वाराणसी में कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवा की बढ़ी मांग

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वाराणसी 28 जुलाई। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इन दिनों कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेद की मांग बढ़ी है. पूर्वांचल के एक मात्र राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय और चिकित्सालय में इन दिनों लोगों की लाइन लगी रहती है. यहां पर कोरोना का इलाज आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से किया जा रहा है. इसके अलावा लोग कोरोना से बचने और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए भी यहां से आयुर्वेदिक दवाइयां ले जा रहे हैं. जाहिर है पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के दौरान भी लोगों से आयुर्वेद को अपनाने की सलाह दी थी. इसलिए अब उनके संसदीय क्षेत्र में भी अपील का असर दिख रहा है.

बता दें, राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय में बनाए गए कोविड-19 एल-वन अस्पताल में कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है. यहां पर दवाखाने के बाहर भी मरीजों की लंबी लाइन देखी जा सकती है. कतार में खड़े मरीज उमेश सिंह बताते हैं कि वे लंबे समय से पेट दर्द की समस्या से जूझ रहें थे, लेकिन कोरोना काल में आयुर्वेद पर बढ़ते विश्वास को देखते हुए, मैंने अपना इलाज आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से शुरू किया. मैं अब काफी आराम महसूस कर रहा हूं. मुझे यह विश्वास हो गया है कि पूरी बीमारी भी जल्द ही ठीक हो जाएगी.

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बुजुर्ग मरीज सुनील सचदेवा बताते हैं कि वे डायबिटीज, बीपी और सीओपीडी के मरीज हैं. वे यहां पहली बार आयुर्वेद की दवा लेने आए हैं, क्योंकि हाल के दिनों में आयुर्वेद की तरफ लोगों का झुकाव बढ़ा है. आयुर्वेद के उपचार से उनके दोस्तों को भी काफी आराम मिला है, इसलिए वे भी आए हैं. उन्होंने बताया कि वे कोरोना से बचाव और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी आयुर्वेदिक दवाए ले रहें हैं, क्योंकि लोगों के पास कोई और विकल्प नहीं है.

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वहीं आयुर्वेदिक अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक और आयुर्वेद महाविद्यालय की प्रिंसिपल से लेकर दवाघर के फार्मासिस्ट तक बता रहें हैं कि कोरोना काल में लोगों का विश्वास आयुर्वेद पर काफी बढ़ा है. चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर नीलम गुप्ता बताती हैं कि उनके अस्पताल में 160 बेड का कोविड-19 एल-वन अस्पताल चल रहा है. एलवन अस्पताल में एसिम्टोमैटिक यानि बगैर लक्षण वाले कोरोना मरीज भर्ती होते हैं. जिनका आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के द्वारा इलाज किया जा रहा है. इलाज के दौरान मरीजों को संशमनी वटी, आयुष 64 टेबलेट, अगस्त्य हरीतकी, लवंगागि वटी और काढ़ा दिया जा रहा है. इसका रिस्पांस भी काफी अच्छा मिल रहा है.

उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में दवाओं का वितरण पहले से दोगुना बढ़ गया है. लोगों का विश्वास आयुर्वेद की तरफ बढ़ रहा है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की मांग में भी इजाफा हुआ है. क्योंकि कोरोना की अभी तक कोई दवा नहीं बनी है, ऐसे में हमारे लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है.
वहीं फार्मेसी के फार्मासिस्ट सत्यपाल पांडेय ने बताया कि उनके यहां पहले की तुलना में आयुर्वेदिक दवाइयों की खपत बढ़ गई है. लोग दूर-दराज से यहां दवाइयां लेने आ रहें हैं. पहले लोग आयुर्वेद को प्राथमिकता नहीं देते थें, लेकिन अब लोग धीरे-धीरे आयुर्वेद के महत्व को समझ रहें हैं. इसी वजह से आयुर्वेदिक दवाओं की खपत दोगुनी बढ़ गई है. और अब तो दवाइयां भी कम पड़ने लगी हैं.

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