लाॅकडाउन में पुजारी कर्मकांडी ब्राहमण और पुरोहितों की सुध ले समाज और सरकार

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कोरोना की माहमारी ने आम आदमी की दिनचर्या जो सुबह पूजा पाठ और धर्म कर्म के साथ शुरू होती थी को घर में बंद कर एकदम ही बदल दी गई है। और अपने तथा अपनों के बचाव में किसी के द्वारा उसका विरोध भी नहीं किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जो नीति निर्धारित कर रहे हैं सब उसे मानते हुए चल रहे हैं। अभी तक विपक्ष भी विरोध की आवाज उठाने के बावजूद उनके सुर से सुर मिलाने में ही भलाई समझ रहा था। लेकिन जबसे सत्ताधारी दल के नेताओं और जनप्रतिनिधियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने यह कहना शुरू किया है कि कोरोना तो लंबे समय तक चलने वाली बीमारी हो सकती है और कुछ का यह कहना कि अब तो इसके साथ जीने की आदत डालनी पड़ेगी के बाद विपक्षी दलों में सुगबुगाहट शुरू हुई और अपना जनाधार खिसकते देख और कोरोना में कोई बहुत बड़ा सुधार ना जाने पर आज सभी विपक्षी दलों की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निमंत्रण पर एक बैठक हुई। इसके बाद कोरोना को लेकर विपक्षी दलों और उनके सहयोगी वैज्ञानिकों के द्वारा मंथन किया जा सकता है। और अगर ऐसा है तो वो किसी भी रूप में सत्ताधारी दल के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता।  यह तो रही पक्ष और विपक्ष की बात। लेकिन देश का इतिहास गवाह है कि पंडे पुजारियों ने लोगों में धार्मिक भावनाएं जगाकर ऐसी क्रांति की लौ जलाई थी कि देर सबेर अंग्रेजों को भी यहां भागना पड़ा था। आज यही वर्ग मंदिरों के पुजारी जहां तक सूचना मिल रही है आर्थिक रूप से बुरी तरह परेशान हैं और सामाजिक रूप से भी जनता से कट गए हैं। क्योंकि पिछले लगभग दो माह से मंदिरों के द्वार खुल नहीं रहे हैं। लोग घरों से बाहर नहीं निकल सकते और कहीं किसी ने कोशिश की तो उसका जो अंजाम हुआ उसे भी यह वर्ग चुपचाप पी गया क्योंकि जान है तो जहान की भावना से जुड़ाा है। लेकिन अब अगर सत्ता या विपक्ष से जुड़े राजनेताओं और समाजसेवियों तथा दानवीरों अथवा सरकार की ओर से ब्राहमण समाज से जुड़े देशभर में लाखों मंदिरों और पुजारियों की स्थितियों पर ध्यान नहीं दिया तो इनके समक्ष कई नई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। क्योंकि यह लाइनों में खड़े होकर मांग नहीं सकते। कोई बहुत बड़ी पूंजी इनके पास होती नहीं। जनता मंदिरेां में आ नहीं रही। चढ़ावे और दक्षिणा के नाम पर कुछ मिल नहीं रहा। मांगकर यह खा नहीं सकते। इसलिए जरूरी है कि चाहे सरकार की ओर से या समाज की तरफ से आर्थिक रूप से कमजोर पुजारियों की समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक प्रयास होने चाहिए। इस संदर्भ में हरिद्वार के रेलवे रोड स्थित मारवाड़ी पंचायती धर्मशाला के पुजारी दिनेश चंद डोबरियाल का यह कथन बिल्कुल सही है कि कर्मकांडी ब्राहमण पुजारी तीर्थ पुरोहितों के लिए अब जल्दी सोचा जाना चाहिए तो दूसरी ओर वेस्ट एंड रोड मेरठ में बालाजी मंदिर व शनिधाम के संस्थापक महामंडलेश्वर शनि पीठाधीश्वर श्री श्री 108 महंत श्री महेंद्र दास जी महाराज का कहना है कि भगवान की आराधना व मानव उत्थान में लगे समाज के इस वर्ग को धर्म की राह दिखाने वाले पुजारी पुरोहितों की समस्याओं की ओर सरकारें ध्यान दें। और इनकी परेशानियों का हल निकाले।

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-रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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