बैरिकैडिंग से युवक घायल, पुलिस दे 75 लाख का मुआवजा

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दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय पुलिस द्वारा की गई बैरीकैडिंग से टकराकर शून्यावस्था में गए युवक के परिवार को 75 लाख रूपये का मुआवजा दिए जाने के निर्देश से आम नागरिकों को काफी राहत मिल सकती है। देशभर में पुलिस के द्वारा समय असमय आवश्यक और अनावश्यक रूप से जो बैरीकैडिंग मनमाने रूप से लगा दिए जाते हैं उनमें भी कमी आएगी। हाईकोर्ट ने पुलिस वेरिकेड से टकराकर शून्य अवस्था में पहुंचे युवक के परिवार को 75 लाख रुपए मुआवजा देने के लिए पुलिस को आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पुलिस की सभी दलीलों को एक तरफ करते हुए कहा कि सड़क पर वेरिकेड चेन से वंधे हुए थे और वहां पर कोई रिफ्लेक्टर नहीं लगे थे। न्यायमूर्ति नवीन चावला ने अपने फैसले में कहा कि हादसे में पुलिस की लापरवाही साफ देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सड़क पर वेरिकेड पर कोई लाइट नहीं थी और न ही उन पर रिफ्लेक्टर लगे थे, जिससे वह वाइक सवार को दिखाई नहीं दिए। वेंच ने कहा कि वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए वैरिकेडचेन से वंधे हुए थे लेकिन अंधेरे की वजह से उचित दूरी से दिखाई नहीं दिए। मेरा मानना है कि जनहित में इस संदर्भ में पूरे देशभर में लापरवाही के साथ इस तरह के पुलिस द्वारा खुद लगाए जाने वाले बैरीकैडिंग या इनकी लापरवाही से लगने वाले बैरिकैडिंग की रोकथाम और आवश्यकता पर लगाए जाए तो वहां रोशनी की पूर्ण व्यवस्था के साथ इसके संदर्भ में जारी नियमों का पालन कराने हेतु किसी नागरिक को हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से प्रयास करना चाहिए। बताते चलें कि वर्तमान समय में देशभर में जहां भी पुलिसवालों की मर्जी होती है वहां खुद या अपने सहयोगियों से नागरिकों का प्रवेश बंद करने या वाहनों का आवागमन रोकने के लिए गलत तरीके से बैरीकैडिंग लगा दिए जाते हैं जिनसे कितने ही लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है। क्या यह अच्छा हो कि सरकार भी इस तरह के बैरिकैडिंग लगाने वाले पुलिस अधिकारियों का पता कर जुर्म की रकम उनके अपने फंड से अदा कराए तो भविष्य में यह नागरिकों के हित में केंद्र और प्रदेश की सरकारों का अच्छा फैसला हो सकता है। और इनकी निरंकुशता पर भी लग सकती है रोक।

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रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)

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