केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिव ने कहा नहीं बढ़ेगी लाॅकडाउन की सीमा

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अफवाहों पर ध्यान ना दें, कोरोना से निपटने के अच्छे परिणाम आ रहे हैं सामने
कोरोना के मरीजों की संख्या में भले ही बढ़ोत्तरी हो रही हो लेकिन इससे निपटने में भी काफी सफलता मिलने की खबरें पढ़ने और सुनने को मिल रही हैं। इसको लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं भी व्याप्त है। लेकिन सही गलत क्या है इसके बारे में विश्वास से कोई कुछ भी नहीं कह सकता। हां इतना जरूर कहा जा सकता है कि काफी लोग ठीक भी हो रहे हैं। 14 अप्रैल के बाद लाॅकडाउन को बढ़ाने की बात भी नहीं हो रही है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि शायद कठिनाई के दिन जो कोरोना को लेकर उत्पन्न हुए हैं। वो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लिए गए सूझबूझ के निर्णयों के चलते अब जल्द अच्छे दिनों में परिवर्तित हो सकते हैं। अगर हम थोड़ी समझदारी से काम लें तो। जनता से थोड़ा दूरी बनाकर मिलने और जब भी कहीं बाहर जाओं तो आकर हाथ धोने की अपील कितनी आवश्यक है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भीड़ को लेकर किस तरह से यह महामारी सुरसा के मुंह की भांति बढ़ रही है।
आज पढ़ने को मिला कि देश की राजधानी में एक धार्मिक कार्यक्रम में जुटे 200 लोगों के कारण इस बीमारी का भयंकर रूप सामने आया। इसी प्रकार पेरिस में एक सामूहिक प्रार्थना के दौरान यह बीमारी बम के समान सामने आई तो पंजाब में जो दो लोग मरे दोनों ही गं्रथी थे जिसका मतलब सिर्फ यह है कि धार्मिक भावना से जुड़े वो लोग जो भीड़ से संबंध रहते हैं उनकी वजह से अभी शायद कोरोना की रफ्तार नहीं रूक पाई है। इसलिए अब हम अपनी धार्मिक आस्था के तहत तो सबकुछ करें लेकिन भीड़ का हिस्सा बनने की बजाय अकेले करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा।
दोस्तों अभी तक दी जाने वाली छूट के समय जो लोग भिड़कर चल रहे थे। इसे कोरोना का बढ़ता प्रभाव कहें या जागरूकता अभियान अब सब लोग ज्यादातर दूरी बनाकर खड़े होकर दिखाई देने लगे हैं। आवश्यक सामान की भी कोई कमी नजर नहीं आती है और सही दामों पर वह बिक भी रहा है। इसलिए भरण पोषण से संबंध कोई समस्या सामने नजर नहीं आ रही है क्योंकि जरूरतमंदों को दान दाता हर तरह से मदद कर रहे हैं। इतना ही नहीं पीएम सहायता फंड में अपने देश में तो हर क्षेत्र से जुड़े लोग अपनी अपनी हैसियत के अनुसार आगे बढ़कर दान दे ही रहे हैं विदेशो में रह रहे प्रवासी भारतीयों में भी इसका जमकर प्रचार हो रहा है और वहां से बड़ी मदद मिलने की उम्मीद की जा सकती है। जिसे देखकर यह कहा जा सकता है कि किसी भी स्तर पर कोरोना के प्रभाव को रोकने या इसकी दवाई बनाने अथवा बचाव के संसाधन जुटाने के मामले में शायद धन की कोई कमी सामने नहीं आएगी। हां मास्क व सेनिटाइजर की कमी को लेकर कई जगह पढ़ने को मिल रहा है तो इसमें मेरा मानना है कि जिस प्रकार से बनारस के जिलाधिकारी और एसएसपी ने मुनाफाखोरी रोकने के लिए ग्राहक बनकर पहुंच नौ दुकानदारों को जेल भेजा उसी प्रकार देश के बाकी जिलों के पुलिस प्रशासन के अधिकारी ऐसे ही कदम उठाएं तो इस समस्या का समाधान हो सकता है क्येांकि कई कंपनिया सेनिटाइजर बना रही हैं तो मास्क बनाने का काम युद्धस्तर पर हो रहा है। ऐसे में इसकी कमी का अर्थ है कि इसकी कालाबाजारी हो रही है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि जब दूध फैक्टियों द्वारा कम कीमत पर खरीदा जा रहा है तो पराग व मदर डेयरी जैसी डेयरियों को भी पांच रूपये प्रतिलीटर जनहित में कम करनी चाहिए। पुलिस प्रशासन ने 112 की क्षमता बढ़ाकर एक अच्छा प्रयास किया है क्योंकि इससे आम आदमी की समस्याओं से सरकार अवगत होती रहेगी। कुल मिलाकर मेरा कहने का यह मतलब है कि सभी लोग कोरोना की समस्या के समाधान के लिए जात पात अमीरी गरीबी और अपनी विचारधाराओं को भूलकर कंधे से कंधा मिलाकर एकजुट हों। हमारे सहयोग से केंद्र व प्रदेश सरकार जल्द से जल्द इस परेशानी से जनता को छुटकारा दिला सकती है। आप अगर बीमार हैं तो भी घबराएं नहीं क्योंकि लंदन की 26 वर्षीय सारा हाल नामक युवती लीवर और मधुमेह से पीड़ित थी और कुछ ही दिनों में अहतियात बरते हुए कोरोना वायरस के प्रभाव से मुक्त हो गई। इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। और ना ही अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत है। सब एकजुट हो जाओ हर समस्या का समाधान मिलेगा।
स्मरण रहे कि 1918 में स्पेनिश फ्लू का जो वायरस दुनिया में फैला था उसमें जानकारों के अनुसार लगभग पांच करोड़ लोग मारे गए थे इस समय ऐसी कोई समस्या नहीं है। बस घबराने की बजाय संभलकर हर प्रकार से चलने की आवश्कयता है।
दोस्तों कोरोना को लेकर मेरे द्वारा यह कुछ लाइनें उन लोगों के लिए लिखी गई है जो बिना मतलब सड़कों पर घूमकर औरों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। अगर आपको पसंद आए तो इन्हें आगे बढ़ाएं जनहित में।
तुम्हारे बाहर निकलने से हमारी जिंदगी मौत ना बन जाए यारों
बस अपने परिवार के लिए बाहर ना निकलने का मेरा एक बार कहना मान लो यारो
घर में बैठकर रामायण महाभारत चाणक्य सर्कस शक्तिमान व्योमकेश बक्शी जैसे सीरीयल देखकर यारों समय का मजा लिजिए।
सड़क पर आकर बच्चों व बीवी के सामने डंडे व जूते खाकर बेइज्जत होने से अच्छा है घर में समाकर अपनी इज्जत बचा लिए बस इतना कहा मेरा मान लीजिए

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