जबरदस्ती उपभोक्ता का कनेक्शन काटने वाले बिजली विभाग के; एक्सईन के वेतन से कटेंगे 2000 रूपये रोज

53
loading...

सरकार की नीतियों के विपरित जनहित की योजनाओं के कार्याें में लापरवाही करने वाले अफसरों द्वारा आए दिन उपभोक्ता फोरम और सूचना का अधिकार फोरम आदि के आदेशों को नजरअंदाज किए जाने की घटनाएं खूब सुनने और देखने को मिलती है लेकिन क्योंकि जो भी जुर्माना कहीं से भी लगता है वो घुमा फिराकर सरकारी कोष या किसी कृपा पात्र प्यादे से जमा करा दिया जाता है इसलिए जनहित से जुड़े सरकारी कार्यालयों में तैनात कुछ अधिकारियों की निरंकुशता निरंतर बढ़ती ही जा रही है क्योंकि आदेशों का उल्लंघन करने पर ना तो कोई लाल निशान सर्विस बुक में लगाया जाता है और ना ही जुर्माना अपनी जेब से भरना पड़ता है। इसलिए लापरवाही और हिटलरशाही बढ़ती ही जा रही है। मगर जनपद फिरोजाबाद में विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम आगरा मंडल ने फिरोजाबाद में तैनात एक्सईएन अरविंद पांडेय की मनमानी के खिलाफ वेतन से प्रतिदिन 2000 रुपये काटने के आदेश दिए हैं। यह पैसे तब तक काटे जाएंगे जब तक उपभोक्ता का कनेक्शन दोबारा से जोड़ नहीं दिया जाएगा। फोरम के आदेश के बाद भी अधिकारी ने उपभोक्ता का कनैक्शन काट दिया था। सुहागनगरी के मशरूरगंज निवासी शारिक खान पुत्र जमील खान के बिजली के कनेक्शन को मनमाने ढंग बिजली विभाग के कर्मचारियों ने काट दिया। इस मामले में बिजली विभाग के फोरम ने एक्सईएन को आदेश दिया था कि मामले की सुनवाई तक उसका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाए। इसकी पैरवी फोरम में संजीव गुप्ता ने शुरू की। शारिक खान के अनुसार 6 नवंबर 2019 को फोरम में परिवाद दायर किया था। इसमें 10 अक्तूबर 2019 को बिजली विभाग द्वारा मांगी गई धनराशि 365650 रुपये को निरस्त कराने की मांग की। सुनवाई तक कनेक्शन नहीं काटने की मांग रखी थी। इस मामले में फोरम ने सुनवाई के दौरान यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश पांच दिसंबर को दिए थे। तब भी बिजली कर्मचारियों ने यह कनेक्शन सात फरवरी को काट दिया। 11 फरवरी को सुनवाई के दौरान फोरम ने माना कि फोरम के आदेश के बाद भी कनेक्शन काटा गया है तो उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति का अधिकार है। फोरम के अध्यक्ष एवं न्यायिक सदस्य विजेंद्र कुमार ने कहा कि उप्र विद्युत नियामक आयोग की विनियमावली 2007 के नियम 7.3 के तहत अधिकारिता का प्रयोग करते हुए आदेश दिया गया है कि विद्युत विभाग अधिशासी अभियंता विद्युत नगरीय वितरण खंड प्रथम के वेतन से रोज 2000 रुपये की दर से उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति अदा करे। यह राशि तब तक वेतन से काटकर उपभोक्ता को दी जाएगी जब तक उसका कनेक्शन दोबारा से जोड़ नहीं दिया जाता है। मेरा मानना है कि जितने भी आयोग और फोरम जनहित के मामले सुनने में सक्षम है उन सहित माननीय न्यायालय द्वारा अगर इस प्रकार के आदेश किए जाएं तो एक तरफ तो उनके निर्देश और आदेश का पालन होने लगेगा दूसरी तरफ आम आदमी को अपने काम के लिए जो उत्पीड़न जिनके यहां चक्कर काटते हुए झेलना पड़ता है उससे छुटकारा मिलेगा तीसरे सरकारी धन को जो दुरूपयोग सीधे सीधे या घूमा फिराकर जुर्माना भरने के रूप में किया जाता है वो भी बचेगा। कुल मिलाकर उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम आगरा मंडल का यह निर्णय अत्यंत जनहित व सरकार के हित का है। इसलिए इसका पालन तो हर हाल में होना ही चाहिए।

इसे भी पढ़िए :  रेप के आरोप में भदोही BJP विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी का भतीजा गिरफ्तार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

three × one =