मुख्यमंत्री/मंडलायुक्त दें ध्यान! बिना अनुमति कैसे चल रहा था कारखाना

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आठ लोगों की मौत का कारण बनी पटाखा और मोमबत्ती फैक्ट्री के संचालक के साथ ही, संबंधित सरकारी विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी हो सख्त कार्रवाई
गाजियाबाद के मोदीनगर के बखरवा गांव में नितिन चैधरी की मोमबत्ती बनाने की फैक्ट्री में बन रहे पटाखों में हुए विस्फोट ने आठ लोगों की जान ले ली। बीती पांच जुलाई को हुई इस घटना के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी स्वयं इसका संज्ञान लिया तो गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने कहा कि आरोपी नितिन चैधरी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या तथा विस्फोटक अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इन पर रासुका लगाने की तैयारी भी चल रही बताई जाती है। फैक्ट्री संचालक के खिलाफ मारी गई किशोरी के पिता की ओर से मिली शिकायत पर केस दर्ज कराया गया है तथा इसे चलाने की अनुमति भी शायद नहीं ली गई थी।
गाजियाबाद देश की राजधानी दिल्ली के निकट एनसीआर क्षेत्र में होने के चलते अत्यंत महत्वपूर्ण है। और मोदीनगर क्योंकि औद्योगिक नगरी तथा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ऐतिहासिक नगर है। एक जमाने में देश के प्रमुख रईशों तथा बड़े उद्योगपतियों में शामिल गूजरमल मोदी का औद्योगिक साम्राज्य यहीं से शुरू हुआ था और मोदी परिवार के चलते देश में इस शहर की अपनी एक अलग पहचान भी है। उसके बावजूद यहां मोमबत्ती बनाने की आड़ में अवैध पटाखा फैक्ट्री चल रही थी। फायर बिग्रेड, नगर पालिका, श्रम प्रदूषण और अन्य संबंधित विभाग के अधिकारी क्या कर रहे थे और आखिर उन्हें समय रहते इसके बारे में पता क्यों नहीं चला और उन्होंने कार्रवाई क्येां नहीं की। मैं फैक्ट्री मालिक नितिन चैधरी को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की राय देते हुए प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी व मेरठ मंडलायुक्त जी से आग्रह करता हूं कि इस हादसे में मारे गए आठ लोगों की मौत के लिए किसी न किसी रूप में संबंधित विभागों के अफसर भी जिम्मेदार रहे हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए उद्योग विभाग फायर बिग्रेड, श्रम विभाग, प्रदूषण विभाग नगर पालिका आदि के दोषी अफसरों को भी इन मौतों के लिए जिम्मेदार मानते हुए जांच कराकर जो लोग सीधे जुड़े हो उनके विरूद्ध कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि बिना इनकी जानकारी के अवैध फैक्ट्री चल नहीं सकती और चल रही थी तो यह इनका नकारापन था जिसके लिए इन्हें भी दोषी मानते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि अगर इतिहास उठाया जाए तो प्रदेश और देश में कितनी ही ऐसी घटनाएं होती हैं जिनमें गरीब और मध्यम दर्जे के व्यक्तियों को अपनी जान गंवानी पड़ी और इनका संचालन अवैध रूप से सामने आया। मगर क्योंकि ज्यादातर मामलों में या तो मुकदमे लंबे चलने अथवा समय से कोई कार्रवाई ना होने के कारण अवैध फैक्टी अथवा काम्पलैक्स अथवा निर्माणों की बाढ़ सी प्रदेश में आ गई बताई जाती है जिसे शासन तथा जनहित में रोका जाना वक्त की सबसे बड़ी मांग है।

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