आओ विश्व पर्यावरण दिवस पर शपथ ले

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लगभग 5 माह से पूरे विश्व में नागरिकों के लिये कष्ट का कारण बने कोरोना और लगभग देश में ढाई माह से लागू लाॅकडाउन के दौरान भले ही कितनी ही कठिनाई और समस्याऐं नागरिकों के समक्ष आ रही हो लेकिन इसका एक फायदा भी पूरे विश्व को हुआ है। क्योंकि अंधा धूंध सड़कों पर दौड़ते वाहन का पहिया रूकने से इनसे निकलने वाले जहरिला प्रदूषण से युक्त धूआ कम हुआ है। तो पेड़ पौधों पर हरियाली बढ़ी है। चिड़ियों की चहचहाट और विभिन्न जानवरों की चहलगर्मीयों में बढ़ोत्तरी हुई है और सबसे बड़ी बात यह वो है कि सांस के साथ फेफड़ो तक पहुंचने वाली जो हवा पहले कभी कभी अत्यंत विशैली हो जाती थी वो अब शुद्ध मिल रही है। हर प्रकार के प्रदूषण कम होने का एक प्रमाण यह भी है कि वायु मंडल में व्याप्त प्रदूषण की चादर समाप्त होने से दूर तक हमारे देश में मौजूद सुरमई पहाड़ और उनके मनमोहक नजारे भी देखने को मिलने लगे है।

कोरोना आज नहीं तो कल अपने आप ही या इसकी दवाई बन जाने से कम हो जाएगा तब गतिविधियां और आवागमन बढ़ेगा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन किसी भी प्रकार का प्रदूषण न बढ़ पाए इस बात के लिए देश के हरित विकास प्राधिकरण एनजीटी और नागरिको को खुद भी करने होंगे प्रयास।

साथियों पांच जून का दिन अगर देखे तो इस बार बहुत ही पवित्र तथा आम आदमी के हित और उसके स्वास्थ हेतु महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।जिसके तहत भारी तादात में विभिन्न सगठनांे के साथ ही वन विभाग द्वारा पर्यावरण सन्तुलन बनाये रखने के लिए वृक्षारोपण किया जाता है। जो जीवन के लिए अत्यत उपयोगी है। क्योकि इससे शुद्ध और ताजी हवा और आक्सीजन प्राप्त होती है तो मौसम का सन्तुलन भी बना रहता है।

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जनता और उससे सम्बन्ध संगठन जो वृक्ष लगाते है वो तो अच्छा ही है। उनकी तो प्रशंसा की जानी चाहिए क्योकि संस्थाओं सें जुड़े लोग यह सबकुछ अपने पास से करते है। इसीलि, इनकी देखभाल भी हो जाती है।

मगर सवाल यह उठाता है। की वन विभाग द्वारा हर बार पूरे प्रदेश के कब देहात कस्बों व महानगरों में करोड़ो पौधे वृक्षारोपण अभियान के दौरान लगाये जाने के दावे किये जाते है।और इस बार भी शायद ऐसा ही ही होगा मगर सवाल यह उठाता है कि जब से यह अभियान चला तब की तो छोड़ दे अगर पिछले एक दर्शक को ध्यान में रख सोचे तो जितने पौधे सरकारी स्तर पर लगाये गये उसके बाद तो पूरे प्रदेश में एक इंच जगह भी वृक्षो से खाली नही होनी चाहिए थी मगर आश्चर्य तो इस बात का है कि जनता के खून पसीने की कमाई से जो टैक्स प्राप्त होता है उससे लाखो करोड़ो वृक्ष पौधे हर साल लगाये जा रहे है। और फिर भी सूरसा मुंह की भाति पेड़ लगाने की अवश्यकता बढ़ती ही जा रही है। आखिर वन विभाग द्वारा लगाये जाने वाले पौधे जाते कहा है।और अगर लगाये जातें हैं तो अब वो किस स्थिति में हैं पिछले 10 वर्षों में कितनें पेड़ लगाये गये और कहंा कहां लगाये गये और वो किस स्थिति में है और अगर अपनी जगह पर मौजूद नही है तो इसके पीछे कारण क्या है और उनके लिए दोषी कौन है तथा जो पैसा इस पर खर्च हुआ उसका उपयोग सही हुआ या नहीं यह बात अब तय होनी चाहिए और अगर कही किसी का दोष इस पूरे प्रकरण में है तो उसके विरूद्ध कार्यवाही करने के साथ ही वृक्षारोपण के नाम पर जो पैसो की बरबादी हुई उसकी वसूली वन विभाग के इस अभियान से सम्बन्धित अधिकारियो से हर हाल में होनी चाहिए।

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खैर यह तो रही नौकरशाहों से संबंध बात लेकिन अब समय आ गया है और हमें कोरोना और लाॅकडाउन ने भी काफी कुछ सिखाया है इसलिये सिर्फ अफसरों के आसरे न रहकर हमें खुद भी अब कुछ ऐसे उपाय तलाशने होंगे और काम करने की योजना बनानी होगी जिससे जो प्रदूषण की समाप्ति हुई है वो दूवारा न पनप पाए।

वैसे तो प्रदूषण पैदा होने के कई कारण हो सकते है लेकिन मुख्य कारण जो समझ में आता है वो है हरियाली की कमी शहरों में पेड़ पौधों का अभाव और हमारी तथा सफाई के लिये जिम्मेदार सरकारी विभाग की लापरवाही से व्याप्त नालों और सड़कों के किनारे पड़ी गंदगी इसकी मुख्य वजह नजर आती है। आज 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर आओ शपथ ले कि बिना मतलब पेड़ कटने नहीं देंगे और अगर कोई काटता है तो उससे एक की जगह शुद्ध हवा देने वाले 10 पेड़ों का पौधा रोपण करायेंगे तथा दिखावे और सुविधाओं एवं ऐसपरस्ती के साधन जुटाने के लिये पेड़ पौधो का कटान नहीं होने देंगे। और प्रयास करेंगे कि जिम्मेदार नौकरशाहों के माध्यम से पहाड़ो कटान जमीन और जल का दोहन नहीं होने देंगे। तथा बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए बहुमंजिली इमारतों के निर्माण और उनकी छतों पर बागवानी को बढ़ावा देने के लिये सब कुछ करेंगे। मगर जो देश की नदियां इस समय पूरी तौर पर स्वच्छ और निर्मल हो गई है उसे किसी भी रूप में गंदा नहीं होने देंगे अगर कोई कहीं से नाले नालियों की गंद या कूड़ा डालकर इसे मैली करने की कोशिश करता है तो सब कुछ भूलकर उसके विरूद्ध आवाज उठाने में पीछे नहीं रहेंगे।

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आज इससे जुड़े कई संगठनों के द्वारा वेवीनार कांफ्रेंस के माध्यम से पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है और पेड़ पौधे भी लगाये गये है इसके लिये हम सबको अपने बधाई और विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाऐं देते हुए सभी के निरोगी बने रहने की कामना करते है।

 

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