहीं रोका जा सकता। मगर जहां तक मुझे लगता है कि कहीं कुछ कमीबेशी हो सकती है मगर यह कहना बिल्कुल सही नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी गरीब और जरूरतमंदों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान न देकर सिर्फ जुमलेबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस के दोनों नेता यह भी देखें कि आखिर कई राज्यों द्वारा प्रवासियों के लिए भेजा गया राशन लेने से कैसे इनकार किया जा रहा है। अगर वो नहीं ले रहे तो इसमें मोदी जी कहां से आ गए। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने भले ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) को पांच महीने और बढ़ा दिया है, लेकिन राज्यों का रुख बहुत सकारात्मक नहीं है। क्योंकि कई राज्य तो ऐसे भी हैं जिन्होंने प्रवासी मजदूरों को मुफ्त बांटने के लिए अनाज ही नहीं उठाया। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान बुधवार को योजना में कोताही बरतने वाले राज्यों पर जमकर बरसे। नाराजगी भरे अंदाज में पासवान ने कहा कि ऐसे राज्यों से गरीबों के लिए क्या उम्मीद की जा सकती है। पीएमजीकेएवाई के बढ़ाए जाने और उस पर उचित तरीके से अमल करने के लिए उन्होंने राज्यों से पूरे पांच महीने का अनाज उठाने का आग्रह किया है। पासवान वीडियो कांफ्रेंसिंग में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र ने बिना राशन कार्ड वाले प्रवासी मजदूरों के लिए 3,400 करोड़ का प्रविधान किया लेकिन इसका 60 फीसद ही खर्च हो पाया। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों ने तो गरीब प्रवासी मजदूरों को मुफ्त में पांच किलो प्रति माह अनाज देने के लिए खाद्य निगम के गोदामों से अनाज ही नहीं उठाया है। खाद्य मंत्री पासवान का कहना है कि मुफ्त में अनाज बांटने में ऐसे राज्यों को क्या दिक्कत हो रही है? इस मुश्किल वक्त में मजदूरों को अनाज की जरूरत है। राज्यों के खाद्य मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्रियों को पासवान ने पत्र लिखकर आगाह किया था, लेकिन कई राज्य ऐसे हैं, जहां मुफ्त अनाज नहीं बांटा जा रहा है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते मंगलवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नवंबर के अंत तक, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्ना योजना के विस्तार की घोषणा की थी। इसके तहत गरीबों और जरूरतमंदों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। यह योजना 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराएगी, जो अब जुलाई से नवंबर तक लागू होगी। सरकार इन पांच महीनों के दौरान प्रत्येक परिवार के सदस्य को 5 किलोग्राम गेहूं या 5 किलोग्राम चावल मुफ्त में देगी।इसके अलावा प्रत्येक परिवार को हर महीने एक किलो चना भी मुफ्त मिलेगा। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इस योजना के विस्तार के लिए 90,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च की आवश्यकता होगी।पीएम मोदी ने एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना पर संतोष व्यक्त हुए कहा था कि इसके लागू होने से प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्य में भी आसानी ने उनके हिस्से का अनाज मिलने लगेगा।
-रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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