ओवैसी की जनसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे ‘15 हैं 100 करोड़ पर भारी’

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भाजपा को सत्ता में आने से कोई नहीं रोक सकता
सांसद असददुदीन औवेशी के समर्थक अगर ऐसे ही बयान देते रहे तो यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव और 2024 में लोकसभा निर्वाचन के साथ ही ज्यादातर प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनावों में भाजपा पहले से भी ज्यादा मतों से जीतकर दोबारा आ सकती है और प्रचंड बहुमत से अपनी सरकार बना सकती है।

स्मरण रहे कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व जब भाजपा को छोड़ तमाम राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों द्वारा कहे अनकहे रूप से अल्पसंख्यकों के नाम पर मुस्लिमों को एक करने के प्रयास शुरू किए गए थे तो बहुसंख्यक हिंदू मतदाता चाहे वो भाजपा समर्थक या अन्य के प्रशंसक सबने कहकर या बिन कहे ज्यादातर के द्वारा शायद भाजपा को वोट दी गई और परिणामस्वरूप नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एक मजबूत सरकार अपने सहयोगियों को साथ लेकर अपने दम पर भाजपा ने बनाई।

उसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में क्योंकि अरविंद केजरीवाल ने कभी जातिवाद पर ना तो किसी से वोट मांगे और ना किसी को भी संगठित करने की कोशिश की। उन्होंने गरीब बेसहाराओं के उत्थान की बात करते हुए उनकी समस्याओं की समाधान कराने के साथ ही सुविधाएं उपलब्ध करानेे की बात की। बीते दिनों हुए चुनाव से पूर्व नागरिकता कानून या नरेंद्र मोदी जी की आलोचना से दूर रहे अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी पूर्ण बहुमत से भाजपा और अन्य दलों के भरपूर प्रचार प्रसार के बावजूद उन्हें हराकर चुनाव जीतने में सफल रही। कारण सिर्फ यही रहा कि केजरीवाल ने जाति के नाम पर नहीं काम के नाम पर वोट मांगे।

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पाठकों को अवगत होगा कि 2012 में जब श्री अखिलेश यादव द्वारा सक्रिय राजनीति में उतरकर यूपी विधानसभा के चुनाव में जनता से वोट मांगने के साथ ही एक नारा दिया गया था बेरोजगारों को दिया जाएगा भत्ता। उसका मेरी निगाह में यह असर हुआ कि प्रदेश के हर जिले में हजारों नौजवानों ने अपना पंजीकरण बेरोजगार के रूप में कराया और क्योंकि बेरोजगार भत्ता और छात्रों को लैपटाॅप तभी मिलना था जब सपा की सरकार सत्ता में आती सो नौजवानों और उनके परिवारों ने खुलकर सपा को वोट दी और अखिलेश प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। लेकिन भाजपा केंद्र में सरकार होने तथा अन्य प्रदेशाों से भारी तादात में भाजपाईयों के पहुंचने के बावजूद दिल्ली में अरविंद केजरीवाल को अपने चुनाव घोषणा पत्र में 2 रूपये किलो आटा और 12वीं पास छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने की बात करने के बाद भी चुनाव नहीं जीत पाई क्योंकि केजरीवाल कौम के नाम पर नहीं काम के नाम पर चुनाव लड़ रहे थे।

एक खबर के अनुसार मगर अब जिस प्रकार से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लेमीन के नेता बोल रहे हैं उससे यह पक्का है कि देशभर के बहुसंख्यक वैचारिक मतभेद और राजनीतिक विचारधारा अलग होने के बावजूद भी पुनः भाजपा को वोट देने के लिए ना चाहते हुए भी मजबूर होंगे। बताते चलें कि कर्नाटक के गुलबर्ग में मुंबई के भयखला से चुनाव लड़ चुके वारिस पठान ने कहा कि हम 15 करोड़ (मुस्लिम) हैं, याद रख लेना, मगर 100 करोड़ (हिंदुओं) पर भारी पड़ेंगे। तो जेडीएस पार्षद इमरान पासा के दावे के इस इस दावे के बावजूद कि कुछ विपक्षी लोगों ने कार्यक्रम को बाधित करने के लिए ऐसा किया के चलते आयोजन में शामिल एमआईएम नेता जलसे में शामिल एक महिला नेता अमूल्या द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए। अमूल्या और वारिस पठान के विरूद्ध मुकदमे दर्ज हो गए हैं और असदुद्दीन ओवैसी ने भी उन्हें रोकते हुए उनके बयान की निंदा करते हुए कहा कि इससे हम सहमत नहीं है और आश्वस्त करते हैं कि हम भारत के लिए हैं। के बावजूद ऐसे नारों और कथन से बहुसंख्यक और हिंदू 2014 से भी ज्यादा मजबूती से एक हो सकते हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।

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ओवैसी के कार्यक्रम में हुई बयानबाजी पर शिवसेना और मनसे द्वारा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है तो युवा रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चैधरी वसीम रजा ने आइएआइएम पर भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया यूपी के मेरठ में रालोद नेता ने कहा कि हिंदुस्तान गंगा जमुनी तहजीब का देश है। भाईचारा हमारी पहचान है लेकिन आरएसएस और एआईएमआईएम नफरत का जहर फैलाकर इसे खत्म करना चाहते हैं।

कुल मिलाकर किसने क्या कहा क्या नहीं कहा इनके विरूद्ध देशद्रोह के दर्ज मुकदमे में क्या होगा क्या नहीं वो एक अलग बात है लेकिन यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि सांसद ओवैसी द्वारा अपनी ही जनसभा में जो सीएए विरोधी थी में अपने ही नेताओं के कथन को नकारते हुए भले ही उनकी निंदा की गई हो लेकिन ग्रामीण कहावत अब पछताए क्या होत है जब चिड़िया चुग गई खेत के समान उनकी पार्टी के नेताओं के बयान हिंदू मतदाताओं को ना चाहते हुए भी अगले चुनावों में भाजपा के समर्थन में मतदान करके लिए प्रेरित कर सकते हैं।

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मुझे लगता है कि अगर एक दो बार और ऐसे ही बयान जनता के बीच और आ गए तो हो सकता है कि मेरी सोच सही ना हो लेकिन मेरा मानना है कि आगामी चुनावों में ग्राम प्रधान से लेकर लोकसभा तक में भाजपा को अपना परचम लहराने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ना हो इसके लिए ओवैसी सहित तमाम भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों चाहे वो क्षेत्रीय हो या राष्टीय के नेताओं को अपने कार्यकर्ताअेां को संयम से बोलने की सीख देनी चाहिए क्योंकि देश के स्वर्णिम विकास और जनहित के काम पूरी गति से हो और हमारे सत्ताधारी निरंकुश ना हो पाए इसलिए विपक्ष भी मजबूती से आए का ध्यान जन और देशहित में रखना होगा। यह वक्त की सबसे बड़ी मांग है।

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