लॉकडाउन के चलते सस्ती कार, बाइक, सेकेंड हैंड गाड़ियों की डिमांड बढ़ी

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लॉकडाउन के चलते करीब ढाई महीने की अधिक की बंदी के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर में उछाल आने लगा है. लॉकडाउन के पहले से ही ऑटोमोबाइल सेक्टर की हालत अच्छी नहीं थी. बीएस-4 वाहनों के कारण बाजार में गिरावट चल रही थी. कंपनियां तमाम उपायों के बाद भी बिक्री बढ़ाने में ज्यादा सफल नहीं हो पा रही थी. लॉकडाउन में हालात और भी खराब हो गए. अनलॉक के पहले चरण में अब जाकर उत्तर प्रदेश में फिर से व्यवस्था पटरी पर आती नजर आ रही है.

कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बच रहे हैं. ऑटो ही नहीं लोकल बसों में लोग यात्रा करते नहीं दिख रहे हैं. छोटी दूरी के लिए लोग बाइक-स्कूटर तो पास-पड़ोस के जिलों में आवागमन के लिए चार पहिया वाहनों की खरीदारी कर रहे हैं. 11 जून से वैवाहिक सीजन भी शुरू हो रहा है, इसका भी असर गाड़ियों की बिक्री पर दिखा है. हीरो कंपनी की गाड़ियों के प्रमुख डीलर नितेन मातनहेलिया बताते हैं, “दो पहिया वाहनों की बिक्री काफी हद तक सामान्य हो गई है. अब लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बच रहे हैं, जिसका सीधा असर दो पहिया वाहनों की बिक्री पर पड़ रहा है. पहले भी एक दिन में 15 से 25 गाड़ियां बिकती थीं, वर्तमान में बिक्री पूर्व की तरह ही है.”

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मातनहेलिया का कहना है कि स्कूटर को लेकर महिलाओं में भी क्रेज है. कामकाजी महिलाएं प्रिमियम रेंज के स्कूटर को तरजीह दे रही हैं. होंडा के स्कूटर और बाइक के विक्रेता विक्रम चौहान बताते हैं, “बीएस-6 की गाड़ियों की अच्छी डिमांड है. लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए स्कूटर और बाइक खरीद रहे हैं.” गाड़ियों की मांग बढ़ने से इसके कारोबारी आशांवित हैं. डीलरों की माने तो नकदी के बजाए लोग फाइनेंस कराकर अधिक गाड़ियां खरीद रहे हैं. होंडा की गाड़ियों के डीलर दिनेश राय कहते हैं कि पहले नकदी और फाइनेंस का अनुपात 70 और 30 का होता था. अब यह अनुपात 50:50 का हो गया है.

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एक फाइनेंस कंपनी के एरिया मैनेजर अभिषेक मिश्रा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद लोग फाइनेंस कराकर खूब गाड़ियां खरीद रहे हैं. उधर, चार पहिया वाहनों में 4 से 6 लाख कीमत की कार की डिमांड से चार पहिया वाहनों की बिक्री भी सामान्य होती दिख रही है. अभी लोग महंगी गाड़ियों की तरफ नहीं जा रहे हैं. लोगों की डिमांड 4 से 6 लाख कीमत की गाड़ियों को लेकर है. बैंक की आसान लोन योजनाएं भी बाजार में उछाल लाने का काम कर रही हैं.

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लखनऊ के पुराने कार बाजार में भी पूछताछ काफी बढ़ गई है. लालबाग में पुरानी कार के विक्रेता रोहित जायसवाल कहते हैं कि लोग पुरानी कार पर डेढ़ से दो लाख रुपये तक खर्च करने को तैयार हैं. इनमें ऐसे लोग अधिक हैं जो आसपास के जिलों में सरकारी नौकरी या व्यापार करते हैं. मारूति की गाड़ियों के विक्रेता कमल गुप्ता बताते हैं, “अभी कुछ दिन ही हुए हैं शो-रूम को खुले. लग्जरी के साथ ही प्रिमियम रेंज के चाररपहिया वाहनों को लेकर पूछताछ हो रही है. अभी आठ से 10 दिन बाद बिक्री की असली तस्वीर सामने आएगी.

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