फ्लाइंग बुलेट्स : तेजस की दूसरी स्क्वाड्रन तैयार….

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नई दिल्ली, 27 मई।   भारतीय वायुसेना को स्वदेशी Tejas लड़ाकू एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन मिल गई. बता दें की वायुसेना अध्यक्ष एयरचीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने कोयंबटूर के पास सुलूर में 18 स्क्वाड्रन में नए तेजस एयरक्राफ्ट को शामिल किया. इस स्क्वाड्रन को फ्लाइंग बुलेट्स के नाम से भी जाना जाता है. Tejas की पहली स्क्वाड्रन फ्लाइंग डैगर भी सुलूर में ही है.

बताते चलें की फ्लाइंग बुलेट्स को अप्रैल 1965 में पहली बार गठित किया गया था और इसे फॉलेंड नेट फाइटर्स से लैस किया गया था. 1971 की लड़ाई में नेट ने अपने से कई गुना आधुनिक पाकिस्तानी सेबर जेट्स को तबाह किया और वायुसेना का इकलौता परमवीर चक्र इसी स्क्वाड्रन को मिला. बाद में स्क्वाड्रन को मिग-27 एयरक्राफ्ट मिले और 2016 में मिग-27 के सेवानिवृत्त होने के बाद स्क्वाड्रन को भी नंबरप्लेटेड कर दिया गया. स्क्वाड्रन को पिछले महीने सुलूर में पुनर्जीवित किया गया और 27 मई को ये भारतीय वायुसेना की तेजस की दूसरी स्क्वाड्रन बन गई.

वायुसेना में Tejas की पहली स्क्वाड्रन को जुलाई 2015 को बेंगलुरू में तैयार किया गया था जिसे बाद में सुलूर ले जाया गया. इस स्क्वाड्रन यानि फ्लाइंग डैगर्स में इस समय 16 Tejas शामिल हो चुके हैं और ये पूरी तरह ऑपरेशनल है. वायुसेना ने शुरुआत में 40 Tejas का ऑर्डर दिया था और अब 83 Tejas का अतिरिक्त ऑर्डर देने की तैयारी में है. Tejas अपनी श्रेणी का सबसे हल्का और छोटा एयरक्राफ्ट है. इसे उड़ान में आसानी देने के लिए फ्लाई बाइ वायर की सुविधा है, मल्टी मोड रडार है, इंटीग्रेटेड डिजिटल एवियोनिक्स है और इसका ढांचा कंपोज़िट मेटेरियल से बना हुआ है.

 

 

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