जनता करे अफसरों का सहयोग, आम आदमी को थाने भेजने से बचें पुलिसकर्मी

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दुनियाभर में फैले कोरोना के खौफ से आज कम या ज्यादा हर व्यक्ति प्रभावित है। विकासशील और बड़े देशों की जो स्थिति है वो किसी से छिपी नहीं है। अपने देश में वहां के मुकाबले हालात दुरूस्त हैं। लेकिन जिस प्रकार से पहले एक दिवसीय जनता कफ्र्यू और अब तीन दिन का लाॅकडाउन से यह स्पष्ट होता है कि समस्या तो यहां भी है ही। इसके बावजूद नियमों का पालन कराने और शहर को कफ्र्यू से बचाने के लिए जिलाधिकारी श्री अनिल ढींगरा, एसएसपी अजय साहनी, एसपी सिटी डाॅ अखिलेश नारायण सिंह, एडीएम सिटी अजय तिवारी, सिटी मजिस्ट्रेट एसके सिंह, एडीजी जोन श्री प्रशांत कुमार और कमिश्नर अनीता सी मेश्राम आदि के नेतृत्व में शहर वासियों को हर संभव सुविधा सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं जो उपलब्ध कराने के लिए जो उच्च स्तरीय प्रयास किए जा रहे हैं। वो अपने आप में उल्लेखनीय है और उनकी जितनी सराहना की जाए वो कम है। मेरा मानना है कि अगर कहीं कोई एक दो कर्मचारी या अधिकारी किसी पर कोई ज्यादती भी कर रहा है चाहे वह अंजाने में हो रही है उसे फिलहाल नजरअंदाज ही किया जाना चाहिए। क्योंकि वर्तमान में भले ही लाॅकडाउन हो लेकिन जिस प्रकार प्रधानमंत्री जी ने कोरोना वायरस को समाप्त करने के दृष्टिकोण से जरूरत पड़ने पर और सख्ती करने के निर्देश दिए हैं उस सबको देखते हुए हमें यह समझ लेना चाहिए कि यह स्थिति कानून व्यवस्था के लिए नहीं बल्कि आम आदमी की जान बचाने के लिए हैं। अगर किसी वजह से कफ्र्यू लागू होता है तो और कई और परेशानियां खड़ी होंगी। इसलिए बिना मतलब घर से ना निकलें और हर मामले में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को अपना पूर्ण सहयोग नागरिक दें। यह उनके अपने और उनके बच्चों के हित में होगा।
देश में स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कोरोना के चलते काफी गंभीर है। लेकिन इससे बचाव के लिए जो उपाय किए जा रहे हैं उसमें एक महत्वपूर्ण यह भी है कि ज्यादा लोग एक जगह इकटठा ना हो। इस दृष्टि से जेलों से कुछ शर्तांे के साथ एक समयसीमा पूरी करने वाले कैदियों को पैरोल पर भी छोड़ा जा रहा है। इन सब बातों को ध्यान में रखकर खासकर पुलिसकर्मियों को आम आदमी को लाॅकडाउन के दौरान घूमते पकड़े जाने पर घर भेज दिया जाए जिससे वह दोबारा सड़कों पर ना आ सके तो यह नागरिकों के हित में होगा वहीं प्रशासन को कई मुसीबतों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अपने आप दी जा रही बेल इस बात का सुबूत है कि जेल में भी भीड़ ना बढ़े इसके प्रयास किए जा रहे है तों थानों में भी ज्यादा समय भीड़ को नहीं रख सकते है। इसलिए मेरा मानना है कि सख्ती तो की जाए मगर नागरिकों को थाने आदि भेजने से पुलिसकर्मी अगर बचें तो अच्छा है। दूसरी तरफ मेरा मानना है कि घूमते हुए पकड़े जाने वाले लोग शायद अपराधी प्रवृति के नहीं है। और पिछले दिनों न्यायलय द्वारा बिना मर्जी के लोगों के फोटो खिंचवाने को लेकर बवाल मचा था इसलिए पुलिसवालें जो पोस्टर लगाकर लोगों के फोटो खिंचवा रहे हैं कि मैं समाज का दुश्मन हूं वो उचित नहीं है। ऐसी प्रवृति और कार्यप्रणाली से पुलिसकर्मियों को बचना चाहिए लाॅकडाउन की सफलता के लिए ।

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