सपा और बसपा को भी शामिल होना चाहिए था सोनिया गांधी की वीडियो काफ्रेंसिंग में जनता की आवाज बनना इस समय नेताओं के हित में है

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कोरोना माहमारी मुददे को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा बीते दिवस 22 विपक्षी दलों के नेताओें से की गई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कई मुददों पर सहमति बनाने की कोशिश की गई। ध्यान से सोचें तो अपने इस प्रयास में वह सफल भी रहीं क्योंकि पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, पश्चिम बंगाल की बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सीताराम येचुरी और द्रमुक नेता एमके स्तालिन, राजद नेता तेजस्वी यादव, नेकां के उमर अब्दुल्ला आदि विपक्षी नेता बैठक में शामिल हुए। मुझे लगता है कि सोनिया गांधी की यह बैठक कोरोना सहित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुददों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी इसलिए बसपा मुखिया मायावती जी और सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव जी समेत दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल को भी इस कांफ्रेंसिंग में हर हाल में हिस्सा लेना चाहिए था। क्योंकि भले ही यूपी में कांग्रेस महासचिव के रूप में प्रियंका गांधी अपनी सक्रियता से जनता में पैठ बना रही हो लेकिन यहां यह मुददा विचारणीय नहीं था। राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना को मानते हुए सबको इसमें शामिल होना चाहिए था। लेकिन चलों जो भी इस काफ्रेसिंग में कहा गया कि प्रधानमंत्री को कोरोना से जीतने की आस सही साबित नहीं हुई। और इससे बाहर निकलने की उनके पास कोई रणनीति भी नहीं है। 20 लाख करोड़ रूपये के आर्थिक पैकेज के बारे में कहा गया कि यह सिर्फ मजाक साबित हुआ है। सोनियाा गांधी ने कहा कि कोरोना के संदर्भ में हमारी मांग को अनसुना किया गया। तो दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि कई जाने माने अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि 2020-21 में विकास दर पांच प्रतिशत रह सकती है। सबसे बड़ी बात जो इसमें उठी वो यह थी कि सरकार पर आरोप लगाया कि उसने लोकतांत्रिक होने का दिखावा करना भी छोड़ दिया है। और पूछा गया कि संसद के दोनों सदनों व स्थायी समितियों की बैठक कब बुलाई जाएगी। सोनिया गांधी ने सदस्यों से कहा कि रचनात्मक आलोचना करना, सुझाव देना और लोगों की आवाज बनना हमारा कर्तव्य भी है। इसी भावना के तहत यह बैठक आयोजित की गई। मैं ना तो सत्ता दल का विरोधी हूं और ना विपक्ष का समर्थक। एक आम नागरिक की भांति राष्ट्रहित में मैं भी सोचता हूं कि देश में लोकतंत्र कायम रहे। और किसी भी प्रकार से कोई निरंकुश ना रह पाए तथा विकास तेजी से तथा राष्ट्र मजबूत हो। इसलिए देश में सत्ता तो मजबूत दलों के हाथ में है और विपक्ष को अपनी भूमिका सकारात्मकता से निभाने के लिए आम आदमी से जुड़े सभी मुददों पर आपसी मनमुटाव को भूलकर इस समय केंद्र की राजनीति में एक होना चाहिए। क्योंकि अभी ना तो केंद्र मेें चुनाव होने जा रहे हैं और ना ही कोई जनमत संग्रह की कौन दल कितना मजबूत हैं और जब कभी ऐसा होगा तो किसनेे जनहित की आवाज बनने की कोशिश की है जनता भी उसके साथ खड़ी नजर आएगी। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए फिलहाल विपक्ष को अटूट होकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

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-रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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