होम क्वारंटाइन के लिए अमित मोहन प्रसाद की लोग कर रहे है प्रशंसा

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उप प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्राईवेट नर्सिंग होमों में कोरोना पाॅजिटिवों के इलाज की दे अनुमति
सीएमओ के मोबाइल बंद रहने से खाने और अव्यवस्था को लेकर होते है बवाल
प्रदेश के उपप्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य वरिष्ठ आईएएस श्री अमित मोहन प्रसाद द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी और स्वास्थ्य मंत्री जी की कोरोना से पीड़ित व्यक्ति स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करे और उन्हें कोई परेशानी न हो जैसी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में क्वारंटाइन करने वालों के परिवारों द्वारा अव्यवस्थाओं के लगाये जाने वाले आरोपों को कम करने हेतु प्रदेश में होम क्वारंटाइन करने के जो आदेश किये गये है उनकी सब तारीफ और प्रशंसा कर रहे है क्योंकि यह आदेश ग्रामीण कहावत आम के आम और गुटलियों के दाम के समान है इससे एक तो सरकारी स्तर पर क्वारंटाइन होने वालों की बढ़ रही संख्या के चलते जो अव्यवस्थाऐं भी हो रही थी और खर्च भी बढ़ रहा था होम क्वारंटाइन से इन दोनों से छुटकारा मिलेगा और इस काम में लगे चिकित्सक व अन्य अधिकारी और तेजी से कोरोना पाॅजिटिवो की सेवा कर व्यवस्थाओं में अपना सहयोग दे सकते है। दूसरी तरफ यूपी के सरकारी मेडिकल काॅलेजों में बनाये गये कोविड-19 अस्पतालोे के लिए अलग से अधीक्षकों की तैनाती भी कोरोना पाॅजिटीवों के इलाज में तेजी लाने के मामले में एक अच्छा कदम कहा जा सकता है। इसके अतिरिक्त और भी आदेशों जैसे 55 साल से कम डाक्टर की ड्यूटी प्रत्येक वार्ड में सीसीटीवी कैमरे मरीजों को पोष्टिक आहार उपलब्ध कराने तथा कोरोना प्रोटोकाॅल के अनुसार ही सबो को सील किया जाने जैसे आदेश भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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प्रदेश में निजी चिकित्सकों द्वारा इलाज न किये जाने और अपने क्लीनिकों पर मरीजों को देखने से बचने के चलते विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त कितने ही लोग रोज परेशान नजर आते है। मेरठ के डाक्टरों तनुराज सिरोही डा0 नवीन कुमार शर्मा डा0 अभिषेक मोहन डा0 अनिल नोशरान डा0 वीएन त्यागी डा0 एचएम रस्तोगी आदि का यह कथन बिल्कुल सही है कि निजी चिकित्सक इलाज करना चाहते है गाईडलाईन हो जारी। श्री अमित मोहन प्रसाद की कार्यप्रणाली और जिलों में डीएम रहते हुए कार्य के निस्तारण में तेजी को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने अभी सही तरीके से उन तक डाक्टरों की बात पहुंचाई नहीं है वर्ना गाईड लाईन तो कभी की जारी हो गई होती।
कई नागरिकों का यह मानना है कि जहां जहां कोरोना पाॅजिटिवों से संबंध लोग क्वारंटाइन हो रहे है उन जगहों के मालिकों को उनके खाने पीने की जिम्मेदारी सौंपी जाए और ज्यादा जोर होम क्वारंटाइन पर दिया जाए तो अच्छा है। क्योंकि श्री बस्ती में जो क्वारंटाइन सेन्टर में अव्यवस्था को लेकर बवाल हुआ और 18 घरों में आग लगा दी गई तथा आये दिन खाने की गुणवत्ता को लेकर उठने वाले सवालों को ध्यान में रखकर इस संदर्भ में ठोस निर्णय लिया ही जाना चाहिए।
वैसे तो उप प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्री अमित मोहन प्रसाद अपने आप में एक सर्वगुण सम्पन्न अधिकारी है और अब तक जहां जहां भी रहे अपने कार्य को लेकर खुद भी लोकप्रियता प्राप्त की और प्रदेश सरकार का मान भी बढ़ाया।

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अब अगर अमित मोहन प्रसाद साहब प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों के मोबाइल फोन खुले रखवा सके तो कोरोना पाॅजिटिव व क्चारंटाइन से संबंध कितने ही विवादों का निस्तारण आसानी से हो सकता है।लेकिन आग लगने और हंगामा होने की घटनाऐं जहां तक पता चलता है इसलिए हो रही है कि जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारी न तो अपने कार्यालय में मिलते और न ही उनका फोन खुला होता है और लेडलाईन नम्बर से भी वो बात नही करना चाहते इसलिए बवाल होने की घटनाऐं घट रही है। उप प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद साहब से नागरिकों का आग्रह है कि सरकारी अस्पतालों की तरह कोरोना पाॅजिटिव के इलाज की व्यवस्था प्राईवेट नर्सिंग होमों मे हो सके इसकी अनुमति भी दी जाए हां इसके लिए सरकार हर जिले में एक या दो प्राईवेट अस्पतालों में व्यवस्थाऐं की जाए इससे कोरोना पाॅजिटिवों के इलाज और क्वारंटाइन को लेकर जो बवाल मच रहे है उनका समाधान आसानी से हो सकता है।

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रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)

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