सरकार दे ध्यान, अमित अग्रवाल का प्रयास है सराहनीय

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शहीदों के सम्मान के प्रति अफसर उदासीन क्यों, सोचना होगा युवाओं को क्या संदेश दे रहे हैं हम
भारतीय सेना में कम उम्र में ऑपरेशन पवन रक्षक मेघदूत रक्षक पराक्रम फाल्कन हिफाजत नाॅर्दन बाॅर्डर में साहस दिखा चुका द्रास बटालियन द्वारा 11 फरवरी को अपना स्थापना दिवस मनाया गया। जो इस बात का प्रतीक है कि हमारी सरकार और नागरिक शहीदों और जवानों के द्वारा देशहित के लिए किए जाने वाले कार्याें को लेकर उनका भरपूर सम्मान करने के साथ साथ हर कदम पर उनके और उनके परिवारों के साथ खड़ा होने का विश्वास दिला रहे हैं। लेकिन यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि पूर्व विधायक श्री अमित अग्रवाल की अध्यक्षता में 23 जुलाई 2002 को लगाई गई शहीद मेजर मनोज तलवार की प्रतिमा को एमडीए द्वारा सौंदर्यीकरण के नाम पर उसे तुड़वा दिया गया और जागरूक नागरिकों के अनुसार इसे किसी वाहन से टूटना दर्शाने की कोशिश की गई। बताते हैं कि इस प्रतिमा का अनावरण उस समय के पुलिस महानिरीक्षण श्री विक्रम सिंह व भाजपा सांसद विनय कटियार एवं ब्रिगेडियर केटीजी नांबियार आदि की उपस्थिति में हुआ था। और इसके लिए बनी समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक अमित अग्रवाल व अन्य में सुशील कुमार उपनगर प्रमुख, संजीव रस्तोगी, पूर्व विधायक मोहनलाल कपूर आदि शामिल बताए गए। शहीद की प्रतिमा पुन लगवाने के लिए भरपूर प्रयास हो रहे हैं। अमित अग्रवाल सहित डीएन डिग्री काॅलेज के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सम्राट मलिक आदि प्रयास कर रहे हैं। मगर एक शहीद की प्रतिमा को लगवाने की बजाय एमडीए वीसी द्वारा इसे भी अवैध निर्माण और घोटाले की जांच कराने की बात करते हैं वो ही इस मामले में कर रहे बताए जाते हैं। दूसरी तरफ छात्रों ने कमिश्नरी से पैदल मार्च निकाला और एमडीए के वीसी का घेराव कर नारेबाजी की। छात्रों ने वीसी को दो दिन का समय देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी। वीसी ने आश्वासन दिया कि प्रतिमा को जहां से हटाया गया था, शीघ्र ही वहीं सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा। मैं खुद ही जाकर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करूंगा। डीएन काॅलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सम्राट मलिक के नेतृत्व में 40-50 छात्र सोमवार को कमिश्नरी से पैदल मार्च करते हुए एमडीए कार्यालय पहुंचे और छात्रों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सूचना पर सिविल लाइन पुलिस पहुंच गई। छात्रों ने वीसी एमडीए राजेश कुमार पांडे को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यह पुलिस का मामला नहीं है। शहीद मेजर मनोज तलवार की प्रतिमा एमडीए ने दस साल पहले कमिश्नर आवास चैराहे से हटाई थी। कारण चाहे कोई भी हो, अमर शहीद मनोज तलवार की प्रतिमा को अपने नियत स्थान से हटाए जाने के तरीके पर हमें घोर आपत्ति है। यदि चैराहे के कायाकल्प को ही कारण माना जाए तो कुछ समय के लिए प्रतिमा को हटाने की निश्चित प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए था। प्रतिमा को सम्मानपूर्वक कहीं सुरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिए था। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में पुनः उसी स्थान पर प्रतिमा को सम्मान के साथ स्थापित किया जाना चाहिए था। छात्रों ने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों का स्थान हमारे हृदय में अनंत काल तक रहेगा। महापुरुषों व बहादुर योद्धाओं की प्रतिमा समाज के लिए अनुकरणीय प्रेरणा के प्रकाश पुंज के रूप में होती है। लेकिन शहीद मेजर मनोज तलवार के पिता का दुख कभी किसी अधिकारी ने नहीं समझा। चैराहे से हटाकर फुटपाथ पर लगाने से शहीद की प्रतिमा का अपमान हो रहा है। एमडीए वीसी राजेश कुमार पांडेय ने कहा कि शहीद की प्रतिमा की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। प्रतिमा जहां से हटाई गई थी जल्द ही वहीं पर स्थापित की जाएगी। छात्रों ने दो दिन में प्रतिमा स्थापित न होने पर एमडीए में धरना देने व आंदोलन की चेतावनी दी है। इस दौरान मेरठ काॅलेज छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री चीकू चैधरी, अनमोल, त्यागी, विजय मलिक, सीमांत यादव, सुमित यादव, शोएब अली सहित कई छात्र मौजूद रहे। डिफेंस कालोनी निवासी मेजर मनोज तलवार 13 जून 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। शहीद मनोज के पिता कैप्टन पीएल तलवार बताते हैं कि साल 1964 में लेह हवाई अड्डे के निर्माण की मुझे ही जिम्मेदारी दी गई थी। मैंने उस समय सबसे ऊंचे हवाई अड्डे को अपनी देखरेख में बनवाया था। हमने देश के लिए हर चुनौती का बहादुरी से सामना किया। कारगिल युद्ध में शहीद हुए मेजर मनोज तलवार की प्रतिमा का 23 जुलाई 2002 को कमिश्नर आवास चैराहे पर अनावरण किया गया था। दस साल पहले एमडीए ने कमिश्नर आवास चैराहे के कायाकल्प के नाम पर प्रतिमा को फुुटपाथ पर लगा दिया था, तभी से प्रतिमा की अनदेखी की जा रही है। मैंने अपने जीवन में हार नहीं मानी। सब जंग जीतीं। लेकिन जब मेरे शहीद बेटे की प्रतिमा उसी चैराहे पर स्थापित होगी तो वह मेरी आखिरी जीत होगी। शहीदों को सम्मान देने और उनकी याद में बने स्मारक या अन्य के रखरखाव के प्रति सरकारी अधिकारी कितना संवेदनशील हैं इसका जीता जागता उदाहरण कैंट क्षेत्र के वार्ड चार में पूर्व वोल्गा होटल के निकट कांठ का पुल पर छावनी बोर्ड द्वारा बनाए गए शहीद योगेंद्र हाट को देखा जा सकता है। बताते हैं कि कारगिल में शहीद हुए ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव की याद में बनी योगेंद्र हाट अब अवैध कब्जे हो गए हैं। तथा कुछ अवैध कार्य भी होने की चर्चा सुनने को मिलती रहती है। कबाड़ियों ने यहां कब्जा जमा लिया है। सवाल यह उठता है कि बीते दिनों प्रस्तुत हुए केंद्र सरकार के बजट में रक्षा कार्यों के लिए काफी बजट निर्धारित किया गया। और देश का आम आदमी भी सरहदों पर सर्दी गर्मी और बरसात की चिंता किए बिना हर परिस्थिति में देश की सीमाओं और सम्मान की रक्षा करने वाले सैनिकों के साथ देशवासी खड़े नजर आ रहे हैं मगर सरकारी अधिकारी आखिर इनकी अवहेलना क्यों कर रहे हैं। और ऐसा करने वालों पर सरकार लगाम क्यों नहीं लगा रही। यह विषय चर्चा का है। मगर सही बात तो यह है कि स्वतंत्रता सेनानियों और देश की आजादी के लिए शहीद हुए हमारे पूर्वजों और सैनिकों तथा उनके परिवारों के साथ पूरा देश हर स्थिति में खड़ा है फिर भी जिन्हें सरकारी अफसरों को उनके सम्मान और याद के लिए बने स्मारकों का रखरखाव नहीं किया जा रहा वो ऐसा क्यों कर रहे हैं यह तो हमारी सरकार को देखना ही चाहिए क्योंकि हम ऐसा नहीं करेंगे तो फिर हमारी युवा पीढ़ी को कौन सी प्रेरणा शहीदों के सदकार्याें को लेकर दी जाएगी।

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