निजी अस्पतालों और घरों में कोरोना पाॅजिटीव मरीजों के इलाज की मिले अनुमति

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कोरोना माहमारी को लगभग पांच माह धीरे धीरे पैर फैलाए हो गए हैं। लगभग ढाई माह लाॅकडाउन को भी हो चुका है लेकिन इससे संक्रमितों की संख्या रूकने में कोई बहुत बड़ी उपलब्धि मिलती कहीं से नजर नहीं आ रही है। सरकारें इससे बचाव और रोकथाम हेतु भरपूर प्रयास कर रही है जिसके तहत अस्पतालों में बेड बढ़ाने के साथ साथ इलाज के और भी उपाय किए जा रहे हैं। लेकिन सबकुछ होने के बावजूद प्रायोजित व्यवस्था हो तो और है वरना कहीं से ऐसी कोई खबर सुनने को नहीं मिलती कि कोरोना पाॅजिटीव या क्वारंटाइन होने वाले नागरिक इलाज और अन्य व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
शायद देश में पहली बार मेरे द्वारा कोरोना पाॅजिटीव से संबंध क्वारंटाइन होने वाले लोगों को होम क्वारंटाइन कराने की आवाज उठाते हुए सरकार से मांग की गई थी कि ऐसी व्यवस्था की जाए। देर सबेर सबके सुझाव और प्रयासों से स्वास्थ्य विभाग ने इस बात को माना और अब होम क्वारंटाइन ज्यादातर लोग हो रहे हैं। परिणामस्वरूप इसको लेकर जो व्यवस्थाएं की जाती थी उनसे संबंधित विभागों को कम या ज्यादा राहत मिली है। और जो पैसा इस पर खर्च हो रहा था उसकी बचत भी शुरू हुई और होम क्वारंटाइन होने वाले लोग भी संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
मेरा मानना है कि कोरोना पाॅजिटीव लोगों के इलाज की अनुमति भी निजी अस्पतालों और अगर संभव हो सके तो कुछ ऐसे स्थान तय किए जाएं जो खुले हों और वहां साफ सफाई का माहौल स्थापति हो। वहां कोरोना पाॅजिटीव का इलाज हो सके। क्योंकि जितने भी मरीज ठीक होकर आ रहे हैं उनसे जो पता चलता है उसके अनुसार हर मामले में सरकारी मेडिकल काॅलेजों में एक सी व्यवस्था अपनाई जा रही है। फिर भी ठीक होने वालों की संख्या आशा के अनुकूल है। लेकिन अगर यही इलाज निजी अस्पतालों में या खुले स्थानों पर अथवा घर में रहकर कराने की हो तो ठीक होने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है। और सरकारी अस्तपालों में इलाज के दौरान जो आए दिन हंगामे हो रहे हैं उनसे भी सबको छुटकारा मिल सकता है। मेरा तो मानना है कि अगर संभव हो सके तो कोरोना पाॅजिटीव के ईलाज जिनके यहां स्थान हों उन्हें घरों पर ही रहकर करने की अनुमति दी जाए तो ज्यादा अच्छा है।
देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली सरकार ने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं संबंधी ढांचे में वृद्धि करने और अस्पतालों की समग्र तैयारियों को और सुदृढ़ करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी गई बताई जाती है। पैनल स्थापित करने का आदेश जारी किया गया और जिस दिन दिल्ली में कोरोना वायरस के सर्वाधिक 1,298 नए मामले सामने आए। वहीं दिल्ली सरकार ने बिना कोरोना लक्षण वाले यात्रियों के लिए क्वारंटीन अवधि बुधवार को 14 दिन से घटाकर सात दिन कर दी। यह बदलाव दिल्ली आने वाले यात्रियों के लिए किया गया है। सरकार ने इस संबंध में सभी जिलाधीशों को भी निर्देश जारी कर दिया है।
दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि एयरपोर्ट, रेलवे और परिवहन विभाग यात्रियों का विवरण रोजाना राजस्व विभाग के प्रधान सचिव तथा दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथोरिटी के चेयरमैन को देंगे।  इस आदेश में कहा गया है कि बिना लक्षण वाले यात्रियों को दिल्ली आने पर 14 दिन के बजाय सात दिन के लिए होम क्वारंटीन में रहना होगा। आदेश के अनुसार, समिति के सदस्यों में आईपी विश्वविद्यालय के कुलपति डा महेश वर्मा, जीटीबी अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डा सुनील कुमार, दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डा अरुण गुप्ता, दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ आर के गुप्ता और मैक्स अस्पताल के समूह चिकित्सा निदेशक डा संदीप बुद्धिराजा शामिल हैं। आदेश में कहा गया कि समिति कोविड-19 से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में सुधार और अस्पतालों की समग्र तैयारी को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार का मार्गदर्शन करेगी। महामारी को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए समिति उन क्षेत्रों में भी सरकार का मार्गदर्शन करेगी जिसमें इसके लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है। आदेश में कहा गया है कि पैनल को छह जून तक अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में कोविड-19 के 1,298 नए मामले सामने आए, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 22,000 को पार कर गई, जबकि संक्रमण के कारण अब तक 556 लोगों की मौत हो गई।
इस संदर्भ में मेरा मानना है कि जिस प्रकाार पीपीई किट पहनकर डाॅक्टर व अन्य कर्मचारी देखभाल करते हैं उसी प्रकार अगर घर में इलाज की अनुमति दी जाए और परिवार का एक सदस्य सहमति के आधार पर सभी एहतियात बरतते हुए मरीज का ईलाज करने की विधि अपनाते हुए इसके लिये तैयार हो तो मुझे लगता है कि स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने वालों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी और वर्तमान में जितने दिन ठीक होने में लगते हैं उनमें कमी आ सकती है। विज्ञान और जागरूकता से सब संभव है। इस बिंदु को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय और चिकित्सकों को एक संयुक्त कमेटी बनाकर घरों पर कोरोना पाजिटीव का इलाज करने के संदर्भ में गहन विचार कर माहौल विकसित करना चाहिए। यह सरकार और नागरिक दोनों के हित में होगा क्योंकि सरकार का खर्चा बचेगा और जो आलोचना होती है उससे छुटकारा मिलेगा और परिवार के लोग सावधानीपूर्वक अपने परिवार के सदस्य की देखभाल अच्छी प्रकार कर सकते हैं और खान पान का उचित ध्यान उनके द्वारा रखा जा सकता है।
क्योंकि अगर ध्यान से देखें तो अब कितने ही मरीज में कोरोना पाॅजिटीव होने के लक्षण नजर नही आते हैं लेकिन वह होते हैं और कई डाॅक्टरों का मानना है कि बहुत से लोगों को पता भी नहीं चलता वो उचित खान पान और एहतियात के उपाय अपनाकर कोरोना के बाद अपने आप ही ठीक भी हो जाते हैं।

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