कोरोना को मात देने में कारगर साबित हो रही है हाई फ्रिक्वेंसी ऑक्सीजन

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गोरखपुर 30 जुलाई। कोरोना वायरस का असर कम करने के लिए ऑक्सीजन बेहद असरकारक दवा बन गई है। दरअसल कोरोना संक्रमित के खून में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से घट जाती है। संक्रमित अचेत हो जाते हैं और कई बार उनकी मौत भी हो जाती है। ऐसे में संक्रमितों को हाई फ्रिक्वेंसी ऑक्सीजन (एचएफओ) मशीन राहत दे रही है। एचएफओ मरीज को हर मिनट 60 लीटर शुद्ध ऑक्सीजन मुहैया करा रही है। इस गति से वेंटिलेटर ऑक्सीजन मुहैया कराते हैं। डॉक्टरों ने इसे मिनी वेंटिलेटर का दर्जा दिया है। बीआरडी मेडिकल कालेज में चार एचएफओ लगे हैं। बीआरडी के टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ.अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना का संक्रमण फेफड़ों पर तेजी से असर करता है। फेफड़े की आंतिरिक परत पर सूजन हो जाती है। इससे धमनियां पूरी तरह काम नहीं करती।

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इससे खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसे हम एसपीओ-टू के जरिये मापते हैं। यह 96 फीसदी से कम होने पर मरीज धीरे-धीरे खतरे की जद में जाने लगता है। 90 फीसदी से कम होने पर सांस लेने में तकलीफ शुरू हो जाती है। कमजोरी महसूस होती है। 80 होने पर उसके सोचने समझने की क्षमता खत्म हो जाती है। वह अचेत होने लगता है। कोमा में जा सकता है। उसकी मौत हो सकती है। बीआरडी के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि आमतौर पर सामान्य व्यक्ति सात लीटर ऑक्सीजन हर मिनट लेता है। जब वह संक्रमित होता है तो फेफड़े पूरी तरह काम नहीं करते। ऐसे में एचएफओ संजीवनी बनती है। वह ह्यूमेडिफायर के जरिये 60 लीटर प्रति मिनट की स्पीड से शुद्ध ऑक्सीजन फेफड़ों को मुहैया कराती है। ऐसे में फेफड़ों को ऑक्सीजन शुद्ध करने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती। ऑक्सीजन तेजी से खून में मिल जाता है।

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डॉ. राजकिशोर ने बताया कि एचएफओ देश में चुनिंदा संस्थानों के पास ही उपलब्ध है। बीआरडी के पास चार एचएफओ है। इसे कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने मंगवाया है। अब 15 और एचएफओ की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि इसमें नेजल पाइप के जरिए ऑक्सीजन दिया जाता है। ह्यूमेडिफायर के कारण ऑक्सीजन में नमी रहती है। इससे मरीज की नाक की धमनियां नहीं फटती।

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