पुरुषों में कोरोना से लड़ने वाले एंटीबॉडी ज्यादा

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लंदन। सार्स-कोव-2 वायरस के खात्मे में कारगर एंटीबॉडी पुरुषों के शरीर में ज्यादा बनते हैं। ऐसे में वे कोरोना से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए बेहतर प्लाज्मा डोनर साबित हो सकते हैं। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के हालिया शोध में यह बात सामने आई है। एनएचएस विशेषज्ञ कोविड-19 को मात देने वाले पुरुषों से रक्तदान के लिए बढ़-चढ़कर आगे आने की अपील कररहे हैं। उन्होंने 43 फीसदी परुष और 29 प्रतिशत महिला मरीजों के खून में कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोक्षक क्षमता विकसित करने वाले एंटीबॉडी की मौजूदगी दर्ज की है। दरअसल, एनएचएस कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी’ का असर जांचने की कोशिशों में जुटा है। एनएचएस में एसोसिएट प्रोफेसर डेविड रॉबर्ट्स कहते हैं, चूंकि कोरोना पुरुषों के लिए ज्यादा घातक मिला है, इसलिए उनके शरीर में ज्यादा मात्रा में एंटीबॉडी बनना स्वाभाविक है।

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