कोविड-19 के दौर में यहां महंगी हुई गाड़ियों की सर्विसिंग, अब इन फ्री सर्विस के भी देने होंगे चार्ज

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लखनऊ 25 जून। कोरोना काल में पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी के साथ साथ मध्यमवर्ग पर एक और बोझ बढ़ा दिया गया है. दावा किया जा रहा है कि यह बोझ उनकी गाड़ी की सर्विसिंग करने वाले सर्विस सेंटरों ने बढ़ाई है. बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोरोना वायरस के संक्रमण कोविड-19 के दौर में गाड़ी की सर्विसिंग पर दो अलग अलग तरीके के चार्ज सर्विस सेंटर वसूलने लगे हैं. कुल मिलाकर 400 से ₹500 का अतिरिक्त बोझ गाड़ी की सर्विसिंग पर पहले के मुकाबले अब आ गया है.

लखनऊ में 1 जून से गाड़ियों की सर्विसिंग के लिए सर्विस सेंटर खोल दिए गए. शर्त यह रही कि 33 फ़ीसदी कर्मचारियों के सहारे सर्विस सेंटर चलाए जाएंगे, जहां कोरोना महामारी से संबंधित प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखना होगा. सर्विस सेंटर तो खुल गए और गाड़ियों की सर्विसिंग भी शुरू हो गई, लेकिन पहले के मुकाबले अब इसे महंगा कर दिया गया है. दो अलग अलग तरीके के चार्ज सर्विस सेंटरों में लगाएं हैं.

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लखनऊ के कई सर्विसिंग सेंटर्स में फ्री ऑफ कॉस्ट रहने वाला पिक एंड ड्रॉप का चार्ज अब अलग से गाड़ी मालिकों से वसूलना शुरू कर दिया गया है. पहले गाड़ी की सर्विसिंग कराने के लिए यदि आप सर्विस सेंटर गाड़ी लेकर खुद नहीं जाना चाहते तो सर्विस सेंटर अपने कर्मचारी भेजकर आपके घर से गाड़ी मंगा लेते थे और सर्विसिंग के बाद उसे पहुंचा देते थे. यह सुविधा पूरी तरह फ्री ऑफ कॉस्ट थी, लेकिन करोना काल में पिक एंड ड्रॉप का चार्ज अलग से लगा दिया गया है. इसके लिए प्रति गाड़ी ढाई सौ रुपए पिक एंड ड्रॉप चार्ज सर्विस सेंटर वसूल रहे हैं.

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यह दूसरा खर्चा है जो मध्यमवर्ग पर सर्विस सेंटरों ने डाल दिया है. कोरोना काल में गाड़ी से किसी तरीके का संक्रमण इंसानों में न फैल सके इसके लिए सर्विस सेंटर पर पहुंचने के साथ ही गाड़ी को डिसइनफेक्ट किया जा रहा है. इसका चार्ज भी गाड़ी मालिक से सर्विस सेंटर वसूल रहे हैं. इसका दर 175 से 200 रुपये तक तय है. यानी छोटी गाड़ी हो तो 175 रुपये और बड़ी गाड़ी हो तो 200 रुपये.

गोमती नगर विस्तार में रहने वाले आशीष कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें यह खर्चा ज्यादा समझ नहीं आ रहा. यदि गाड़ी सर्विस के लिए पिक एंड ड्राप कराई जाती है तो सर्विस सेंटर का कर्मचारी जब घर से गाड़ी सर्विस सेंटर ले जाता है तो क्या गाड़ी के साथ उस व्यक्ति के भी कपड़े वगैरह बदले जाते हैं. क्योंकि गाड़ी के डिसइंफेक्शन के नाम पर चार्ज तो वसूला जा रहा है, लेकिन जो व्यक्ति गाड़ी घर से सर्विस सेंटर ले जा रहा है उसके बचाव के क्या उपाय किए गए हैं. गाड़ी की सर्विसिंग केटीएल सर्विस फैज़ाबाद रोड में कराई थी. इस तरह इन दोनों खर्चों को जोड़ दिया जाए तो एक गाड़ी की सर्विसिंग पर 450 रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है. कोरोना से पहले इन दोनों खर्चों से लोगों को राहत थी.

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