51 से 60 साल वालों के लिए ज्यादा घातक हो रहा कोरोना

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नई दिल्ली। गर्मी बढ़ने के साथ ही कोरोना का भी पारा डराने लगा है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में पहुंचने वाले ज्यादातर मरीजों के शरीर मे ऑक्सीजन की कमी मिलने से हालात बिगड़ रहे हैं। 30 फीसद मरीजों को ऑक्सीजन देनी पड़ी है। जो आंकड़े उभरकर आ रहे हैं उसके अनुसार 51 से 60 साल के उम्र वर्ग के लिए कोरोना ज्यादा खतरनाक साबित हुआ है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में होने वाली मृत्यु और अन्य विषयों पर प्रकाश डाल रही है संतोष शुक्ल की यह रिपोर्ट..

गाजियाबाद के 40 फीसद से ज्यादा मरीजों की गई जान
कोरोना संक्रमण से लड़कर यूं तो मेरठ में 82 साल के बुजुर्ग भी ठीक हुए हैं, किंतु 60 साल के आसपास के लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। मेडिकल कॉलेज में अब तक 409 मरीजों को भर्ती किया गया, जिसमें से 85 की मौत हो गई। इसमें सर्वाधिक 40 मरीज मेरठ के हैं। उधर, गाजियाबाद के 40 भर्ती मरीजों में से 16 की मौत हुई, जिसमें सभी कोमॉर्बिड मिले। 20 साल से कम उम्र वालों में कोरोना कतई घातक नहीं मिल रहा। खास बात है कि इनके बीच 10 मरीजों की डायलिसिस भी हुई, जबकि एक मरीज किडनी ट्रांसप्लांट फेल होने के बावजूद कोरोना को शिकस्त देने में सफल रहा है।

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50 से 70 साल के बीच के संक्रमित मरीजों ने दम तोड़ा
कोरोना मरीजों को वेंटीलेटर पर रखना पड़ा मरीजों की जिंदगी बचाने को चढ़ानी पड़ी ऑक्सीजन 101 ऑक्सीजन व 50 वेंटीलेटर पर मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में गुरुवार तक 379 मरीज भर्ती किये गए, जिसमें 26 फीसद यानी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा लोगों को आइसीयू में रखना पड़ा। वेंटीलेटर पर रखे गए ज्यादातर मरीजों को बचाने में डॉक्टर असफल रहे, जबकि ऑक्सीजन पर रखे मरीजों की रिकवरी बेहतर रही है। कोविड प्रभारी डॉ. सुधीर राठी ने बताया कि गुरुवार रात तक 80 में 17 मरीज ऑक्सीजन पर रखने पड़े हैं।

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इसलिए ज्यादा है मौत का आंकड़ा
मेडिकल कॉलेज के प्रोफसर डॉ. टीवीएस आर्य के अनुसार 51 से 60 साल के उम्र वर्ग का व्यक्ति सक्रिय रहता है। साथ ही इस उम्र तक खासकर बीपी, शुगर, हार्ट, किडनी और अन्य बीमारियां असर दिखाने लगती हैं। युवाओं की तुलना में इस उम्र में प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है, इसलिए इनके बीच मौतों का आंकड़ा ज्यादा है, जबकि इस आयु वर्ग से अधिक उम्र का व्यक्ति कम एक्सपोजर में आता है। एहतियात ज्यादा बरतता है। घर से बाहर कम निकलता है।

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