जनहित में है मुख्यमंत्री का पौधारोपण अभियान लेकिन पूर्व में लगे पेड़ कहां गए यह भी देखा जाना चाहिए

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पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी पर्यावरण संतुलन बनाने के लिए एक जुलाई से उत्तर प्रदेश में 25 करोड़ पौधे एक ही दिन में रोंपने का लक्ष्य रखा गया बताया जाता है। सरकार का यह निर्णय अगर ध्यान से सोचे तो हर तरह से जनहित का है ओैर इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए। लेकिन सवाल यह उठता है कि लगभग हर वर्ष ही भारी तादात में पेड़ लगााए जाते हैं और इनमें से कुछ यह निःशुल्क दिए जाते हैं। उसके बावजूद इनका रोपण कितना होता है और पूर्व वर्षों में लगे पौधों की क्या स्थिति है यह शायद किसी को पता नहीं होता। माननीय मुख्यमंत्री जी आपकी योजना तो जनहित की है लेकिन इन पेड पौधों का फायदा आम आदमी को मिले और इनकी हरियाली से पूरा प्रदेश लहलहाए। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जिस प्रकार इस वर्ष वन विभाग किसानों को 10 करोड़ पौधे मुफ्त उपलब्ध करा रहा है उसी प्रकार पूर्व में निशुल्क रूप से बांटे गए पौधों और लगाए गए पेड़ों का क्या हुआ इसकी जानकारी भी की जाए क्योंकि जितना नजर आता है उसके हिसाब से अगर पूरी संख्या में पिछले दस वर्षों में पेड़ लगे होते तो जानकारों के अनुसार प्रदेश का चप्पा चप्पा हरियाली से युक्त होता। जो नजर नहीं आता है। बताते चलें कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से जंगलात का क्षेत्र बढ़ाने के लिए वन विभाग किसानों को दोहरा फायदा देगा। प्रदेश में किसानों को 10 करोड़ पौधे मुफ्त उपलब्ध करवाए जाएंगे। राज्य के वन विभाग ने इसके लिए कृषि वानिकी प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। वन विभाग की इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हरियाली बढ़ाकर पर्यावरण संरक्षण करने के साथ-साथ पेड़ों की लकड़ी से किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक तीर से दो निशाने लगाने की योजना है, ताकि किसानों का खेतों में लगाए पौधों से कमाई की वजह से पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रोत्साहन बढ़े। कृषि वानिकी में किसानों को पापुलर, शीशम, बबूल, शहतूत, बर्म डेक सहित अन्य पौधे दिए जाएंगे। किसान अपने स्तर पर भी पौधे तैयार कर कृषि वानिकी के तहत लगाकर अनुदान प्राप्त कर सकते हैं।

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