कोरोना को लेकर लाॅकडाउन, भय फैलने से रोेकने हेतु रहें व्यस्त चाहें कुछ भी करना पड़ें

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डरें नहीं कोरोना वायरस से अब हमें जल्द ही छुटकारा मिल सकता है यह बात इसकी दवाई ढूंढने और उसमें सहयोग कर रहे लोगों के आ रहे बयानों और जो मरीज ठीक होकर अपने घरों को जा रहे है उनकी बात सुनकर कहा जा सकता है कि थोड़ा सा संयम बरतते हुए नियमों का पालन किया जाए तो पीड़ितों के अच्छे होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। क्योंकि यह एक जिंदगी नहीं पूरे समाज का मुददा है। हमें गलतियां ढूंढने की बजाय इसके मुकाबले के लिए तैयार होना होगा।

वैसे माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की कोरोना से ज्यादा लोग दहशत से मर सकते हैं इसलिए सड़कों पर उतरे कामगारों को समझाने के लिए कीर्तन करो या भजन लेकिन उन्हें संतुष्ट करो से यह अहसास होता है कि देश के हर नागरिक पर इस समय कोरोना से किसी भी रूप में त्रस्त अपने भाईयों की मदद की कितनी बड़ी जिम्मेदारी आन पड़ी है। मेरा मानना है कि इसे पूरा करने के लिए हम जिस भी स्थिति में है हमें मदद के लिए हाथ बढ़ाने चाहिए क्योंकि छोटे प्रयास भी बडा काम कर जाते हैं। आजकल हम माता के नवरात्र मना रहे हैं। मुझे लगता है कि लाॅकडाउन के कारण जिमाने के लिए कन्याओं का मिलना मुश्किल है। अगर इस मौके पर बनने वाली खाद्य सामग्री और जो पैसे कन्याओं को दिए जाते हैं उनसे जरूरतमंदों की मदद की जाए तो बड़ा लाभ होगा।
रही बात कोरोना की तो एक अच्छी बात यह है कि इसकी कुछ ही घंटों में टेस्टिंग की व्यवस्थाएं उभरकर सामने आ रही है। जोकि एक अच्छी बात है। क्योंकि अगर कोई पाॅजीटिव आता है तो उसे भर्ती कराकर अंजाने में लगने वाली बीमारी से बचा जा सकताा हहै तो दूसरी ओर जैसे जैसे तापमान बढ़ेगा जानकारों का मानना है कि इसका प्रभाव कम होगा। डाॅक्टर कह रहे हैं कि गरम पानी पीएं और नमक के गरारे करने से भी इसकी रोकथाम हो सकती है। ऐसे में उपायों पर अमल किया जा सकता हैं।

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एक बात जो अब विशेष रूप से उभरकर सामने आ रही है वो यह है कि किसी भी कौम या बिरादरी का भले ही क्यों न हो लेकिन कोरोना का प्रकोप बढ़ाने में धार्मिक जलसे काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जो ठीक नहीं कहा जा सकता। मेरा मानना है कि प्यार से हो या सख्ती से जो भी हो इन जलसों मेें चाहें यह किसी भी प्रकार के हों भीड़ जुटने से रोका जाना चाहिए।
एक खबर पढ़ने को मिली कि मुंबई से सीतामढ़ी बिहार लौटकर आए एक युवक की जिम्मेदार अधिकारियों को सूचना देने पर युवक के परिवार के लोगों द्वारा सूचना देने वाले की हत्या कर दी गई। यह घटना किसी भी रूप में ठीक नहीं कही जा सकती। पूरे देश में अगर ऐसा होता है तो बाहरी व्यक्तियों की खबर प्राप्त करने के लिए सरकार जिला प्रशासन के अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।

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बताया जा रहा है कि धािर्मक जलासों में शािमल होनें के लिए जो लोग विदेशों से आते हैं जो अपने आप को पर्यटक दिखाकर वीजा आदि प्राप्त करते हैं। और फिर वहां पहुंचकर धार्मिक जलसों में शिरकत की जाती है। तो यह भी नहीं पता चलता कि कितने लोग कहां से इन जलसों में भाग लेने आए इसलिए भविष्य में भी कोरोना जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिले उसे रोकने के लिए पर्यटन वीजा मांगने वालों से सारी जानकारी प्राप्त की जाए कि वो किस उददेश्य से जा रहे हैं कहां कहा जाएंगे और कहीं भी भीड़ बढ़ाने का कारण तो नहीं बनेंगे। यह बात अब आवश्यकत हो गई है।
मेरा मानना है कि अगर हमें अब प्रभावी रूप से परिवारों को बचाना है और कोरोना की महामारी को रोकना है तो बिना किसी पक्षपात को ध्यान में रखकर घर से बिना कारण निकलने वाले सड़क पर घूमने का सही कारण नहीं बताते हैं तो इन पर मोटे जुर्माने किए जाएं क्योंकि जेल भेजने से बचना होगा अगर वहां भीड़ बढ़ी तो भी परेशानी होगी।
रही बात कोरोना को लेकर भय व्याप्त होने की तो यह बिल्कुल सही है लेकिन हम अपनी संसद और उसके सदस्यों को बधाई देनी चाहिए कि लाॅकडाउन की कठिन घड़ी में लगभग तीन दशक बाद दिन में दो बार रामायण और महाभारत के अतिरिक्त चाणक्य , शक्तिमान, व्योमकेश बक्शी जैसे सीरियल शुरू कराए जो समय काटने का सबसे अच्छा माध्यम है। रही बात स्वास्स्थ्य की तो उसके लिए सब व्यायाम कर सकते हैं तथा वो अन्य काम जो घर में बैठकर हो सकते हैं वो किए जा सकते हैं। कुल मिलाकर कहने का आश्य यह है कि दुनिया में भारत कोरोना की संख्या बढ़ने के बाद भी मुक्त हो सकता है आवश्यकता सिर्फ धैर्य और खुद को किसी न किसी काम में व्यस्त रखने की है।

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