कोरोना वायरस का 21 साल बचाने के लिए करेंगे 21 दिन डटकर मुकाबला

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अपने और अपनों के लिए आओं प्रधानमंत्री के आह्वान में मिलकर करे सहयोग

पहले एक दिन जनता कफ्र्यू फिर देश भर में उसी दिन ताली और थाली बजाकर किये गए उद्घोष के तुरंत बाद 23,24,25 के लिए यूपी सहित कई प्रदेशों में लाॅकडाउन उक्त सीमा समाप्त भी नहीं हुई कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जनता को अपने सीधे संबोधन में पूरे देश में 21 दिन का लाॅकडाउन घोषित करते हुए स्पष्ट कहा गया कि जनता इसे कफ्र्यू ही समझे। और निर्देश दिये गये कि इसका पालन कराने हेतु आवश्यकता पड़ने पर सख्त कार्यवाही भी की जाए और राज्य सरकारों को करने की छूट भी दी गई तो उनके द्वारा सभी जिलाधिकारियों को ऐसे निर्देश दिये गये। जो इस बात का प्रतीक है कि कहीं न कहीं कोरोना का बड़ा प्रकोप भी जनता पर हो सकता था इसलिए उससे बचाने हेतु जनहित में यह लाॅकडाउन कहा जा सकता है।

इक्ट्ठा भीड़ क्या होगा
लाॅकडाउन में जनसमस्याओं के समाधान और नागरिकों को जरूरी सामान उपलब्ध हो इस बात को दृष्टि रख प्रतिदिन छूट देने की जो नीति बनाई गई वो समायानुकूल थी लेकिन जिस प्रकार से कुछ व्यापारियों की मुनाफाखोरी जमाखोरी व आर्थिक लाभ कमाने की प्रवृत्ति के चलते जो भीड़ एक जगह इक्कठ्ा हो रही है उसे देखकर यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है क्या वाकई जिस मकसद से लाॅकडाउन किया गया है वो पूरा हो रहा है मुझे नहीं लगता कि सही है हां जनता जरूर परेशान है। और अगर ऐसा ही चला तो इसके अच्छे परिणाम शायद नहीं आयेंगे।

घर बैठे सामान मिलेगा
यूपी में 10000 गाड़ियां लगाकर घर-घर सामान भेजने की व्यवस्था की गई है उसके लिए टाॅल फ्री नम्बर 18001800150 पर संपर्क कर नागरिक अपनी आवश्यकताओं से अवगत करा सकते है उन्हें घर बैठे सामान उपलब्ध होगा। मेरा मानना है कि यह व्यवस्था बाजारों में भीड़ कम करने के लिए जल्द से जल्द लागू की जाए। और मंडियों तक आने और वहां से सामान लेकर जाने के लिए जो पास जारी होने है सरकार को वो जल्द से जल्द करने चाहिए।

रेलवे ने 20 लाख
रेलवे ने 20 लाख ठेका कर्मियों को तीन महीने तक वेतन देने और इसका भुगतान पहली किस्त बीटी के माध्यम से अकाउट में जमा कराने की व्यवस्था की है तथा जल्दी ही उद्वोगों के लिए एक पैकेज घोषित किया जा सकता है।
सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गये पत्र कि लाॅकडाउन के दौरान मीडिया का कामकाज प्रभावित ना हो इसके लिए व्यवस्था की जाए और नियमों का पालन होता दिखाई दे रहा है। मगर कहीं कहीं कुछ फर्जीपत्रकार या फेसबुक आईडी चलाने वाले अपने आप को पत्रकार बताकर घूमते दिखाई दिये। पूर्व में इनसे संबंध घटनाऐं को ध्यान में रखते हुए सूचना विभाग को प्रदेश और जिलों में प्रशासन और पुलिस को इनकी कार्यप्रणाली पर रोक लगानी चाहिए जिससे कोई पत्रकारों को परेशान करने वाली घटना को इनके द्वारा अंजाम न दिया जा सके।

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पुलिस खिला रही है जनता को खाना
लाॅकडाउन के दौरान दाहाड़ी मजूदरों या मजबूरों को बैंगलूर पुलिस ढूंढ़-ढूंढ कर खाना खिला रही है। महाराष्ट्र और झारखड़ की सरकार ने भी इस संदर्भ में फेसले लिये है मुझे लगता है कि रोज कमाने और रोज खाने वाले इन मजदूरों को सभी प्रदेशों की पुलिस स्वयं या समाजसेवी संगठनों के माध्यम से यह व्यवस्था फिलहाल की जाए तो वो जनहित में होगी।
कोरोना के चलते एक खबर पढ़ने को मिली कि काम ना होने और जहां काम कर रहे थे वहां से निकाल दिये जाने पर कुछ मजदूर जयपुर से बिहार तो कुछ यूपी के मेरठ से अथवा बागपत और आदित्यपुर आदि से अपने घरों को पैदल जाने को मजबूर हो रहे है। सरकार या समाजिक संगठन आगे बढ़कर या तो इन्हें इनके घरों तक पहुंचने की व्यवस्था कराऐ अथवा लाॅकडाउन अवधि तक इनके रहन सहन और खाने की व्यवस्था की जाए।

विपक्ष अपने तरीके से कर रहा है सहयोग
कोरोना की गंभीरता को देखते हुए अब सरकार के साथ-साथ विपक्षी नेता भी जनहित में गंभीर नजर आने लगे है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बसपा मुखिया मायावती जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशों पर राज्य सरकारे दे ध्यान तो यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार इस दौरान व्यवस्था बढ़ने के साथ-साथ दाम बढ़ने से रोके तो कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि संकट से पहले गंभीरता से क्यों नहीं लिए कोरोना को।

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नेट की बढ़ सकती है मांग
कोरोना के प्रभाव के बढ़ते घर-घर में इंटरनेट की मांग बढ़ गई है। और इस खपत में अगर लाॅकडाउन की स्थिति आगे बढ़ती है तो यह खपत और बढ़ सकती है तथा उन कुछ लोगों की भावनाओं को बड़ा धक्का पहुंच सकता है जो इसकी आलोचना करते नहीं थकते। क्योंकि सोशल मीडिया इस दौरान और भी लोकप्रिय हो सकता है।

अमेरिका ने किया चीन पर 200 खरब का केस
दुनिया कोरोना को लेकर कितनी गंभीर है और अमेरिकी कितने नाराज इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि कोरोना की जानकारी समय से साझा न करने के लिए शायद एक अमेरिकी सांसद द्वारा चीन पर 200 खरब डाॅलर का केस किया गया है।

124 साल में पहली बार टला ऑलम्पिक
बताते है कि 124 सालों के ऑलंपिक खेलों के इतिहास में पहली बार यह खेल टाले गये है तो सौरव गांगुली का कहना है कि आईपीएल को लेकर उनके पास कोई जवाब नहीं है। दूसरी और अन्य खिलाड़ी सोशल मीडिया पर फिल्में देखकर मन भला रहे है।

कालाबाजारी के मास्क मिले
केन्द्र हो या प्रदेश सारी सरकारें व जनहित की सोच रखने वाले नागरिक कोरोना की आपदा से निपटने के लिए हर फार्मूले पर काम कर रहें है। लेकिन कुछ लोग मुनाफाखोरी करने से बाज नहीं आ रहे। क्योंकि अभी प्रधानमंत्री जी ने इस संदर्भ में प्रयास तेज किए तो दूसरी 15 करोड़ रूपये के मास्क बरामद हुए जो शायद कालाबाजारी के लिए इक्ट्ठा किये गये थे।

30 जून को जमा होगी आयकर व जीएसटी
केन्द्र सरकार ने व्यापारी वर्ग को थोड़ा राहत पहुंचाने के लिए आयकर व जीएसटी जमा कराने की तीथि 30 जून घोषित कर दी है। एलआईसी जो 31 मार्च को जमा होती थी अब वो 15 अप्रैल तक जमा की जा सकती है।

कोरोना को रोकने में भारत संक्षम
कुछ लोगों द्वारा वर्तमान समय में छोटी से छोटी बीमारी को जिसमें कोरोना के लक्षण झलकते हो इससे जोड़ने की कोशिश की जाती है मगर इसे सही नहीं कहा जा सकता। इसलिए अगर किसी को जरा सा भी शक हो वो अधिकृत प्राईवेट लैबाॅट्री में अपनी जांच करा सकते है। इसके लिए सरकार ने कुछ लैबाॅट्री निर्धारित की है। और डब्ल्यूएचओ का भी कहना है कि भारत इससे निपटने के लिए सक्षम है और दूवारा इस वायरस के होने का खतरा ना के बाराबर है और अब इसे बढ़ने से रोकने के लिए गांव व झुग्गी झोपड़ी में भी इसकी खोज शुरू हो सकती है।

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राज्य सभा चुनाव टला
कोरोना को लेकर हर कोई चिन्तित है इसका अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि निर्वाचन आयोग ने फिलहाल 26 मार्च को होने वाले राज्यसभा के चुनावों पर रोक लगा दी है।
मेरी याद में पहली बार धार्मिक दृष्टि से और खासकर बहुसंख्यकों में महत्वपूर्ण नवरात्रें पर्व मंदिरों के स्थान पर नागारिकों द्वारा घरों पर मनाये जा रहे है जिससे इस अवसरों पर पूजा पाठ कराने वाले हमारे आदणीय प्ररोहितों को काफी बड़े स्तर पर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

अखबारों से नहीं फेलता प्रदूषण
कुछ लोगों द्वारा पूर्व में कई तरीके से यह दुस प्रचार किया जा रहा था कि अखबारों से भी फेल सकता है कोरोना लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट किया है कि अखबारों से नहीं फेलता कोरोना, अखबारों के प्रति विश्वसनीयता का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि 130 करोड़ की आवादी 28 राज्य और 8 केन्द्र शासित प्रदेशों के नागरिक जहां-जहां तक समाचार पत्र उपलब्ध होते है वहां वहां अपनी भाषाओं में उन्हें पहले भी पढ़ते थे और आज भी पढ़ रहे है।

अपना व बच्चों का भविष्य सुरक्षित
कुल मिलाकर मेरे कहने का एक मात्र आशय यह है कि हम सबको मिलकार अपने नफे नुकसान की चिन्ता न करके अगर हम चाहते है कि 21 साल पीछे न जाए और सफलता से आगे बढ़ते रहे तो हमें अपने लाभ और हित की बात भुलकर देशभर में लागू लाॅकडाउन के नियमों का पालन करते हुए अपना और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि थोड़े से लालच में हमें भी इटली और ईरान व अन्य कोरोना से प्रभावित देशों के नागरिकों की तरह अपनों के लिए रोना न पड़े।

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