मुस्लिम महिलाएं भी मस्जिदों में प्रवेश का अधिकार मांग रही हैं – सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली, 3 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामले को लेकर 9 जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई की. इस दौरान पीठ ने बड़ी टिप्पणी करके हुए कहा, ‘हम यहां सबरीमला पुनर्विचार के लिए नहीं हैं बल्कि हम यहां कई बड़े मुद्दे को तय करने के लिए बैठे हैं. जिसमें सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की मांग की मांग जैसे मुस्लिम महिलाएं भी मस्जिद में प्रवेश मांग रही हैं.’

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बता दें की केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बहस की शुरुआत की, उन्होने बताया की सभी पक्षों में सवालों को लेकर सहमति नही बन पाई है.पीठ को सवाल खुद तय करने चाहिए जिसपर सुनवाई हो. सवाल जरूरी नही की खुली अदालत में तय हो सवाल को इन चैंबर तय किया जा सकता है. पक्षकारों की ओर वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने 5 जजों के संविधान पीठ द्वारा बडी बेंच को भेजे जाने पर सवाल उठाया, कहा कि क्या इस मामले में पुर्विचार करते समय इस क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल किया जा सकता है?

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बताते चलें की सीजेआई ने कहा कि सबरीमला मामले को पांच जजों की बेंच ने 9 जजों की बेंच को रेफर किया था. जिसमें सबरीमला ही नही ऐसे दूसरे मुद्दे भी है. वकील राजीव धवन ने कहा कि सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई न तो टाली जा सकती है और न ही लंबित रखी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट इसे लंबित नहीं रख सकता.

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